Sunday, March 31, 2024
CYBER CRIME: इस देश में 5,000 से अधिक भारतीय बने 'साइबर गुलाम', ऑनलाइन धोखाधड़ी के धंधे में...
Wednesday, March 27, 2024
ED की रिमांड में ही रहेंगे अरविंद केजरीवाल... निचली अदालत के बाद हाईकोर्ट से भी लगा झटका, नहीं मिली राहत
Saturday, March 23, 2024
Sunita Kejriwal: मैदान में कूदीं सुनीता केजरीवाल, पढ़ी सीएम की चिट्ठी, जानें क्या हैं इस संदेश के सियासी मायने
अरविंद केजरीवाल के शराब घोटाले में जेल जाने के बाद उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल मैदान में कूद पड़ी हैं। अरविंद केजरीवाल ने जेल से जनता के लिए अपना संदेश अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के माध्यम से ही सुनाया है। इस संदेश में उन्होंने जल्द जेल से बाहर आने का भरोसा दिखाया है। साथ ही, आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं से दिल्ली सरकार की योजनाओं को आगे चालू रखने की बात भी कही है। लेकिन जिस तरह उन्होंने अपना संदेश देने के लिए किसी दूसरे नेता की बजाय अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल को चुना है, उससे यह संकेत मिल गए हैं कि यदि अरविंद केजरीवाल को जेल जाने के कारण इस्तीफा देना पड़ता है, तो मुख्यमंत्री पद पर सुनीता केजरीवाल ही उनकी पहली पसंद हो सकती हैं।
सुनीता केजरीवाल ही क्यों?
सुनीता केजरीवाल अरविंद केजरीवाल की पहली पसंद क्यों बन रही हैं, इसके कुछ ठोस कारण हो सकते हैं। आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल के जेल जाने की घटना का भावनात्मक लाभ लेना चाहेगी। यदि सुनीता केजरीवाल इस समय जनता के बीच जाती हैं और अपने पति के विषय में बात करती हैं, तो इससे लोगों की सहानुभूति मिल सकती है। आम आदमी पार्टी इस रणनीति का बखूबी लाभ उठाना चाहेगी। जिस तरह अरविंद केजरीवाल ने जेल से अपना पहला संदेश सुनीता केजरीवाल के माध्यम से भेजा है, उससे भी यही लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल के अलावा किसी दूसरे को अपना नेता नहीं मानते। यदि किसी दूसरे को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी जाती है, तो इससे पार्टी के ही कुछ नेताओं-कार्यकर्ताओं के उसके खिलाफ होने की संभावना बन सकती है, पार्टी में अलग-अलग धड़े बनकर बगावत वाली स्थिति भी बन सकती है, जबकि अरविंद केजरीवाल की पत्नी होने के कारण सुनीता केजरीवाल के खिलाफ कोई नहीं जाएगा। चूंकि कार्यकर्ता भी उन्हें अरविंद केजरीवाल से ही जोड़कर देखते हैं, लिहाजा वे उनके आदेशों को भी अरविंद केजरीवाल की तरह ही मानेंगे।
'महिला होने का लाभ मिलेगा'
राजनीतिक विश्लेषक विवेक सिंह ने अमर उजाला से कहा कि यदि सुनीता केजरीवाल अरविंद केजरीवाल के बचाव में उतरती हैं, तो आम आदमी पार्टी को सहानुभूति का लाभ मिल सकता है। महिला होने के कारण महिला मतदाताओं के बीच उनकी बात ज्यादा संवेदनशीलता के साथ सुनी जा सकती है। आज भी जिस तरह अरविंद केजरीवाल ने सुनीता केजरीवाल के बहाने महिलाओं को एक-एक हजार रुपये दिए जाने की बात कही है, उससे भी यह स्पष्ट हो गया है कि अरविंद केजरीवाल आसानी से हार नहीं मानने वाले हैं। वे जेल से ही सुनीता केजरीवाल के सहारे अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएंगे।
विवेक सिंह ने कहा कि भाजपा के लिए भी किसी महिला नेता के खिलाफ कोई टिप्पणी करना आसान नहीं होगा। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर नकारात्मक टिप्पणी कर पार्टी इसका नुकसान उठा चुकी है। ऐसे में वह वही गलती दिल्ली में भी नहीं करना चाहेगी। लेकिन भाजपा यह दांव अवश्य़ खेल सकती है कि शराब के कारण जिन महिलाओं के परिवार बर्बाद हुए हैं, उन्हें सामने रखकर वह केजरीवाल को शराब घोटाले और गली-गली में शराब की दुकानें खुलवाने का दोषी ठहरा सकती है।
बिहार का अनुभव बताता है कि शराब के खिलाफ चलाई गई कोई भी मुहिम किसी भी पार्टी के लिए लाभकारी साबित होती है। विशेषकर महिलाओं के लिए यह मुद्दा बहुत आकर्षक हो सकता है। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल किस तरह सुनीता केजरीवाल को सामने रखकर सहानुभूति का लाभ उठाने की कोशिश करती है और किस तरह भाजपा इसका मुकाबला करती है।
Thursday, March 21, 2024
BREAKING NEWS: सीएम हाउस में लंबी पूछताछ के बाद अरविंद केजरीवाल को ईडी ने किया गिरफ्तार
नई दिल्ली. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार रात गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में लंबी पूछताछ के बाद जांच एजेंसी ने सीएम हाउस से केजरीवाल को गिरफ्तार किया. इससे पहले ही ईडी ने केजरीवाल का मोबाइल फोन जब्त कर लिया था, जिसके बाद हुई पूछताछ के बाद उन्हें अरेस्ट किया गया. ईडी सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे.
