Saturday, August 24, 2024

नई पेंशन स्कीम UPS पर फूटा कर्मचारी संगठनों का गुस्सा, बोले ये मंजूर नहीं, OPS के लिए होगा आंदोलन


 केंद्र सरकार ने शनिवार को नई पेंशन व्यवस्था लागू करने की बात कही है। इस स्कीम को नाम भी नया दे दिया गया है। मतलब, यह नाम ओपीएस और एनपीएस से जुदा है। नई स्कीम का नाम यूनिफाइड पेंशन स्कीम 'यूपीएस' रखा गया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस स्कीम को मंजूरी भी दे दी है। इस स्कीम में 25 साल काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को पूरी पेंशन मिलेगी। यानी किसी कर्मचारी ने न्यूनतम 25 साल तक नौकरी की है तो उसे रिटायरमेंट के तुरंत पहले के अंतिम 12 महीने के औसत वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलेगा। यूनिफाइड पेंशन स्कीम में 10 साल की नौकरी करने के बाद कर्मचारी को कम से कम 10 हजार रुपये पेंशन के तौर पर मिलेंगे। दूसरी तरफ केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने नई पेंशन स्कीम 'यूपीएस' पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा, ये सरकार ने कर्मचारी वर्ग के साथ छल किया है। किसी भी सूरत में यूपीएस मंजूर नहीं होगा। वे गारंटीकृत 'पुरानी पेंशन बहाली' के लिए दोबारा से हल्लाबोल की तैयारी में जुट गए हैं। केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्यों के कर्मचारी संगठन, जो ओपीएस के लिए आंदोलन कर रहे थे, वे जल्द ही अपनी आगामी रणनीति का खुलासा करेंगे।

लंबे समय तक पुरानी पेंशन बहाली के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाने वाले 'नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत' के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल, कहते हैं कि सरकार ने यूपीएस लाकर कर्मचारियों के साथ छल किया है। यूपीएस में सरकार ने अपने कंट्रीब्यूशन, जो अभी तक 14 प्रतिशत था, उसे बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत कर दिया है। यहां तो सब ठीक है। यह बात काबिले तारीफ भी है, लेकिन हमारी मांग रिटायरमेंट पर 50 प्रतिशत बेसिक सेलरी और डीए अलाउंस के बराबर की थी, न कि कंट्रीब्यूशन घटाने या उसे बढ़ाने की।

 
बतौर डॉ. मंजीत पटेल, कर्मचारियों की दूसरी डिमांड यह रही है कि हमारा पैसा, रिटायरमेंट पर बिल्कुल जीपीएफ की तरह ही हमें वापस कर दिया जाए। सरकार, नई व्यवस्था 'यूपीएस' में वह सारा पैसा ले लेगी। यानी कर्मचारियों का 10 प्रतिशत भी और खुद का 18.5 परसेंट भी। पटेल कहते हैं, हमें अपने वाले कंट्रीब्यूशन में से केवल आखिरी के 6 महीना की सैलरी जितनी बनेगी, सरकार उतना हमें वापस कर देगी। ऐसी स्थिति में तो यूपीएस की बजाए, एनपीएस ज्यादा बढ़िया होगा। हमारा आंदोलन ओपीएस के लिए था, सरकार ने पुरानी पेंशन जैसा कोई भी प्रावधान यूपीएस में शामिल नहीं किया है, इसलिए कर्मचारी अपना आंदोलन जारी रखेंगे। 


