Wednesday, December 31, 2025

रतब्याणी ई-मैगज़ीन – तृतीय संस्करण 2025-26

 

Coming Soon: रतब्याणी ई-मैगज़ीन – तृतीय संस्करण 2025-26

लेख आमंत्रण | नवाचार, अनुभव और विचारों की साझा मंच 

उत्तराखंड की शैक्षिक नवाचार यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है।
SCERT उत्तराखंड की अभिनव पहल “रतब्याणी” ई-मैगज़ीन अपने तृतीय संस्करण के साथ शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रही है।

“रतब्याणी” — जिसका अर्थ ब्रह्म मुहूर्त या भोर का समय  से है — शिक्षा में नवाचार, समावेशिता और सहयोग का प्रतीक बन चुकी है। इसके प्रथम और द्वितीय संस्करणों को शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों से व्यापक सराहना मिली है। अब तीसरा संस्करण आपके विचारों और अनुभवों का स्वागत कर रहा है।

रतब्याणी का उद्देश्य

रतब्याणी एक पूर्णतः डिजिटल, ओपन एजुकेशनल रिसोर्स (OER) आधारित ई-मैगज़ीन है, जिसका उद्देश्य है:

  • गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों तक मुक्त और निःशुल्क पहुँच

  • शिक्षकों, छात्रों और अकादमिक समुदाय के बीच ज्ञान का साझा मंच

  • NEP 2020 के अनुरूप नवाचार, अनुभवात्मक अधिगम और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा

  • प्रिंटिंग लागत से मुक्त, पर्यावरण-अनुकूल और वैश्विक पहुँच

तृतीय संस्करण के लिए संभावित विषय क्षेत्र

आप निम्नलिखित (पर सीमित नहीं) विषयों पर अपने लेख, अनुभव या केस-स्टडी भेज सकते हैं:

  • SCERT/DIET की शैक्षिक पहलें एवं नवाचार
  • कक्षा शिक्षण में ICT, AI एवं डिजिटल टूल्स का प्रभावी उपयोग
  • NEP 2020 के क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव
  • विद्यालय आधारित नवाचार एवं सर्वोत्तम प्रथाएँ
  • हैकाथॉन, टेक्नो मेला, MOOCs और प्रोजेक्ट-आधारित अधिगम
  • बाल वाटिका, आनंदमय एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा
  • पर्यावरण शिक्षा, स्कूल गार्डन, समुदाय सहभागिता
  • शिक्षकों और छात्रों की प्रेरणादायक सफलता कहानियाँ
  • शैक्षिक शोध, लेख, विचार आलेख और रिफ्लेक्शन

कौन भेज सकता है लेख?

  • शिक्षक (प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक)
  • विद्यार्थी
  • शिक्षक-प्रशिक्षक एवं DIET/SCERT संकाय
  • शोधार्थी एवं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े नवाचारकर्ता

क्यों लिखें रतब्याणी के लिए?

  • आपका लेख राज्य, राष्ट्रीय एवं वैश्विक पाठकों तक पहुँचेगा

  • शिक्षा के क्षेत्र में आपके कार्य और विचारों को पहचान और मंच मिलेगा

  • एक समावेशी, सहयोगात्मक और नवाचारी शैक्षिक समुदाय का हिस्सा बनने का अवसर

    रतब्याणी ई-मैगज़ीन देखें

Tuesday, December 2, 2025

Hackathon 2.0

 Hackathon 2.0 – Deadline Extended Again! Register Your Innovation Idea by 10 December 2025

 

Great news for all young innovators, teachers, and creative thinkers!

Due to the overwhelming response and requests from schools across the state, the last date for submitting ideas for Hackathon 2.0 has been extended once again—now up to 10 December 2025.

This is your final opportunity to be a part of Uttarakhand’s biggest school-level innovation movement, organized under the leadership of SCERT Uttarakhand. Hackathon 2.0 encourages students and teachers to design practical, technology-enabled, AI-driven solutions to real-life challenges around us.

Who Can Participate?

  • Students (Classes 6–12)
  • Teachers (Classes 1–12)
  • D.El.Ed trainees & teacher educators
  • Anyone passionate about solving problems creatively

Major Themes:

  • Education & Learning Enhancement
  • Environment & Climate Resilience
  • Digital Safety & Well-being
  • Food Safety, Health & Nutrition
  • AI for Social Good & Community Needs

Why You Should Hurry:

  • Opportunity to present your idea on a state-level innovation platform
  • Access to expert mentoring and AI-based guidance
  • Certificates from SCERT Uttarakhand
  • Selected ideas may be chosen for pilot implementation in schools
  • A chance to contribute to real change in your community

New and Final Deadline: 10 December 2025
Hurry Up! Submit Your Idea Here: (official link) 

 Or Scan QR 


लोक चित्रांकन के प्रयोगात्मक पक्ष पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण – प्रथम चरण सफलतापूर्वक सम्पन्न

 लोक चित्रांकन के प्रयोगात्मक पक्ष पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण – प्रथम चरण सफलतापूर्वक सम्पन्न