सीएम की गिरफ्तारी की सुगबुगाहट के बीच उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर दिया. मंत्री आतिशी और सौरभ भी वहां मौजूद रहे. मामले की गंभीरता को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया था. दिल्ली पुलिस ने भी सीएम हाउस के बाहर धारा-144 लगा दी थी. बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया. इसके अलावा रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती भी अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर की गई थी. प्रदर्शन कर रहे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को पुलिस बस में भरकर मौके से ले जा रही है.
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गुरुवार सुबह शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्डिंग के मामले में गिरफ्तारी से रोक लगाने से इनकार कर दिया था. न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन की बेंच ने अनुरोध संबंधी आम आदमी पार्टी (आप) नेता केजरीवाल के आवेदन को 22 अप्रैल को आगे के विचार के लिए सूचीबद्ध किया. पीठ ने कहा, ‘‘हमने दोनों पक्षों को सुना है और हम इस स्तर पर संरक्षण देने के लिए इच्छुक नहीं हैं. प्रतिवादी जवाब दाखिल करने के लिए स्वतंत्र है.’’
अंतरिम राहत के लिए आवेदन केजरीवाल की उस याचिका का हिस्सा है जिसमें पूछताछ के लिए उन्हें जारी किए गए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समन को चुनौती दी गई है. केजरीवाल ने ईडी द्वारा जारी नौवें समन के मद्देनजर अदालत का रुख किया है. नौवें समन में केजरीवाल को गुरुवार को पेश होने के लिए कहा गया था.
Sunday, March 17, 2024
CUET UG 2024: क्या स्थगित होगी सीयूईटी यूजी परीक्षा? यूजीसी चेयरमेन ने साफ की स्थिति, बताया कब होंगे एग्जाम
CUET UG 2024 Exam Date: कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट-यूजी के आवेदकों के लिए बड़ी खबर है। 16 मार्च को चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव का कार्यक्रम जारी किया गया, जिसके बाद से ही सीयूईटी-यूजी के आवेदक असमंजस में थे कि परीक्षा पहले सूचित किए कार्यक्रम के अनुसार ही होगी या नहीं। ऐसे में आज यूजीसी के चेयरमेन जगदेश कुमार ने स्थिति को साफ करते हुए एक ट्वीट किया है।
यूजीसी के चेयरमैन जगदेश कुमार ने कहा कि सीयूईटी-यूजी पहले की घोषणा के अनुसार 15 मई से 31 मई 2024 के बीच आयोजित किया जाएगा और लोकसभा चुनाव कार्यक्रम के मद्देनजर इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद परीक्षा की डेटशीट जारी की जाएगी।
Saturday, March 16, 2024
Uttarakhand Lok Sabha Election 2024: प्रदेश की पांचों सीटों पर 19 अप्रैल को होगा मतदान, चार जून को आएंगे नतीजे
लोकसभा चुनाव को लेकर आज भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। उत्तराखंड में पहले चरण में 19 अप्रैल को पांचों सीटों पर मतदान होगा। वहीं, चार जून को मतगणना होगी।
बता दें कि 2019 में भी उत्तराखंड में पहले चरण में ही 11 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। तब कुल 57.09 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। यह आंकड़ा वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव की तुलना में कम था। नैनीताल संसदीय क्षेत्र में सबसे अधिक 66.39 प्रतिशत और पौड़ी में सबसे कम 48.78 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि 2014 में 62.15 प्रतिशत मतदान हुआ था।
प्रदेश में आचार संहिता लागू
लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान होने के साथ ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई है। राज्य में पांच लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। इसमें तीन सीटें गढ़वाल और दो सीट कुमाऊं मंडल में हैं।
ये है पूरा कार्यक्रम
- 20 मार्च को अधिसूचना जारी होगी
- 27-28 मार्च को नामांकन
- 28-30 मार्च नामांकन पत्रों की जांच
- 30 मार्च से दो अप्रैल- नाम वापसी
- 19 अप्रैल को मतदान
भाजपा पांचों सीटों पर घोषित कर चुकी प्रत्याशी
बता दें कि, उत्तराखंड में पांच लोकसभा सीट हैं। चुनाव के लिए भाजपा पांचों सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। टिहरी गढ़वाल सीट से माला राज्यलक्ष्मी शाह, नैनीताल सीट से अजय भट्ट और अल्मोड़ा सीट से अजय टम्टा को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, पौड़ी गढ़वाल सीट पर सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी और हरिद्वार से पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पर दांव लगाया है।कांग्रेस तीन सीटों पर घोषित कर चुकी उम्मीदवार
कांग्रेस ने उत्तराखंड की तीन लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। टिहरी गढ़वाल सीट से जोत सिंह गुनसोला, पौड़ी सीट से गणेश गोदियाल और अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा पर दांव खेला गया है। दो सीटों पर अभी भी सस्पेंस बना है।उत्तराखंड में मतदाता
- कुल मतदाता- 83, 21,207 लाख
