Tuesday, March 5, 2024

Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के गठन पर क्या केंद्र मानेगा ये सुझाव, किसने की स्थायी मशीनरी बनाने की सिफारिश?


 

देश में आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर कर्मियों की तरफ से केंद्र सरकार के पास कई तरह के सुझाव आ रहे हैं। अभी तक केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग का गठन करने की घोषणा नहीं की है। केंद्र सरकार यह भी कह चुकी है कि अभी ये प्रस्ताव उसके पास विचाराधीन नहीं है। दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन, लगातार वेतन आयोग के गठन का दबाव डाल रहे हैं। सरकार को ज्ञापन दिए जा रहे हैं। आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इन सबके बीच इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन 'आईआरटीएसए' ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पूर्व वेतन आयोगों द्वारा की गई सिफारिशों का हवाला देते हुए कुछ सुझाव दिए हैं। इनमें कहा गया है कि तीसरे, चौथे और पांचवें सेंट्रल पे कमीशन 'सीपीसी' ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए स्थायी मशीनरी गठित करने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार को सीपीसी गठित करने के लिए दस वर्ष का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में अब केंद्र सरकार को बिना किसी देरी के आठवें वेतन आयोग का गठन करना चाहिए।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा है पत्र

आईआरटीएसए ने पिछले दिनों यह पत्र, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि मौजूदा समय में केंद्रीय वेतन आयोगों का गठन दस साल के नियमित अंतराल पर किया जा रहा है। इसमें माध्यम से सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं/लाभों सहित परिलब्धियों की संरचना को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों के संबंध में जांच, समीक्षा, विकास व बदलावों की सिफारिश की जा सकती है। इसे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के संबंध में विभिन्न विभागों, एजेंसियों और सेवाओं की विशेष आवश्यकताओं के रूप में देखा जाता है। तीसरे, चौथे और पांचवें सीपीसी ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए स्थायी मशीनरी गठित करने की सिफारिश की थी। 6वीं सीपीसी ने पहली जनवरी 2006 से अपनी सिफारिशें लागू करने के लिए कहा था। इसके लिए 5वें सीपीसी के कार्यान्वयन के बाद से दस वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है।

लंबी अवधि की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं

आईआरटीएसए के अनुसार, सातवें वेतन आयोग ने कहा है कि सीपीसी के गठन के लिए दस साल की लंबी अवधि की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। इस अवधि के पूरा होने से पहले भी वेतन आयोग के गठन पर समीक्षा की जा सकती है। 7वीं सीपीसी की सिफारिशों के अनुसार, गत दस वर्षों में सरकारी कामकाज, प्रदर्शन और भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार, सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, विभिन्न कर संग्रह की मात्रा, सरकारी विभागों की भूमिका, मुद्रास्फीति पैटर्न, मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक वेतन में कमी और सेवा की स्थिति, आदि में कई बदलाव हुए हैं। सार्वजनिक उपयोगिताओं में निजी क्षेत्रों की भूमिका और उन पर सरकार का विनियमन, प्रत्येक विभाग में कर्मचारियों की संख्या, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत कवर किए गए कर्मचारियों की संख्या, गरीबी में उल्लेखनीय कमी, कर्मचारियों और आम जनता के उपभोग पैटर्न में बदलाव, आदि भी देखे गए हैं।

पर्याप्त समय दिया जाना आवश्यक

वेतन स्तर, वेतन वृद्धि, वेतन निर्धारण, पदोन्नति, एमएसीपीएस और सेवानिवृत्ति लाभ आदि में विसंगतियों के संबंध में देश भर में विभिन्न अदालतों में कई कानूनी मामले लंबित हैं। इससे अदालतों का कीमती समय बर्बाद होता है। सरकारी कामकाज की दक्षता प्रभावित होती है। सार्वजनिक सेवाओं में दक्षता, इसके साथ किसी भी तरह से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सार्वजनिक सेवा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार और प्रशासनिक सुधार की गुंजाइश होनी चाहिए। कर्मचारियों के विभिन्न समूहों के बीच वेतन में असमानताओं/विसंगतियों को दूर करने और ऊपर बताए गए कारणों के लिए नए वेतन आयोग का गठन करने की आवश्यकता है। आईआरटीएसए के मुताबिक, वेतन आयोग को वेतन एवं भत्ते, कार्य परिस्थितियों, पदोन्नति के अवसर, पदों के वर्गीकरण आदि से संबंधित सभी सिद्धांतों का अध्ययन करने और कर्मचारी पक्ष सहित प्रत्येक हितधारक के विचारों को सुनने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

तुरंत 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हो

ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि तुरंत 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया जाए, ताकि उसे सभी मौजूदा विसंगतियों को दूर करने और भविष्य की विसंगतियों के सुधार को ध्यान में रखकर व्यापक सिफारिशें देने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। तीसरे सीपीसी ने वेतन और कैडर प्रबंधन पर एक स्थायी निकाय के निर्माण की सिफारिश की थी। इस आयोग की सिफारिशों में कहा गया कि हमारे अनुभव ने हमें आश्वस्त किया है कि वेतन आयोग की सिफारिशों पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की वेतन संरचना और सेवा शर्तों को समय-समय पर संशोधित करने की प्रणाली बहुत संतोषजनक नहीं है। हमारा मानना है कि इन मामलों में व्यापक निर्णय भी प्रासंगिक डाटा के विश्लेषण पर आधारित होने चाहिए। यह तब संभव नहीं है जब वेतन आयोग को एक सीमित अवधि के भीतर इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के लिए वेतनमान और सेवा शर्तों पर सिफारिशें करनी पड़े। ऐसे में हम वेतन और कैडर प्रबंधन पर एक स्थायी निकाय के निर्माण का सुझाव देंगे।