केंद्रीय कर्मियों के एक बड़े संगठन 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने कहा, हमारा स्टैंड क्लीयर है। सरकारी कर्मचारियों को ओपीएस ही चाहिए। यूपीएस, किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार की इस नई स्कीम को लेकर कॉन्फेडरेशन, जल्द ही बैठक करेगा। उसमें आगामी रणनीति की घोषणा की जाएगी। ये क्लीयर है कि कर्मचारियों को ओपीएस के अलावा कुछ मंज़ूर नहीं। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) ने प्रधानमंत्री मोदी और जेसीएम के प्रतिनिधियों की बैठक का बहिष्कार किया था। वजह, सरकार ने ओपीएस को लेकर कोई भी सकारात्मक बयान नहीं दिया का। सरकार अपनी बात पर ही अड़ी रही। नतीजा, सरकार ने ओपीएस पर आंदोलन करने वाले कर्मचारी संगठनों की राय लिए बिना ही यूपीएस को लागू करने की बात कह दी। अब दोबारा से आंदोलन शुरु होगा। 

नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अटेवा के प्रदेशाध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने कहा,  यदि सरकार एनपीएस से यूपीएस का विकल्प दे सकती है तो फिर ओपीएस का विकल्प देने में सरकार को क्या दिक्कत है। यदि यूपीएस मे बेसिक का 50 प्रतिशत दे सकते है तो ओपीएस मे भी 50 प्रतिशत ही तो देना होता है। नाम बदलने से काम नहीं बदलता। यह जितनी भी योजनाएं लाई जा रही हैं, सभी स्कीम हैं। तभी तो रोज बदलना पड़ रहा है। अभी तक एनपीएस की तारीफ की जा रही थी। अब यूपीएस की, जबकि सच यह कि ओपीएस ही सामाजिक सुरक्षा का कवच है। बुढ़ापे की लाठी है। देश के करोड़ों कर्मचारी ओपीएस की ही मांग कर रहे हैं। 

Friday, August 23, 2024

उत्तराखंड विधानसभा 2024 में बंटा 5 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट, जानिये किस विभाग को कितना मिला




देहरादून: इस अनुपूरक बजट मेंआपदा राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास पर खास जोर दिया गया है। इसमें ₹3756.89 करोड़ राजस्व और ₹1256.16 करोड़ पूंजीगत पक्ष के लिए निर्धारित किए गए हैं।

उत्तराखंड विधानसभा के दूसरे दिन वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने 2024-25 के लिए 5013.05 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। इस बजट में 1256.16 करोड़ रुपये पूंजीगत विकास के लिए निर्धारित किए गए हैं, जो अवस्थापना विकास कार्यों में लगाए जाएंगे। सरकार के संचालन के लिए 3756.89 करोड़ रुपये राजस्व पक्ष में रखे गए हैं, जबकि केंद्रीय पोषित योजनाओं के लिए 1531.65 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। वार्षिक बजट की तरह ही इस अनुपूरक बजट में भी गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है।
विकास और बुनियादी ढांचे के लिए ₹5013 करोड़ का बजट आवंटन कुछ इस प्रकार है :-

