Tuesday, January 23, 2024

Karpuri Thakur: कौन थे कर्पूरी ठाकुर जिन्हें मिलेगा भारत रत्न?


बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया जाएगा। कर्पूरी ठाकुर की पहचान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक और राजनीतिज्ञ के रूप में रही है। वह बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहे थे। लोकप्रियता के कारण उन्हें जन-नायक कहा जाता था। 

कौन थे कर्पूरी ठाकुर?
 कर्पूरी ठाकुर को बिहार की सियासत में सामाजिक न्याय की अलख जगाने वाला नेता माना जाता है। कर्पूरी ठाकुर साधारण नाई परिवार में जन्मे थे। कहा जाता है कि पूरी जिंदगी उन्होंने कांग्रेस विरोधी राजनीति की और अपना सियासी मुकाम हासिल किया। यहां तक कि आपातकाल के दौरान तमाम कोशिशों के बावजूद इंदिरा गांधी उन्हें गिरफ्तार नहीं करवा सकी थीं। 

1970 और 1977 में मुख्यमंत्री बने थे कर्पूरी ठाकुर
 कर्पूरी ठाकुर 1970 में पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। 22 दिसंबर 1970 को उन्होंने पहली बार राज्य की कमान संभाली थी।  उनका पहला कार्यकाल महज 163 दिन का रहा था। 1977 की जनता लहर में जब जनता पार्टी को भारी जीत मिली तब भी कर्पूरी ठाकुर दूसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। अपना यह कार्यकाल भी वह पूरा नहीं कर सके। इसके बाद भी महज दो साल से भी कम समय के कार्यकाल में उन्होंने समाज के दबे-पिछड़ों लोगों के हितों के लिए काम किया।
बिहार में मैट्रिक तक पढ़ाई मुफ्त की दी। वहीं, राज्य के सभी विभागों में हिंदी में काम करने को अनिवार्य बना दिया। उन्होंने अपने कार्यकाल में गरीबों, पिछड़ों और अति पिछड़ों के हक में ऐसे तमाम काम किए, जिससे बिहार की सियासत में आमूलचूल परिवर्तन आ गया। इसके बाद कर्पूरी ठाकुर की राजनीतिक ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ और वो बिहार की सियासत में समाजवाद का बड़ा चेहरा बन गए।

कर्पूरी ठाकुर के शागिर्द हैं लालू-नीतीश
बिहार में समाजवाद की राजनीति कर रहे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार कर्पूरी ठाकुर के ही शागिर्द हैं। जनता पार्टी के दौर में लालू और नीतीश ने कर्पूरी ठाकुर की उंगली पकड़कर सियासत के गुर सीखे। ऐसे में जब लालू यादव बिहार की सत्ता में आए तो उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के कामों को आगे बढ़ाया। वहीं, नीतीश कुमार ने भी अति पिछड़े समुदाय के हक में कई काम किए।

बिहार की राजनीति में अहम हैं कर्पूरी ठाकुर
चुनावी विश्लेषकों की मानें तो कर्पूरी ठाकुर को बिहार की राजनीति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 1988 में कर्पूरी ठाकुर का निधन हो गया था, लेकिन इतने साल बाद भी वो बिहार के पिछड़े और अति पिछड़े मतदाताओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। गौरतलब है कि बिहार में पिछड़ों और अतिपिछड़ों की आबादी करीब 52 प्रतिशत है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी पकड़ बनाने के मकसद से कर्पूरी ठाकुर का नाम लेते रहते हैं। यही वजह है कि 2020 में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ‘कर्पूरी ठाकुर सुविधा केंद्र’ खोलने का ऐलान किया था। 

Sunday, January 21, 2024

राम मंदिर ध्वज: राम मंदिर पर फहराया जाएगा ऐसा खास ध्वज, जानिए इस पर बने सूर्य और पेड़ का महत्व

 


राम मंदिर ध्वज: अयोध्या में भव्य राम मंदिर लगभग बनकर तैयार है। मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति स्थापित की जा चुकी है। वहीं राम मंदिर पर फहराए जाने वाले खास ध्वज को मध्य प्रदेश के रीवा में तैयार किया गया है। इस ध्वज पर सूर्य के साथ खास कोविदार वृक्ष को अंकित किया गया है। 


आइए जानते हैं कि सूर्य और कोविदार वृक्ष को आखिर इस ध्वज पर स्थान क्यों दिया गया है? यह किस चीज का प्रतीक है? दरअसल सूर्य भगवान राम के वंश (सूर्यवंशी) को दर्शाता है। वहीं माना जाता है कि किसी समय में कोविदार वृक्ष अयोध्या साम्राज्य की शक्ति और संप्रभुता का प्रतीक था। जिस प्रकार बरगद भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है, उसी प्रकार कोविदार वृक्ष अयोध्या का राजवृक्ष था।

बता दें कि उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अयोध्या शोध संस्थान के डायरेक्टर डॉ. लवकुश द्विवेदी ने कोविदार वृक्ष को लेकर शोधकर्ता ललित मिश्रा को देशभर में वाल्मीकि रामायण पर बने चित्रों का अध्ययन करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही श्लोकों को भी अच्छी तरह से परखने को कहा। इस शोध में यह बात सामने आई कि त्रेता युग में अयोध्या साम्राज्य के ध्वज पर कोविदार वृक्ष था। 


