नई दिल्ली: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। शुक्रवार, 10 जनवरी को रुपया 18 पैसे लुढ़क कर पहली बार 86.04 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 85.86 पर बंद हुआ था। भारतीय मुद्रा में लगातर गिरावट के बीच लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा यह है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया का वैल्यूएशन कम होने से आम जनता पर क्या असर पड़ेगा। आइए इसको समझने की कोशिश करते हैं।
सबसे पहले यह समझना होगा की अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत क्यों गिरता है। इसका जवाब यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये के कीमत में गिरावट के कई कारण हैं। जैसे कि-
- विदेशी निवेशकों का पूंजी निकालकर भारत से बाहर जाना। इससे देश की करेंसी रुपये पर दबाव बढ़ाती है।
- विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, विदेशों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और घरेलू शेयर बाजार नकारात्मक धारणा के कारण भी भारतीय मुद्रा पर दबाव पड़ा है।
- अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को शपथ लेंगे। इसके बाद वह व्यापार से जुड़े कई बदलाव कर सकते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी है जिस कारण रुपया कमजोर हुआ है।
- फिलहाल भारत अन्य देशों से कच्चे तेल और सोने का आयात कर रहा है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है।
- भारत का निर्यात अभी बहुत कम है। जब ज्यादा निर्यात होगा तो रुपये में तेजी आएगी। बहुत ज्यादा निर्यात न होने से भी रुपया कमजोर हो रहा है।
रुपये को स्थिर करने की कोशिश में RBI
रुपये की कीमत को स्थिर करने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) विदेश मुद्रा भंडार का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। रुपये की मांग स्थिर रखने के लिए आरबीआई ने डॉलर की सप्लाई बढ़ाई है। यही कारण है कि वर्तमान समय में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी देखी जा रही है। तीन जनवरी 2025 को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 5.7 बिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई है।
अब आते हैं मुख्य सवाल पर कि रुपये के गिरने से क्या असर पड़ता है। इसका जवाब ये हैं कि रुपये के गिरने का असर केवल सरकार पर ही नहीं बल्कि आम जनता पर पड़ता है। रुपया गिरने से आयात महंगा हो जाता है जबकि निर्यात सस्ता हो जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि सरकार को विदेशों से सामान खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। जैसे की तेल हो या सोना, इन चीजों की खरीदारी के लिए सरकार को अधिक पैसे चुकाने पड़ते हैं।
आम जनता पर पड़ता है असर
गौरतलब है कि भारत अपने कच्चे तेल का कुल 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत ने 87.7 फीसदी कच्चा तेल आयात किया था। वहीं इससे पिछले वर्ष में यह 87.4 फीसदी था। रुपया कमजोर होने पर कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर आम जनता पर महंगाई के रूप में पड़ता है।
रुपये में गिरावट से किसको फायदा ?
अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और रुपया गिरने से सबसे अधिक फायदा अमेरिका और उन देशों को होता है जो भारत को चीजें निर्यात करते हैं। चूंकि दुनिया के ज्यादातर देश अमेरिका डॉलर में कारोबार करते हैं। ऐसे में भारत के पास से अमेरिकी डॉलर कम होते जाते हैं। वहीं, अमेरिका में जॉब कर भारतीयों को भी इससे फायदा होता है। जब वे भारत आते हैं तो उन्हें डॉलर को रुपये में बदलना होता है। इससे पहले के मुकाबले ज्यादा वैल्यू में भारतीय करेंसी मिलती है।