- पुरुष मतदाता- 43.08 लाख
- महिला मतदाता- 40.12 लाख
- थर्ड जेंडर - 297
- 85 साल से ऊपर मतदाता - 65177
- युवा मतदाता- 145202
- दिव्यांग मतदाता- 79965
- 11729 पोलिंग स्टेशन
- 93357 कुल सर्विस मतदाता
Friday, March 15, 2024
Uttarakhand Elections 2024: आचार संहिता लागू होते ही सरकारी संपत्तियों से हटेंगे झंडे और बैनर, ये होंगे बदलाव
- सभी सरकारी संपत्तियों से 24 घंटे के अंदर समस्त प्रचार सामग्री पोस्टर, बैनर, पंफ्लेट हटाए जाएंगे। सरकारी कार्यालयों, सभागारों, अधिकारियों के कक्षों में लगी सभी जीवित राजनैतिक महानुभावों की फोटो भी हटेगी। केवल राष्ट्रपति, राज्यपाल की फोटो लगी रह सकती है।
- लोक संपत्तियों बस स्टैंड, सड़क, सार्वजनिक चौराहों, बिजली के खम्बे, अंडरपास इत्यादि से 48 घंटे के अंदर समस्त प्रचार सामग्री पोस्टर, बैनर, पंफ्लेट हटाए जाएंगे।
- अपने निजी भवन पर बैनर, झंडा, कटआउट इत्यादि प्रतिबंधित नहीं है, बशर्ते भवन स्वामी ने ये काम अपनी इच्छा से किया हो। अधिकतम तीन झंडे लगा सकते हैं।
- प्रत्याशी भवन स्वामी की लिखित अनुमति के बाद ही निजी भवन पर अपनी प्रचार सामग्री लगा सकता है, जिसकी रिटर्निंग अफसर को जानकारी देनी होगी। नहीं तो 500 रुपये जुर्माना लगेगा।
- ऐसे काम, जिनका टेंडर निकलने के बाद वर्कऑर्डर हो चुका है लेकिन मौके पर भौतिक रूप से काम शुरू न हुआ हो, वह इस दौरान शुरू नहीं किए जा सकते। ऐसे काम जो मौके पर भौतिक रूप से शुरू हो चुके हैं, वह जारी रहेंगे।
- निजी वाहन पर बिना किसी दबाव झंडा, स्टीकर लगाया जा सकेगा, बशर्ते वह मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन न हो।
- दुपहिया वाहन से प्रचार के लिए आरओ से अनुमति जरूरी होगी, जिस पर एक झंडा लगाने की छूट होगी। ई-रिक्शा, तिपहिया वाहन एवं चौपहिया वाहन पर भी कोई बैनर अनुमन्य नहीं है। यदि ऐसा वाहन वैध प्रचार वाहन है तो उस पर केवल एक झंडा (1×0.5 फीट) अनुमन्य है। वाणिज्यिक वाहनों पर प्रचार सामग्री अनुमन्य नहीं है।
- मतदान वाले दिन मतदाता अपने पोलिंग बूथ से 200 मीटर दूरी तक वाहन ले जा सकते हैं।
- पोलिंग बूथ के 100 मीटर की दूरी में निर्वाचन संबंधी अधिकारी, कर्मचारियों को छोड़कर अन्य सभी व्यक्तियों का मोबाइल फोन का इस्तेमाल निषिद्ध है।
- किसी भी रैली या जनसभा में उम्मीदवार द्वारा टोपी, मुखौटा, स्कार्फ आदि बांटा जा सकता है, जिसको उम्मीदवार के खर्चे में जोड़ा जायेगा, परंतु साड़ी, धोती, शर्ट आदि बांटे नहीं जा सकते। इसी प्रकार देवी, देवताओं के फोटो वाले स्टीकर, डायरी, कैलेंडर आदि बांटा जाना प्रतिबंधित है। ऐसा किया जाना धारा-171 बी आईपीसी के तहत मतदाता को रिश्वत देने की श्रेणी में आता है।
Thursday, March 14, 2024
Electoral Bonds: ईडी जांच; 100 से अधिक कंपनियों से कनेक्शन! कौन हैं 1368 करोड़ के 'महादानी' सैंटियागो मार्टिन ?
भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए चुनावी बॉन्ड का विवरण प्रकाशित किया। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने चुनाव आयोग को 12 मार्च को ये आंकड़े सौंपे थे। आंकड़ों के अनुसार, जो अब ईसीआई वेबसाइट पर उपलब्ध है, कोयंबटूर स्थित कंपनी फ्यूचर गेमिंग व होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का नाम चुनावी बॉन्ड के सबसे बड़ा दानदाता के रूप में सामने आया। फ्यूचर गेमिंग की स्थापना 1991 में लॉटरी किंग ऑफ इंडिया सैंटियागो मार्टिन ने की थी।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2019 से खरीदे गए इलेक्टोरल बॉन्ड के कुल मूल्य का आधा हिस्सा 23 कंपनियों का है। कोयंबटूर स्थित लॉटरी सेवा फर्म फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड शीर्ष खरीदार है। ईसीआई द्वारा प्रकाशित सूची में 12,155.51 करोड़ रुपये के बॉन्ड का विवरण दिया गया है, जिसे लगभग पांच वर्षों में 1,300 से अधिक कंपनियों द्वारा खरीदा गया था।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने 1,368 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे और इस तरह यह 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का दान करने वाली अकेली कंपनी है।
आइए जानते हैं फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बारे में 15 जरूरी बातें-
- फ्यूचर गेमिंग की स्थापना 1991 में लॉटरी किंग ऑफ इंडिया सैंटियागो मार्टिन ने की थी।
- तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता द्वारा 2003 में लॉटरी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद सैंटियागो मार्टिन ने अपना अधिकांश कारोबार कर्नाटक और केरल में स्थानांतरित कर दिया था।
- सैंटियागो मार्टिन का फ्यूचर गेमिंग दक्षिण भारत में मार्टिन कर्नाटक के रूप में एक सहायक कंपनी के तहत संचालित होता है, और नॉर्थ ईस्ट में, इसने मार्टिन सिक्किम लॉटरी खोली। मार्टिन को सिक्किम लॉटरी का मास्टर डिस्ट्रीब्यूटर कहा जाता था।