1. एसडीआरएफ के लिए 718.40 करोड़, समग्र शिक्षा के लिए 697.90 करोड़ और एसडीएमएफ के अंतर्गत 229.6 करोड़ रुपए मिले।
2. सूचना विभाग के लिए 225 करोड़, नगरीय अवस्थापना सुदृढ़ीकरण हेतु 192.00 करोड़ और सिवरेज मैनेजमेंट के लिए 120 करोड़ रुपए मिले।
3. गैर सरकारी महाविद्यालयों के लिए 100.03 करोड़, अटल आयुष्मान योजना (पेंशनर) हेतु 100 करोड़ और ईडब्ल्यूएस आवासों के लिए 96.76 करोड़ रुपए मिले।
4. वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के लिए 130 करोड़, अग्निशमन सेवाओं के लिए 71 करोड़ और मातृत्व लाभ योजना हेतु 70 करोड़ रुपए मिले।
5. यूनिटी मॉल/प्लाजा निर्माण के लिए 69 करोड़, यूजेवीएनएल में ऋण हेतु 61 करोड़ और यूपीसीएल परियोजनाओं के लिए 61 करोड़ रुपए मिले।
6. यूआईआईडीएफ के लिए 52 करोड़, अटल आयुष्मान योजना के लिए 50 करोड़ और मार्गों/पुलियों के अनुरक्षण हेतु 50 करोड़ रुपए मिले।
7. नाबार्ड पोषित मार्गों के लिए 50 करोड़, टिहरी झील के विकास हेतु 50 करोड़ और स्थानीय निकायों के लिए 46 करोड़ रुपए मिले।
8. पीएम जनमन योजना हेतु 44.11 करोड़, पीएम आवास योजना वन टाइम लोन के लिए 35.83 करोड़ और एनईपी पीएम श्री योजना हेतु 76.22 करोड़ रुपए मिले।
9. गौ सदन निर्माण हेतु 32 करोड़, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के लिए 36.18 करोड़ और स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के लिए 27.58 करोड़ रुपए मिले।
10. जेवीएनएल में निवेश हेतु 26 करोड़, यूपीसीएल परियोजनाओं में निवेश हेतु 26 करोड़ और राज्य संपत्ति विभाग के भवन निर्माण हेतु 25 करोड़ रुपए मिले।
11. पुलिस कर्मियों के आवास हेतु 25 करोड़, नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना हेतु 25 करोड़ और चीनी मिलों के लिए 25 करोड़ रुपए मिले।
12. सिंचाई विभाग में रख-रखाव हेतु 25 करोड़, वनों की सुरक्षा हेतु 25 करोड़ और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना हेतु 20 करोड़ रुपए मिले।
13. जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना हेतु 20 करोड़, डेरी विकास परियोजना हेतु 15 करोड़ और हाउस ऑफ हिमालयाज के लिए 10 करोड़ रुपए मिले।
14. परिवहन निगम के नुकसान की प्रतिपूर्ति हेतु 15 करोड़, बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा हेतु 12 करोड़ और उड़ान योजना के तहत हवाई संपर्क हेतु 10 करोड़ रुपए मिले।
15. साईलेज योजना हेतु 10 करोड़, मुख्यमंत्री बाल एवं महिला विकास निधि हेतु 8 करोड़ और सेतु आयोग हेतु 7.80 करोड़ रुपए मिले।
16. काशीपुर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण हेतु 5.75 करोड़, मुख्यमंत्री उड़न खटोला योजना हेतु 5 करोड़ और विद्या समीक्षा केंद्र हेतु 5 करोड़ रुपए मिले।
17. वृद्ध आश्रम भवन निर्माण हेतु 5 करोड़, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन हेतु 5 करोड़ और आईस स्केटिंग रिंग हेतु 5 करोड़ रुपए मिले।
18. मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना हेतु 6 करोड़, मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना हेतु 2 करोड़ और वर्ल्ड आयुर्वेदा कांग्रेस हेतु 2 करोड़ रुपए मिले।
19. प्रधानमंत्री मातृत्व योजना हेतु 1.44 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।

Wednesday, August 14, 2024

J&K: डोडा में सुरक्षाबलों ने ढेर किए चार आतंकी, सेना का कैप्टन बलिदान; आतंकियों से मुठभेड़ में गोलीबारी जारी


डोडा के अस्सर इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ अभी जारी है। इस मुठभेड़ में चार आतंकियों के मारे जाने की खबर है। वहीं, भारतीय सेना के 48 राष्ट्रीय राइफल्स के एक कैप्टन बलिदान हो गए  हैं। इलाके में खूने के धब्बे मिले थे, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने अभियान चलाया। सुरक्षा बलों ने एम4 राइफल बरामद की है। इसके अलावा गोला-बारूद और रसद सामग्री भी बरामद की है। इसके साथ ही तीन बैग भी जब्त किए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, डोडा के अस्सार इलाके में भारतीय सेना ने फिर सर्च अभियान चलाया। इसी दौरान आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। मुठभेड़ में तलाशी दल का नेतृत्व करते समय सेना के एक अधिकारी घायल हो गए। जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। बलिदानी कैप्टन दीपक 48 राष्ट्रीय राइफल से हैं। 

