नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की मतगणना का परिणाम और आईएनडीआइए का भविष्य भले जो हो, लेकिन दिल्ली में आप एवं कांग्रेस की राहें अलग-अलग हो गई हैं। कांग्रेस की दिल्ली इकाई आप सरकार से जुड़े मुददों पर अब चुप्पी भी नहीं साधेगी, भाजपा के साथ आप भी हमलावर रहेगी। फरवरी 2025 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी यह अलगाव बरकरार रहने के संकेत हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस की रजामंदी न होने पर भी शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर राजधानी में आप और कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में हाथ मिलाना पड़ा था। सात में से चार सीटों पर आप व तीन सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव लड़े। हालांकि पंजाब में दोनों पार्टियों ने अलग- अलग चुनाव लड़ा और एक- दूसरे के खिलाफ खासा जहर भी उगला।
आप से अलग होने की आधिकारिक घोषणा
दिल्ली में भी पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने मंच साझा नहीं किया। जबरन थोपे गए इस गठबंधन के विरोध में ही अरविंदर सिंह लवली ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ दिया तो छह अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी कांग्रेस को बाय- बाय कर दिया। अब जबकि लोकसभा चुनाव खत्म हो गया है और मंगलवार को चुनाव परिणाम भी सामने आ जाएगा, तो प्रदेश कांग्रेस ने आप से अलग होने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
आप की गलत नीतियों का विरोध करेंगे
जागरण से बातचीत में प्रदेश इकाई अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि आईएनडीआईए भी लोकसभा चुनाव के लिए ही बना था और दिल्ली में आप-कांग्रेस का सियायी गठजोड़ भी केवल इसी चुनाव के लिए किया गया था। अब दोनों के बीच कोई समझौता नहीं रहा है। कांग्रेस पूर्णत: स्वतंत्र है। ऐसे में निश्चित तौर पर हम जनहित के मुददाें पर भाजपा के साथ साथ आप को भी कठघरे में खड़ा करेंगे और पुरजोर तरीके से आप की गलत नीतियों का विरोध करेंगे।
आप से बेहतर चुनाव कांग्रेस उम्मीदवारों ने लड़ा
विधानसभा चुनाव के संदर्भ में पूछे जाने पर यादव ने कहा कि भविष्य के निर्णय को लेकर अभी स्पष्ट तौर पर कुछ कह पाना मुश्किल है।। हालांकि प्रबल संभावना यही है कि विधानसभा चुनाव आप-कांग्रेस अलग अलग अपने दम पर लडेंगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लोकसभा चुनाव में आप से बेहतर चुनाव कांग्रेस उम्मीदवारों ने लड़ा। चुनाव परिणाम में भी भाजपा उम्मीदवारों के साथ उनकी लड़ाई कहीं ज्यादा करीब रह सकती है।