- फ्यूचर गेमिंग 13 राज्यों में 1,000 से अधिक कर्मचारियों के कार्यबल का दावा करता है। इन राज्यों में लॉटरी कानूनी रूप से वैध है। ये 13 राज्य हैं अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम और पश्चिम बंगाल। नागालैंड और सिक्किम में फ्यूचर लोकप्रिय 'डियर लॉटरी' का एकमात्र वितरक है।
- फ्यूचर गेमिंग वेबसाइट के अनुसार सैंटियागो मार्टिन लाइबेरिया के लिए कॉन्सल जनरल भी थे, वहां भी उन्होंने लॉटरी उद्योग की स्थापना की थी।
- सैंटियागो मार्टिन लॉटरी वितरकों, स्टॉकिस्टों और एजेंटों की लॉबी ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ लॉटरी ट्रेड एंड एलाइड इंडस्ट्री के अध्यक्ष भी हैं।
- फ्यूचर गेमिंग कानूनी मामलों में उलझा रहा है। 2022 में, प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लॉटरी कंपनी फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और इसके विभिन्न उप-वितरकों की ₹409 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की थी।
- ईडी ने तब कहा था कि लॉटरी टिकटों की बिक्री की आय को अवैध रूप से उपहार और इन्सेंटिव देने में इस्तेमाल किया जा रहा है। दावा किया गया था कि कंपनी ने 2014 और 2017 के बीच अवैध रूप से लगभग 400 करोड़ रुपये का दावा किया है।
- 9 मार्च 2024 को, ED ने तमिलनाडु में कथित अवैध रेत खनन की जांच से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की पड़ताल के हिस्से के रूप में तमिलनाडु में 'लॉटरी किंग' सैंटियागो मार्टिन के दामाद आधार अर्जुन के परिसर में तलाशी ली थी।
- ईडी ने सैंटियागो मार्टिन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक अन्य मामले की जांच की है, जो सिक्किम सरकार की लॉटरी की बिक्री से संबंधित कथित अपराधों के लिए उनके और अन्य के खिलाफ सीबीआई के मामले से उपजा है।
- पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी के एक निदेशक मार्टिन सेंटियागो देश की 114 अलग-अलग कंपनियों में निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वे 30 दिसंबर 1991 से कंपनी के निदेशक हैं। उनका डीआईएन नंबर 00029458 है।
- फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के दूसरे निदेशक मनिक्का गौडर शिवप्रकाश भी देश की करीब 22 अलग-अलग कंपनियों में निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वे 22 अगस्त, 2022 से कंपनी के निदेशक हैं। उनका डीआईएन नंबर 08109321 है। कंपनी अपने दोनों निदेशकों के माध्यम से देश की 118 कंपनियों से जुड़ी हुई है।
- फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड 30 दिसंबर, 1991 को रजिस्टर्ड एक गैर सूचीबद्ध निजी कंपनी है।
- यह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है और यह तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित है। इसकी अधिकृत शेयर पूंजी 50.00 करोड़ रुपये है और कुल चुकता पूंजी (पेड अप कैपिटल) 10.07 करोड़ रुपये है।
- 31 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज़ का परिचालन राजस्व 500 करोड़ से अधिक था। इस दौरान कंपनी के EBITDA में उससे पिछले वर्ष की तुलना में 1.92% की कमी आई थी। हालांकि, कंपनी का बुक नेटवर्थ उस दौरान 3.38 फीसदी बढ़ा था। यह कंपनी लॉटरी वितरक के रूप में काम करती है।
Wednesday, March 13, 2024
BREAKING NEWS:भाजपा की दूसरी सूची में हरिद्वार-गढ़वाल सीट पर प्रत्याशी घोषित, इन पर लगाया दांव
लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी है। केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड में आज हरिद्वार और गढ़वाल सीट पर बने सस्पेंस को दूर करते हुए प्रत्याशियों की घोषणा कर फिर चौंका दिया। कहा जा रहा था कि इन दो सीटों पर पार्टी प्रयोग कर सकती है। ऐसा हुआ भी, भाजपा ने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का पत्ता काटकर पौड़ी गढ़वाल सीट पर पूर्व सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी और हरिद्वार से पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पर दांव लगाया है। अनिल बलूनी पीएम मोदी के भी करीबी माने जाते हैं। वहीं, अभी तक गढ़वाल सीट से पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत और हरिद्वार से पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक सांसद हैं।
बता दें कि पहली सूची में भाजपा ने टिहरी गढ़वाल, नैनीताल और अल्मोड़ा लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किए थे। इन तीनों ही सीटों पर प्रत्याशी रिपीट किए गए थे। टिहरी गढ़वाल सीट से माला राज्यलक्ष्मी शाह, नैनीताल सीट से अजय भट्ट और अल्मोड़ा सीट से अजय टम्टा को उम्मीदवार बनाया गया है।
बता दें कि, उत्तराखंड में पांच लोकसभा सीट हैं। भाजपा इस बार पांचों सीटों में जीतकर हैट्रिक बनाना चाहती है। वहीं, कांग्रेस ने अभी केवल तीन ही सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जताया पीएम का आभार