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कैप्टन दीपक ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और आतंकवादियों को मार गिराने के लिए अपने लोगों को निर्देशित करना जारी रखा। मुठभेड़ में उनको गोली लग गई। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने कहा कि गंभीर चोटों के कारण कैप्टन ने दम तोड़ दिया और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी अस्सर में एक नदी के पास छिपे हुए हैं। 

मंगलवार को उधमपुर की तहसील रामनगर के डूडू बसंतगढ़ के पहाड़ी क्षेत्र में चार आतंकवादी देखे गए थे। देर शाम आतंकियों की मौजूदगी पर सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान चलाया। अपनी तरफ सुरक्षाबलों का घेरा बढ़ता देख आतंकी सियोजधार के रास्ते अस्सर होते हुए जिला डोडा की तरफ निकल गए।

सूत्रों के अनुसार सियोजधार इलाके में आतंकवादी दिखे लेकिन धुंध का फायदा उठाकर ये लोग भाग निकले थे। सियोजधार क्षेत्र में मौसम खराब होने के चलते धुंध इनती ज्यादा थी कि दो फुट की दूरी तक देख पाना मुश्किल हो रहा था। इसके चलते सुरक्षाबलों को तलाशी अभियान में परेशानी आई। आतंकियों के निकलने के बाद सुरक्षाबलों ने डोडा की तरफ सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया। एक हफ्ता पहले भी डूडू बसंतगढ़ में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी हुई थी। तब भी आतंकी भाग निकलते थे। हफ्ते भर से सुरक्षाबलों ने जंगल में ही इन आतंकियों को घेरकर रखा था, लेकिन खराब मौसम इन आतंकियों की ढाल बन रहा है।

Wednesday, August 7, 2024

पेरिस ओलंपिक: विनेश फोगाट को मिल सकता है सिल्वर मेडल, फैसले का इंतजार, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में अपील


पेरिस. देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतने के करीब पहुंची भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. भारतीय पहलवान पेरिस ओलंपिक की महिला कुश्ती के 50 किग्रा वर्ग के फाइनल से पहले ओवरवेट होने की वजह से डिसक्वालीफाई कर दी गई. विनेश फोगाट ने अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ बुधवार को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (कैस) में अपील की और मांग की कि उन्हें संयुक्त रजत पदक दिया जाए. जानकारी के मुताबिक CAS आज ही (8 अगस्त, गुरुवार) अपना अंतरिम फैसला सुनाएगा.

पेरिस ओलंपिक से अयोग्य करार देकर बाहर की गई भारतीय पहलवान विनेश फोगाट ने इसके खिलाफ कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में अपील की है. भारतीय दल में शामिल भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के एक सूत्र ने पीटीआई से इस बात की पुष्टि की. सूत्र ने कहा, ‘‘हां हमें इस बारे में पता चला है। यह उनकी टीम द्वारा किया गया है’’

ओलंपिक खेलों के दौरान या उद्घाटन समारोह से पहले 10 दिनों की अवधि के दौरान पैदा होने वाले किसी भी विवाद के मध्यस्थता द्वारा समाधान के लिए खेल पंचाट के एक तदर्थ विभाग को स्थापित किया गया है. इस मामले की सुनवाई गुरुवार सुबह होगी. सेमीफाइनल में विनेश से हारने वाली क्यूबा की पहलवान युस्नेलिस गुजमेन लोपेज ने फाइनल में उनकी जगह ली है.

Monday, August 5, 2024

Bangladesh: बांग्लादेश में हजारों छात्र क्यों कर रहे प्रदर्शन, क्या हिंसा के पीछे पाकिस्तानी सेना-ISI का हाथ?