लोक कला किसी भी समाज की आत्मा होती है, और उसकी जड़ों से जुड़कर ही शिक्षा में संवेदनशीलता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक गर्व का संचार किया जा सकता है। इसी उद्देश्य के तहत राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तराखंड द्वारा 25 नवंबर से 29 नवंबर 2025 तक लोक चित्रांकन के प्रयोगात्मक पक्ष पर आधारित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रथम चरण आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण परिषद भवन में सम्पन्न हुआ जिसमें राज्य के विभिन्न जनपदों से आए कला शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया । प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन परिषद के सहायक निदेशक डाॅ० के० एन० बिजल्वान की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के आलोक में उत्तराखंड राज्य में कला शिक्षा की दिशा और भविष्य पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को प्रेरित किया। डॉ. बिजल्वान ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि कला शिक्षा न केवल रचनात्मकता का विस्तार करती है बल्कि विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में सेतु का कार्य भी करती है।


कार्यक्रम के समन्वयक एवं प्रशिक्षक डॉ० संजीव चेतन ने लोक चित्रकला की अवधारणा, उसकी शैक्षिक उपयोगिता और समेकित शिक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने प्रशिक्षण की पूरी रूपरेखा स्पष्ट करते हुए प्रतिभागियों को विभिन्न लोक कला शैलियों की बारीकियों से अवगत कराया।


इस क्रम में—

  • रवि दर्शन चोपाल ने नई शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना और उसमें कला शिक्षा की भूमिका को सरल ढंग से प्रस्तुत किया।
  • प्रिया गुसाईं ने कला के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को अत्यंत सरल एवं व्यवहारिक रूप में समझाया।
  • डॉ दीपक प्रताप ने बच्चों के शैक्षिक आकलन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को क्रमबद्ध तरीके से रखने का कार्य किया।


राज्य के नौ जनपदों — देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, बागेश्वर तथा रुद्रप्रयाग — के कला शिक्षकों ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया।

  • कैनवास पर विभिन्न रूपों में लोक कला तत्वों का चित्रण किया,
  • पारंपरिक कला में नवाचार और फ्यूजन की संभावनाओं को परखा,
  • समेकित शिक्षा (Inclusive Education) में लोक कला की भूमिका को समझते हुए इसकी सरलता और सहजता को विद्यार्थियों तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।


    इस प्रशिक्षण से शिक्षकों ने न केवल लोक कला की मूल आत्मा को जाना बल्कि बदलते समय में इसके नए रूपों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी बढ़ाए। लोक चित्रांकन प्रशिक्षण का द्वितीय चरण 2 से 6 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों को और उन्नत तकनीकों, नवाचारी अभ्यासों तथा लोक कला के विस्तृत आयामों से अवगत कराया जाएगा।



    यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कला शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है। इससे न केवल कला शिक्षकों को नई दृष्टि मिली, बल्कि लोक चित्रांकन की धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में नया मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।

    आज का खास कार्यक्रम: बच्चों की जुबानी कहानी

     आज का खास कार्यक्रम: बच्चों की जुबानी कहानी : DIET Ratura Rudrapryag Initiative

     

    आज दिनांक 29 नवंबर 2025 को अपराह्न 12.15  बजे हमारे संस्थान का अभिनव कार्यक्रम "आज की कहानी बच्चों की जुबानी" रेडियो मंदाकिनी की आवाज, रेडियो केदार और रेडियो ऋषिकेश से प्रसारित होगा।

    हम सभी से विनम्र अनुरोध है कि इस कार्यक्रम को ध्यानपूर्वक सुनें और अपने विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को भी सुनाने हेतु उचित व्यवस्था करें। निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने भी इस नवाचारी पहल की तारीफ अपने संदेश मे की । 


    कार्यक्रम की विशेष झलक

    • कहानी प्रस्तुतकर्ता: रा०प्रा०वि० फली फसालत वि०ख० ऊखीमठ के कक्षा दो के छात्र स्वाति और वैभव

    • मार्गदर्शक शिक्षिका:  अर्चना बगवाड़ी

    • विशेष संदेश: कहानी से पूर्व निदेशक महोदया, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखंड,  बंदना गर्ब्याल  का प्रेरणादायी संदेश । इसी क्रम मे अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने भी इस पहल की शुरुवात के लिए प्राचार्य डाइट सी पी रतूडी को बधाई दी । 


    कार्यक्रम का उद्देश्य

    • भाषाई दक्षता का विकास: बच्चों को अपनी भाषा में सहज और प्रवाहपूर्ण अभिव्यक्ति का अवसर मिलता है।

    • आत्मविश्वास और एक्सपोजर: रेडियो मंच पर प्रस्तुति से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें व्यापक श्रोताओं तक पहुँचने का अनुभव मिलता है।

    • नवाचार और प्रेरणा: यह कार्यक्रम शिक्षा में नवाचार का उदाहरण है, जो बच्चों को सीखने के साथ-साथ प्रेरित भी करता है।

    क्यों है यह कार्यक्रम खास?

    कक्षा १ और २ के छोटे बच्चों द्वारा रेडियो स्टेशन पर जाकर अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप कहानी का वाचन करना अपने आप में एक अनूठा अनुभव है। यह न केवल उनकी सीखने की यात्रा को रोचक बनाता है, बल्कि उन्हें समाज के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी देता है।


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