वहीं, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरिद्वार से लोकसभा का प्रत्याशी घोषित होने पर पार्टी अध्यक्ष, गृहमंत्री शाह और पीएम मोदी का अभार जताया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि मां गंगा के द्वार हरिद्वार से मेरा आत्मीय नाता रहा है। इसी लोकसभा के डोईवाला विधानसभा की जनता ने मुझे विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचाया। उनका प्यार सदा मेरे साथ रहा है और मैंने भी उनके भरोसे को कभी भी टूटने नहीं दिया और पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ वर्षों तक एक जनसेवक की भांति अपने कर्तव्यों का पालन किया, ताकि कभी भी मेरे कारण उन्हें सिर न झुकाना पड़े।
संघ के प्रचारक से सीएम की कुर्सी तक ऐसे पहुंचे थे त्रिवेंद्र सिंह रावत
2002 में उन्होंने डोईवाला विधानसभा से चुनाव लड़ा। उन्होंने विधानसभा चुनाव में डोईवाला सीट से जीत हासिल की थी। 2007 में डोईवाला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से उत्तराखंड विधान सभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में वे विजयी हुए। भारतीय जनता पार्टी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने। 2017 में डोईवाला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से उत्तराखंड विधान सभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए। इसके बाद 17 मार्च 2017 को उन्हें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई थी। इसके बाद मार्च 2021 में उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था।
अनिल बलूनी प्रोफाइल
कॅरियर - बतौर पत्रकार शुरूआत, बाद में राजनीति में प्रवेश
चुनाव - 2002 के विधानसभा चुनाव में कोटद्वार सीट से भागीदारी, राज्यसभा
से सांसद रहे
सरकारी दायित्व - निशंक सरकार में वन्य एवं पर्यावरण सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष
दायित्व- - भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया विभाग के प्रमुख
Tuesday, March 12, 2024
New Teacher Course 2024 : अब आपको टीचर बनने के लिए यह नया कोर्स करना होगा
- हर साल एक एंट्रेंस एग्जाम करवाया जाएगा।
- एग्जाम में पास होने पर कॉलेज में आपको आलोट किया जाएगा।
- 4 वर्ष तक कॉलेज में कोर्स करना होगा।
- कोर्स पूरा करने के बाद प्रमाण पत्र मिलेगा।
- शिक्षक भर्ती में शामिल हो सकेंगे।
- यह कोर्स 2030 के बाद ही मान्य होगा।
- नई शिक्षा नीति के बाद B.Ed कोर्स समाप्त हो जाएगा।
- उसकी जगह आई टी आई पी नया कोर्स लागू किया जाएगा।
- आवेदन के लिए एग्जाम में भाग लेना होगा।
- कोर्स पूरा करने के बाद शिक्षक भर्ती में शामिल हो सकेंगे।
Monday, March 11, 2024
Uttarakhand Cabinet: 3,253 पदों पर शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ, प्राथमिक शिक्षकों के लिए बीएड जरूरी नहीं
Saturday, March 9, 2024
7th Pay Commission: 50% तो हो गया, अब शून्य (0) होगा DA! जानें केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कब बदलेगा कैलकुलेशन
Central government employees news: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (dearness allowance) का इंतजार तो खत्म हो गया. गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट ने महंगाई भत्ते में 4 फीसदी के इजाफे (DA Hike) को मंजूरी दे दी. नतीजा ये रहा है कि अब केंद्रीय कर्मचारियों (Central government employees) का महंगाई भत्ता 50 फीसदी हो गया है. लेकिन, अब सवाल ये उठ रहा है कि 50 फीसदी महंगाई भत्ता पहुंचने पर इसे शून्य किया जाना है. लेकिन, ये कब होगा और किस तरह इसका मर्जर होगा और कब सरकार इसका ऐलान करेगी या नोटिफिकेशन जारी करेगी.
शून्य के आगे से ही शुरू होगी गणना
साल 2024 में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) का गणित बदलने जा रहा है. दरअसल, 1 जनवरी से लागू होने वाले महंगाई भत्ते की तस्वीर साफ हो गई है. कर्मचारियों को 50 फीसदी DA मिलना है. जनवरी 2024 से केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता 50 फीसदी मिलेगा. नियम ये कहता है कि 50 फीसदी महंगाई भत्ता होने के बाद इसे बेसिक सैलरी में मर्ज करके शून्य से इसकी गणना शुरू होगी. लेकिन, सरकार अभी तक इस पर कोई सफाई नहीं दी. मतलब अभी महंगाई भत्ते की कैलकुलेशन 50 फीसदी से आगे ही चलेगी. लेकिन, शून्य कब किया जाएगा?
कब से बदलेगा महंगाई भत्ते का गणित?
सरकार ने साल 2016 में 7वां वेतन आयोग लागू करते वक्त महंगाई भत्ते को शून्य कर दिया था. नियमों के मुताबिक, महंगाई भत्ता जैसे ही 50 फीसदी तक पहुंचेगा, इसे शून्य कर दिया जाएगा और 50 फीसदी के अनुसार जो पैसा भत्ते के रूप में कर्मचारियों को मिल रहा होगा, उसे बेसिक सैलरी यानि न्यूनतम सैलरी में जोड़ (da merger basic salary) दिया जाएगा. मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18000 रुपए है तो उसे 50 फीसदी DA का 9000 रुपए मिलेगा. लेकिन, 50 फीसदी DA होने पर इसे बेसिक सैलरी में जोड़कर फिर से महंगाई भत्ता शून्य कर दिया जाएगा. मतलब बेसिक सैलरी का रिविजन होकर 27,000 रुपए हो जाएगी. हालांकि, इसके लिए सरकार को फिटमेंट में भी बदलाव करना पड़ सकता है.
क्यों शून्य किया जाएगा महंगाई भत्ता?