बांग्लादेश में आखिर ऐसा क्या हुआ कि शांतिपूर्ण रूप से चल रहे छात्रों के प्रदर्शन ने उग्र रूप धारण कर दिया? यह आंदोलन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ताधारी आवामी लीग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और सेना के हेलीकॉप्टर में सवार होकर देश छोड़ दिया है। उधर, प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को राजधानी ढाका में रैली करने की योजना तैयार की है। इससे पहले देश में हिंसा भड़कने से कई लोगों की मौत हो गई। इस बीच बांग्लादेश में सेना ने कर्फ्यू लगाया है और अधिकारियों ने अशांति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी है। 

प्रदर्शनकारियों-पुलिस के बीच झड़प में 300 लोगों की मौत
इससे पहले रविवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में करीब 300 लोग मारे गए। आपको बता दें कि बांग्लादेश में हाल ही में पुलिस और छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच हिसंक झड़पें हुईं हैं। दरअसल, प्रदर्शनकारी छात्र विवादित आरक्षण प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। इसके तहत बांग्लादेश के लिए वर्ष 1971 में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले स्वतंत्रता संग्रामियों के परिवारों के लिए 30 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित की गईं हैं।

ऐसे भड़की दंगों की आग
प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि मौजूदा आरक्षण के नियमों का फायदा शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग से जुड़े लोगों को मिल रहा है। इसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त किया है। सरकार ने बांग्लादेश में स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया। इसके बाद भी सरकार देश में फैली अशांति को नियंत्रित करने में विफल साबित हुई। उधर, आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी प्रदर्शनकारी नाखुश नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि स्वतंत्रता संग्रामियों  परिजनों को सरकारी नौकरियों में दिया जाने वाला आरक्षण पूरी तरह से खत्म होना चाहिए। बांग्लादेश की सेना के पूर्व प्रमुख इकबाल करीम ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उठाए गए कदमों को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की है। इस बीच मौजूदा सेना प्रमुख ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और इस वजह से देश में दंगों की आग और भी अधिक भड़क गई।  


क्या हिंसा भड़कने के पीछे पाकिस्तान की आईएसआई का हाथ है?
अब सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश में हिंसा के पीछे पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी, इंटर सर्विस इंटेलीजेंस (आईएसआई) का हाथ है? बताया गया है कि बांग्लादेश में 'बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिबिर' नाम के छात्र संगठन ने हिंसा को भड़काने का काम किया है। यह छात्र संगठन बांग्लादेश में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी की शाखा है। बताया जाता है कि जमात-ए-इस्लामी को पाकिस्तान की आईएसआई का समर्थन प्राप्त है। जमात-ए-इस्लामी ने 1971 में बांग्लादेश की आजादी के आंदोलन का विरोध किया था और पाकिस्तानी सेना के साथ मिल कर आंदोलनकारियों और खासकर हिंदुओं का कत्लेआम कराया था। उधर, बांग्लादेश सरकार इस बात का पता कर रही है कि क्या मौजूदा स्थिति में आईएसआई ने भी हस्तक्षेप किया है। 

बांग्लादेश की आरक्षण व्यवस्था क्या है जिस पर बवाल हो रहा है?
विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में बांग्लादेश की आरक्षण व्यवस्था है। इस व्यवस्था के तहत स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण का प्रावधान था। 1972 में शुरू की गई बांग्लादेश की आरक्षण व्यवस्था में तब से कई बदलाव हो चुके हैं। 2018 में जब इसे खत्म किया गया, तो अलग-अलग वर्गों के लिए 56% सरकारी नौकरियों में आरक्षण था। समय-समय पर हुए बदलावों के जरिए महिलाओं और पिछड़े जिलों के लोगों को 10-10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई। इसी तरह पांच फीसदी आरक्षण धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए और एक फीसदी दिव्यांग कोटा दिया गया। हालांकि, हिंसक आंदोलन के बीच 21 जुलाई को बांग्लादेश के शीर्ष न्यायालय ने सरकारी नौकरियों में अधिकतर आरक्षण खत्म कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर क्या फैसला सुनाया?
21 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने उस फैसले को पलट दिया, जिसके तहत सभी सिविल सेवा नौकरियों के लिए दोबारा आरक्षण लागू कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के ताजा निर्णय में, यह निर्धारित किया गया कि अब केवल पांच फीसदी नौकरियां स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा दो फीसदी नौकरियां अल्पसंख्यकों या दिव्यांगों के लिए आरक्षित होंगी। वहीं बाकी बचे पदों के लिए अदालत ने कहा कि ये योग्यता के आधार पर उम्मीदवारों के लिए खुले होंगे। यानी 93 फीसदी भर्तियां अनारक्षित कोटे से होंगी। 