महाराणा प्रताप के वंशज राणा जगत सिंह ने अपने समय में संपूर्ण वाल्मीकि रामायण पर चित्र बनाए थे। इनमें भरत को सेना सहित चित्रकूट आकर श्री राम को अयोध्या वापस चलने के आग्रह को लेकर भी एक प्रसंग मिलता है। भारद्वाज आश्रम में विश्राम कर रहे भगवान राम शोर सुनकर लक्ष्मण से देखने को कहते हैं। उत्तर से आ रही सेना के रथ पर लगे ध्वज को देख लक्ष्मण समझ गए कि सेना अयोध्या की है। इस ध्वज पर कोविदार का वृक्ष बना था। 


इसके साथ ही वाल्मीकि रामायण के 96वें सर्ग के 18 वें श्लोक में बताया गया है कि लक्ष्मण जी को सेना के ध्वज का कोविदार वृक्ष दिखाई देता है जिससे वह पहचान लेते हैं कि सेना अयोध्या की ही है। वहीं श्लोक 21 में लक्ष्मण कहते हैं, 'भरत को आने दीजिए। हम उन्हें हरा कर ध्वज को अधीन कर लेंगे। इस श्लोक से पता चलता है कि उस समय अयोध्या का राजवृक्ष कोविदार का पेड़ था, जिसे ध्वज पर भी अंकित किया गया था।

Thursday, January 18, 2024

सेल्फी के चक्कर में गई जान: वडोदरा की हरणी झील में बच्चों को ले जा रही नाव पलटी, दो शिक्षकों समेत 16 की मौत

 



वडोदरा. वडोदरा की हरणी झील में सैर पर निकले छात्रों की एक नाव पलट गई. इसमें 14 छात्रों समेत 2 अध्यापकों की मौत हो गई है. जबकि करीब 10 अन्य छात्र घायल हो गए हैं. इसके साथ ही सात छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक नाव में 4 शिक्षकों समेत 23 बच्चे मौजूद थे. गौरतलब है कि कई लोग अभी भी लापता हैं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक छात्र हरणी झील में स्कूल ट्रिप पर आए थे और यह हादसा हो गया. घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर समेत आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं. इसके अलावा बचाव दल भी मौके पर पहुंच गया है. कई 6 छात्रों को झील से निकाला गया है.


इस मामले में वडोदरा की मेयर पिंकी सोनी ने कहा कि पर्यटक बच्चों और शिक्षकों की नाव पलट गई है. अस्पताल में तैयारियां कर ली गई हैं. बचाव कार्य भी शुरू कर दिया गया है. बताया गया कि वह नाव एक निजी स्कूल के 27 छात्रों और टीचरों को ले जा रही थी, जिनमें से किसी ने भी कथित तौर पर लाइफ जैकेट नहीं पहना था. वडोदरा शहर की हरणी झील का प्रबंधन वडोदरा नगर निगम (VMC) के साथ अनुबंध के मुताबिक कोटिया फर्म करती है. घटना के वक्त नाव में कुल 23 बच्चे और 4 शिक्षक सवार थे. वीएमसी के अग्निशमन विभाग ने झील पर बचाव अभियान चलाया. बच्चे न्यू सनराइज स्कूल के थे.

10 से 11 छात्रों को निकाला गया: दमकल अधिकारी
वडोदरा के मुख्य दमकल अधिकारी पार्थ ब्रह्मभट्ट का कहना है कि वडोदरा अग्निशमन विभाग की सभी 6 टीमें मोटनाथ झील पर पहुंच गई हैं. निकाले गए छात्रों को अब जानवी अस्पताल में भेज दिया गया है. अब तक 10 से 11 बच्चों को बचाया जा चुका है. घटनास्थल पर दमकल विभाग ने उन्हें सीपीआर भी दिया और छात्रों को आगे के इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भेज दिया गया है.

लापरवाही का आरोप
बचाए गए छात्रों में से सात को अस्पताल ले जाया गया. विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि जब बच्चे नाव पर चढ़े तो उन्हें पहनने के लिए लाइफ जैकेट नहीं दी गई जो एक बड़ी चूक है. विपक्षी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि नाव की क्षमता केवल 15 लोगों की थी लेकिन उसमें 27 लोग सवार थे. मृतक शिक्षकों की पहचान छाया पटेल और फाल्गुनी सुरती के रूप में की गई है. राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के जवान भी बचाव अभियान में शामिल हुए. सनराइज स्कूल शहर के वाघोडिया इलाके में स्थित है.


मंत्री का कड़ी कार्रवाई का भरोसा
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने वडोदरा में नाव पलटने की घटना पर कहा कि यह बहुत दुखद घटना है. जो लोग मारे गए हैं उनके परिवारों के प्रति संवेदनाएं. इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. 10 लोगों को बचाया गया है. सरकार ने घटना को बहुत गंभीरता से लिया है और आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं.

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