जब भी नया वेतनमान लागू किया जाता है कर्मचारियों को मिलने वाले DA को मूल वेतन में जोड़ दिया जाता है. जानकारों का कहना है कि यूं तो नियम कर्मचारियों को मिलने वाले शत-प्रतिशत डीए को मूल वेतन में जोड़ना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता. वित्तीय स्थिति आड़े आती है. हालांकि, साल 2016 में ऐसा किया गया. उससे पहले साल 2006 में जब छठा वेतनमान आया तो उस समय पांचवें वेतनमान में दिसंबर तक 187 प्रतिशत DA मिल रहा था. पूरा डीए मूल वेतन में मर्ज दिया गया था. इसलिए छठे वेतनमान का गुणांक 1.87 था. तब नया वेतन बैंड और नया ग्रेड वेतन भी बनाया गया था. लेकिन, इसे देने में तीन साल लग थे.
अब कब शून्य होगा महंगाई भत्ता?
एक्सपर्ट्स की मानें तो जुलाई में नया महंगाई भत्ता कैलकुलेट होगा. क्योंकि, सरकार साल में दो बार ही महंगाई भत्ता बढ़ाती है. जनवरी के लिए मार्च में मंजूरी दे दी गई है. अब अगला रिविजन जुलाई 2024 से लागू होना है. ऐसे में महंगाई भत्ते को तभी मर्ज किया जाएगा और शून्य से इसकी कैलकुलेशन होगी. मतलब जनवरी से जून 2024 के AICPI इंडेक्स से तय होगा कि महंगाई भत्ता 3 फीसदी, 4 फीसदी या उससे ज्यादा होगा. ये स्थिति साफ होते ही कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 50 फीसदी महंगाई भत्ते को जोड़ दिया जाएगा.
सरकार पर बढ़ता है वित्तीय बोझ
साल 2006 में छठे वेतन आयोग के समय नए वेतनमान को 1 जनवरी 2006 से लागू किया गया था, लेकिन इसकी अधिसूचना 24 मार्च 2009 को जारी की गई थी. इस देरी की वजह से सरकार को 39 से 42 महीने का डीए एरियर (DA Arrear) 3 किस्तों में 3 वित्तीय वर्षों 2008-09, 2009-10 एवं 2010-11 में भुगतान किया गया था. नया पे स्केल भी बनाया गया था. पांचवें वेतनमान में 8000-13500 वाले वेतनमान में 8000 पर 186 प्रतिशत DA 14500 रुपए होता था. इस लिए दोनों को जोड़ने पर कुल वेतन 22 हजार 880 हुआ. छठे वेतनमान में इसका समकक्ष वेतनमान 15600 -39100 प्लस 5400 ग्रेड पे निर्धारित किया गया. छठे वेतनमान में यह वेतन 15600-5400 प्लस 21000 और उस पर एक जनवरी 2009 को 16 प्रतिशत डीए 2226 जोड़ने पर कुल वेतन 23 हजार 226 रुपए तय किया गया. चौथे वेतन आयोग की सिफारिशें 1986, पांचवें की 1996, छठे की 2006 में लागू हुईं. सातवें कमीशन की सिफारिशें जनवरी 2016 में लागू हुई.
Thursday, March 7, 2024
DA: केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार का तोहफा! महंगाई भत्ते में 4 फीसदी की बढ़ोतरी; HRA भी ज्यादा मिलेगा
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। Modi Sarkar ने केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। दरअसल, केंद्र की ओर से इस साल एक जनवरी से महंगाई भत्ता (DA) को मौजूदा 46 प्रतिशत से बढ़ाकर मूल वेतन का 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लाभ होगा। आइए, पूरी खबर के बारे में जान लेते हैं।
केंद्रीय कर्मचारियों की चांदी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 जनवरी, 2024 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों को महंगाई राहत (DR) की एक अतिरिक्त किस्त जारी करने की मंजूरी दे दी है, जो मौजूदा 46 प्रतिशत की दर से 4 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि मूल वेतन/पेंशन, मूल्य वृद्धि की भरपाई के लिए है।
DA, HRA बढ़ने के साथ मिलेंगे ये अतिरिक्त लाभ
डीए में बढ़ोतरी के साथ परिवहन भत्ता, कैंटीन भत्ता और प्रतिनियुक्ति भत्ता समेत अन्य भत्ते में 25 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। मकान किराया भत्ता मूल वेतन के 27 प्रतिशत, 19 प्रतिशत और 9 प्रतिशत से बढ़ाकर क्रमश: 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत कर दिया गया है। ग्रेच्युटी के तहत लाभ में मौजूदा 20 लाख रुपये से 25 लाख रुपये की बढ़ोतरी के साथ 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
सरकार उठाएगी इतना खर्च
महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दोनों के कारण सरकारी खजाने पर संयुक्त प्रभाव 12,869 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगा। वर्ष 2024-25 (जनवरी 2024 से फरवरी 2025) के दौरान 15,014 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा। विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर सालाना 9,400 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
लाखों कर्मचारियों को होगा लाभ
स्वीकृत फॉर्मूले के अनुसार डीए और डीआर में वृद्धि 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। इस फैसले से केंद्र सरकार के 49.18 लाख कर्मचारियों के अलावा 67.95 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होने की संभावना है, क्योंकि महंगाई राहत (DR) में भी उसी दर से बढ़ोतरी की गई है।
Tuesday, March 5, 2024
Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के गठन पर क्या केंद्र मानेगा ये सुझाव, किसने की स्थायी मशीनरी बनाने की सिफारिश?