कोर्ट ने लगभग आरक्षण खत्म कर दिया, फिर क्यों प्रदर्शन हो रहे हैं?
शुरुआत से प्रदर्शनकारी छात्र मुख्य रूप से स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए आरक्षित नौकरियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि इसकी जगह योग्यता आधारित व्यवस्था लागू हो। प्रदर्शनकारी इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग कर रहे थे, उनका कहना है कि यह भेदभावपूर्ण है और प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के समर्थकों के फायदे के लिए है। बता दें कि प्रधानमंत्री शेख हसीना बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीब उर रहमान की बेटी हैं, जिन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का नेतृत्व किया था। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद माना जा रहा था कि विरोध प्रदर्शन खत्म हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और आंदोलन और भी उग्र हो गया। छात्र संगठनों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब विरोध प्रदर्शनों का अंत नहीं है और इन्होंने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। 

जहांगीरनगर विश्वविद्यालय के विरोध समन्वयक महफूजुल हसन ने कहा कि उनकी अभी भी कई मांगें हैं जिन्हें सरकार को पूरा करना होगा, तभी वे प्रदर्शन समाप्त करेंगे। उन्होंने कहा, 'अब हम अपने भाइयों की जान के लिए न्याय चाहते हैं। प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए और जो लोग दोषी हैं, उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।' 

हसन ने कहा कि छात्र समूह उन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को हटाने की भी मांग कर रहे हैं, जहां प्रदर्शनकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ा और उन राजनेताओं को भी हटाया जाना चाहिए, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों के बारे में भड़काऊ टिप्पणियां फैलाईं।

ढाका विश्वविद्यालय के छात्र और विरोध-प्रदर्शन के समन्वयक हसीब अल-इस्लाम ने कहा कि वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को सकारात्मक मानते हैं, लेकिन मांग की कि आरक्षण संशोधन विधेयक संसद में पारित किया जाए। इस्लाम ने कहा कि विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी संशोधन मांगों के अनुसार एक कार्यकारी आदेश जारी नहीं करती। 

पूरे मसले पर सरकार का क्या रुख है?
बांग्लादेश में ताजा हिंसा के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा पैनल की बैठक की। इसके बाद एक बयान में पीएम हसीना ने कहा, 'जो लोग इस समय सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, वे छात्र नहीं बल्कि आतंकवादी हैं जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं।' प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं अपने देशवासियों से इन आतंकवादियों का सख्ती से दमन करने की अपील करती हूं।'

राजधानी ढाका में एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तोड़फोड़ हुई। इस घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री सामंत लाल सेन ने कहा कि अस्पताल पर हमला अस्वीकार्य है। उन्होंने ने कहा कि हर किसी को इससे बचना चाहिए।

विरोध के शुरुआत प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आरक्षण प्रणाली का बचाव करते हुए कहा था कि युद्ध में अपने योगदान के लिए स्वतंत्रता सेनानियों को सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए, चाहे उनका राजनीतिक जुड़ाव कुछ भी हो। उनकी सरकार ने मुख्य विपक्षी दलों, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी पार्टी पर अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। 

इस बीच, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने पीएम हसीना से सड़कों से सैनिकों को हटाने और संकट को हल करने के लिए 'राजनीतिक पहल' करने का आग्रह किया है। वहीं सेना प्रमुख जनरल वकर-उज-जमान ने कहा है कि सेना हमेशा लोगों के हितों और देश की किसी भी जरूरत के लिए मौजूद रहेगी।

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