एक स्थायी मशीनरी की आवश्यता पर बल

चतुर्थ सीपीसी ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए एक स्थायी मशीनरी बनाने की सिफारिश की है। सिफारिशों में कहा गया है कि अगर हम ऐसा कहने का साहस कर सकें तो वेतन आयोग का काम श्रमसाध्य है और इसमें समय लगता है। इसके अलावा वेतन आयोग लगभग 10 वर्षों के अंतराल पर आता है। इस बीच वेतन निर्धारण प्रणाली और पदोन्नति नीतियों आदि के संबंध में बहुत सारे परिवर्तन होते हैं। क्षतिपूर्ति भत्ते और अन्य समान भुगतानों के मामले में ऐसे परिवर्तन काफी तेजी से होते हैं। एक भत्ता जिसे आज पर्याप्त माना जाता है, तो वह उस स्थिति में उचित नहीं हो सकता, जब उसमें शीघ्रता से परिवर्तन होते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए एक स्थायी मशीनरी होनी चाहिए। इससे सरकार प्रभावी, व्यवस्थित और समन्वित तरीके से अपनी वेतन नीति के कार्यान्वयन की निगरानी करने में भी सक्षम होगी। हमारा सुझाव है कि सरकार एक ऐसी संस्था स्थापित कर सकती है, जो सरकार के वेतन और भत्तों पर बुनियादी डाटा को बनाए रखने एवं अद्यतन करने के लिए जिम्मेदार होनी चाहिए। उस पर कर्मचारियों के वेतनमान और भत्तों की दरों व अन्य संबंधित मामलों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी हो।

पांचवें सीपीसी ने दी थी ये सिफारिशें

5वें सीपीसी ने संवैधानिक प्रावधान के साथ स्थायी वेतन आयोग द्वारा वार्षिक वेतन संशोधन की सिफारिश की है। मुक्त बाजार उदारीकृत अर्थव्यवस्था में वेतन के लिए निरंतर मशीनरी की सख्त आवश्यकता है। सिफारिशों के सारांश के पैरा 99 के अनुसार, वेतन संशोधन के लिए निरंतर मशीनरी की आवश्यकता है। आयोग ने सिफारिश की है कि वेतन संशोधन, भविष्य में, एक संवैधानिक प्रावधान से अपना अधिकार प्राप्त करते हुए एक स्थायी वेतन आयोग को सौंपा जाना चाहिए। इसकी सिफारिशों में एक बाध्यकारी चरित्र होना चाहिए। अन्य देशों की तरह वेतन में सालाना संशोधन किया जाना चाहिए। एक विकल्प के रूप में, यह सुझाव दिया गया है कि हर बार जीवनयापन की लागत आधार स्तर से 50 फीसदी बढ़ने पर महंगाई भत्ते को महंगाई वेतन में परिवर्तित किया जाना चाहिए। इसका अर्थ यह होगा कि हर 4 से 5 साल में वेतन में संशोधन किया जाएगा। अंतिम विकल्प, वर्तमान की तरह एक दशकीय अभ्यास करना है, लेकिन निश्चित तिथियों के साथ। आयोग ने सुझाव दिया है कि अगले वेतन आयोग के गठन की तारीख 01.01.2003 से बाद की नहीं होनी चाहिए। इसकी सिफारिशों के कार्यान्वयन की तारीख 01.01.2006 होनी चाहिए, भले ही इसकी रिपोर्ट कब प्रस्तुत की जाए।

छठे एवं सातवें सीपीसी ने दी हैं ये सिफारिशें

छठे सीपीसी ने दो वेतन आयोगों के बीच 10 वर्ष के नियमित अंतराल के सिद्धांत को स्वीकार किया है। पांचवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित वेतनमान 1/1/1996 से लागू किये गए। पांचवें सीपीसी ने यह भी सिफारिश की थी कि छठे केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा सिफारिशों के कार्यान्वयन की तारीख 1/1/2006 पूर्व निर्धारित की जानी चाहिए। 7वें सीपीसी ने 10 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा किए बिना वेतन मैट्रिक्स की आवधिक समीक्षा की सिफारिश की है। यह भी सिफारिश की जाती है कि मैट्रिक्स की दस साल की लंबी अवधि की प्रतीक्षा किए बिना समय-समय पर समीक्षा की जा सकती है। इसकी समीक्षा और संशोधन एक्रोयड फॉर्मूले के आधार पर किया जा सकता है, जो आम आदमी की टोकरी बनाने वाली वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को ध्यान में रखता है। शिमला में स्थित श्रम ब्यूरो द्वारा समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है। यह सुझाव दिया गया है कि इसे किसी अन्य वेतन आयोग की प्रतीक्षा किए बिना समय-समय पर उस मैट्रिक्स के संशोधन का आधार बनाया जाना चाहिए।

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