देश में आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर कर्मियों की तरफ से केंद्र सरकार के पास कई तरह के सुझाव आ रहे हैं। अभी तक केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग का गठन करने की घोषणा नहीं की है। केंद्र सरकार यह भी कह चुकी है कि अभी ये प्रस्ताव उसके पास विचाराधीन नहीं है। दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन, लगातार वेतन आयोग के गठन का दबाव डाल रहे हैं। सरकार को ज्ञापन दिए जा रहे हैं। आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इन सबके बीच इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन 'आईआरटीएसए' ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पूर्व वेतन आयोगों द्वारा की गई सिफारिशों का हवाला देते हुए कुछ सुझाव दिए हैं। इनमें कहा गया है कि तीसरे, चौथे और पांचवें सेंट्रल पे कमीशन 'सीपीसी' ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए स्थायी मशीनरी गठित करने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार को सीपीसी गठित करने के लिए दस वर्ष का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में अब केंद्र सरकार को बिना किसी देरी के आठवें वेतन आयोग का गठन करना चाहिए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा है पत्र
आईआरटीएसए ने पिछले दिनों यह पत्र, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि मौजूदा समय में केंद्रीय वेतन आयोगों का गठन दस साल के नियमित अंतराल पर किया जा रहा है। इसमें माध्यम से सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं/लाभों सहित परिलब्धियों की संरचना को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों के संबंध में जांच, समीक्षा, विकास व बदलावों की सिफारिश की जा सकती है। इसे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के संबंध में विभिन्न विभागों, एजेंसियों और सेवाओं की विशेष आवश्यकताओं के रूप में देखा जाता है। तीसरे, चौथे और पांचवें सीपीसी ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए स्थायी मशीनरी गठित करने की सिफारिश की थी। 6वीं सीपीसी ने पहली जनवरी 2006 से अपनी सिफारिशें लागू करने के लिए कहा था। इसके लिए 5वें सीपीसी के कार्यान्वयन के बाद से दस वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है।
लंबी अवधि की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं
आईआरटीएसए के अनुसार, सातवें वेतन आयोग ने कहा है कि सीपीसी के गठन के लिए दस साल की लंबी अवधि की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। इस अवधि के पूरा होने से पहले भी वेतन आयोग के गठन पर समीक्षा की जा सकती है। 7वीं सीपीसी की सिफारिशों के अनुसार, गत दस वर्षों में सरकारी कामकाज, प्रदर्शन और भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार, सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, विभिन्न कर संग्रह की मात्रा, सरकारी विभागों की भूमिका, मुद्रास्फीति पैटर्न, मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक वेतन में कमी और सेवा की स्थिति, आदि में कई बदलाव हुए हैं। सार्वजनिक उपयोगिताओं में निजी क्षेत्रों की भूमिका और उन पर सरकार का विनियमन, प्रत्येक विभाग में कर्मचारियों की संख्या, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत कवर किए गए कर्मचारियों की संख्या, गरीबी में उल्लेखनीय कमी, कर्मचारियों और आम जनता के उपभोग पैटर्न में बदलाव, आदि भी देखे गए हैं।
पर्याप्त समय दिया जाना आवश्यक
वेतन स्तर, वेतन वृद्धि, वेतन निर्धारण, पदोन्नति, एमएसीपीएस और सेवानिवृत्ति लाभ आदि में विसंगतियों के संबंध में देश भर में विभिन्न अदालतों में कई कानूनी मामले लंबित हैं। इससे अदालतों का कीमती समय बर्बाद होता है। सरकारी कामकाज की दक्षता प्रभावित होती है। सार्वजनिक सेवाओं में दक्षता, इसके साथ किसी भी तरह से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सार्वजनिक सेवा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार और प्रशासनिक सुधार की गुंजाइश होनी चाहिए। कर्मचारियों के विभिन्न समूहों के बीच वेतन में असमानताओं/विसंगतियों को दूर करने और ऊपर बताए गए कारणों के लिए नए वेतन आयोग का गठन करने की आवश्यकता है। आईआरटीएसए के मुताबिक, वेतन आयोग को वेतन एवं भत्ते, कार्य परिस्थितियों, पदोन्नति के अवसर, पदों के वर्गीकरण आदि से संबंधित सभी सिद्धांतों का अध्ययन करने और कर्मचारी पक्ष सहित प्रत्येक हितधारक के विचारों को सुनने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
तुरंत 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हो
ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि तुरंत 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया जाए, ताकि उसे सभी मौजूदा विसंगतियों को दूर करने और भविष्य की विसंगतियों के सुधार को ध्यान में रखकर व्यापक सिफारिशें देने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। तीसरे सीपीसी ने वेतन और कैडर प्रबंधन पर एक स्थायी निकाय के निर्माण की सिफारिश की थी। इस आयोग की सिफारिशों में कहा गया कि हमारे अनुभव ने हमें आश्वस्त किया है कि वेतन आयोग की सिफारिशों पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की वेतन संरचना और सेवा शर्तों को समय-समय पर संशोधित करने की प्रणाली बहुत संतोषजनक नहीं है। हमारा मानना है कि इन मामलों में व्यापक निर्णय भी प्रासंगिक डाटा के विश्लेषण पर आधारित होने चाहिए। यह तब संभव नहीं है जब वेतन आयोग को एक सीमित अवधि के भीतर इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के लिए वेतनमान और सेवा शर्तों पर सिफारिशें करनी पड़े। ऐसे में हम वेतन और कैडर प्रबंधन पर एक स्थायी निकाय के निर्माण का सुझाव देंगे।
एक स्थायी मशीनरी की आवश्यता पर बल
चतुर्थ सीपीसी ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए एक स्थायी मशीनरी बनाने की सिफारिश की है। सिफारिशों में कहा गया है कि अगर हम ऐसा कहने का साहस कर सकें तो वेतन आयोग का काम श्रमसाध्य है और इसमें समय लगता है। इसके अलावा वेतन आयोग लगभग 10 वर्षों के अंतराल पर आता है। इस बीच वेतन निर्धारण प्रणाली और पदोन्नति नीतियों आदि के संबंध में बहुत सारे परिवर्तन होते हैं। क्षतिपूर्ति भत्ते और अन्य समान भुगतानों के मामले में ऐसे परिवर्तन काफी तेजी से होते हैं। एक भत्ता जिसे आज पर्याप्त माना जाता है, तो वह उस स्थिति में उचित नहीं हो सकता, जब उसमें शीघ्रता से परिवर्तन होते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए एक स्थायी मशीनरी होनी चाहिए। इससे सरकार प्रभावी, व्यवस्थित और समन्वित तरीके से अपनी वेतन नीति के कार्यान्वयन की निगरानी करने में भी सक्षम होगी। हमारा सुझाव है कि सरकार एक ऐसी संस्था स्थापित कर सकती है, जो सरकार के वेतन और भत्तों पर बुनियादी डाटा को बनाए रखने एवं अद्यतन करने के लिए जिम्मेदार होनी चाहिए। उस पर कर्मचारियों के वेतनमान और भत्तों की दरों व अन्य संबंधित मामलों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी हो।
पांचवें सीपीसी ने दी थी ये सिफारिशें
5वें सीपीसी ने संवैधानिक प्रावधान के साथ स्थायी वेतन आयोग द्वारा वार्षिक वेतन संशोधन की सिफारिश की है। मुक्त बाजार उदारीकृत अर्थव्यवस्था में वेतन के लिए निरंतर मशीनरी की सख्त आवश्यकता है। सिफारिशों के सारांश के पैरा 99 के अनुसार, वेतन संशोधन के लिए निरंतर मशीनरी की आवश्यकता है। आयोग ने सिफारिश की है कि वेतन संशोधन, भविष्य में, एक संवैधानिक प्रावधान से अपना अधिकार प्राप्त करते हुए एक स्थायी वेतन आयोग को सौंपा जाना चाहिए। इसकी सिफारिशों में एक बाध्यकारी चरित्र होना चाहिए। अन्य देशों की तरह वेतन में सालाना संशोधन किया जाना चाहिए। एक विकल्प के रूप में, यह सुझाव दिया गया है कि हर बार जीवनयापन की लागत आधार स्तर से 50 फीसदी बढ़ने पर महंगाई भत्ते को महंगाई वेतन में परिवर्तित किया जाना चाहिए। इसका अर्थ यह होगा कि हर 4 से 5 साल में वेतन में संशोधन किया जाएगा। अंतिम विकल्प, वर्तमान की तरह एक दशकीय अभ्यास करना है, लेकिन निश्चित तिथियों के साथ। आयोग ने सुझाव दिया है कि अगले वेतन आयोग के गठन की तारीख 01.01.2003 से बाद की नहीं होनी चाहिए। इसकी सिफारिशों के कार्यान्वयन की तारीख 01.01.2006 होनी चाहिए, भले ही इसकी रिपोर्ट कब प्रस्तुत की जाए।
छठे एवं सातवें सीपीसी ने दी हैं ये सिफारिशें
छठे सीपीसी ने दो वेतन आयोगों के बीच 10 वर्ष के नियमित अंतराल के सिद्धांत को स्वीकार किया है। पांचवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित वेतनमान 1/1/1996 से लागू किये गए। पांचवें सीपीसी ने यह भी सिफारिश की थी कि छठे केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा सिफारिशों के कार्यान्वयन की तारीख 1/1/2006 पूर्व निर्धारित की जानी चाहिए। 7वें सीपीसी ने 10 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा किए बिना वेतन मैट्रिक्स की आवधिक समीक्षा की सिफारिश की है। यह भी सिफारिश की जाती है कि मैट्रिक्स की दस साल की लंबी अवधि की प्रतीक्षा किए बिना समय-समय पर समीक्षा की जा सकती है। इसकी समीक्षा और संशोधन एक्रोयड फॉर्मूले के आधार पर किया जा सकता है, जो आम आदमी की टोकरी बनाने वाली वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को ध्यान में रखता है। शिमला में स्थित श्रम ब्यूरो द्वारा समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है। यह सुझाव दिया गया है कि इसे किसी अन्य वेतन आयोग की प्रतीक्षा किए बिना समय-समय पर उस मैट्रिक्स के संशोधन का आधार बनाया जाना चाहिए।
Friday, March 1, 2024
Uttarakhand: प्रदेश को मिले 35 सहायक समाज कल्याण अधिकारी और तीन छात्रावास अधीक्षक, सीएम ने दिए नियुक्तिपत्र
उत्तराखंड को 35 सहायक समाज कल्याण अधिकारी और तीन छात्रावास अधीक्षक मिल गए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से चयनित सभी अधिकारियों को नियुक्तिपत्र दिए।
सीएम ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा निरंतर सरकारी रिक्त पड़े पदों पर भर्तियां करवाई जा रही हैं। कड़ी मेहनत, परिश्रम करने वाले आज सभी मेहनती यवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त अधिकारियों से जीवन में हमेशा अनुशासन रखे जाने की बात कही। उन्होंने कहां कि स्वयं में अनुशासन रखकर हम आमजन को सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं से आच्छादित करवा सकते हैं। अपनी सेवाओं के दौरान अच्छे काम करके दिखाना है ताकि हम अपनी सेवाओं से अंत्योदय के सिद्धांत को पूर्ण कर सकें।
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