Monday, September 30, 2024

बारूद के ढेर पर बैठी है दुनिया, तीसरा वर्ल्ड वॉर दे रहा दस्तक, बस एक चिंगारी...


 नई दिल्ली. 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला बोला और बड़े ही बर्बर तरीके से 1200 से ज्यादा इजरायलियों की हत्या कर दी और 250 लोगों को बंधक भी बना लिया. हमास की इस क्रूरतापूर्ण कार्रवाई के बाद इजरायल ने हमास को नेस्तनाबूद करने का प्रण लिया और उसने जो किया वो पूरी दुनिया देख रही है. फिलिस्तीन के गाजा में हवाई और जमीनी हमले करके इजरायल ने हमास की कमर पूरी तरह तोड़ दी. इजरायल के निशाने पर पहले सिर्फ हमास ही था और वो अपने तरीके से हमास को निपटाने में ही लगा था तभी लेबनान की धरती से हिजबुल्लाह ने भी इजरायल के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया. उसने सैकड़ों रॉकेट और मिसाइल से इजरायल को निशाना बनाया.

फिर क्या था? इजरायल ने हमास को छोड़ हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला बोल दिया. इजरायल ने कुछ ही दिनों के अंदर हिजबुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह सहित कई टॉप कमांडर को मार गिराया. इजरायल अब तक इस लड़ाई में हमास और हिजबुल्लाह के तमाम बड़े कमांडर का काम तमाम कर चुका है. इजरायल इतने पर ही नहीं रुका, उसके अगले निशाने पर थे हूती विद्रोही. इजरायल ने यमन के होदेइदाह बंदरगाह पर जबरदस्त हवाई हमला करके सैकड़ों हूती विद्रोहियों को मार गिराया. हूती विद्रोहियों ने भी पहले इजरायल पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया था. ईरान हमास और हिजबुल्लाह के साथ हूती विद्रोहियों का भी समर्थन करता है. इजरायल ने होदेइदाह बंदरगाह को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि हूती विद्रोही इसका इस्तेमाल करके ईरान से हथियारों की तस्करी करते हैं और पिछले कई सालों से इस बंदरगाह पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है.

इजरायल बनाम ईरान
वैसे तो इजरायल के खिलाफ सीधी लड़ाई से ईरान बच रहा था लेकिन इजरायल के दुश्मनों को आर्थिक मदद के साथ हथियारों की भी सप्लाई कर रहा था. पिछले साल हमास के हमले के पहले भी इजरायल की छिटपुट लड़ाई तो हो रही थी लेकिन अब इजरायल सालों पुराने अपने दुश्मनों को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर चल रहा है. इजरायल ने हमास और हिजबुल्लाह के तमाम टॉप कमांडर को निपटाकर अपनी मंशा भी जता दी कि वो अपने खिलाफ होने वाले किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा. कुछ ही दिन पहले बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र संघ में बिना नाम लिए ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि जो लोग इजरायल को निशाना बनाएंगे, उन्हें इसका परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा. नेतन्याहू ने ये भी कहा था कि इजरायल की पहुंच से बाहर कोई जगह नहीं है.

इजरायल के आक्रामक तेवर से ईरान भी बैकफुट पर आता नजर आ रहा है. हिजबुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह की मौत के बाद अब ईरान को भी अब इजरायली हमले का डर सताने लगा है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया है. अब ईरान इस पूरे मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई है. जाहिर है ईरान आने वाले संभावित खतरों को भांप चुका है और अपने बचाव के रास्ते खोज रहा है.

रूस बनाम यूक्रेन
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को अब हजार दिन से भी ज्यादा हो गए. इस लड़ाई में एक तरफ रूस है जिसके साथ चीन खड़ा है तो यूक्रेन को अमेरिका समेत नाटो का साथ मिल रहा है. इस लड़ाई की वजह से वैसे ही तीसरे विश्व युद्ध का खतरा बना हुआ है. हालांकि भारत समेत कुछ देश इस युद्ध को रुकवाने की कोशिश में लगे हैं लेकिन युद्ध खत्म होने के कोई संकेत अब तक मिलता नहीं दिख रहा. अगर दोनों देशों के बीच युद्ध विराम नहीं हुआ तो यूरोप का युद्ध मैदान बन जाना तय समझिए. इसी यूरोप की ओर युद्ध की चिंगारी मिडिल ईस्ट की ओर से आती दिख रही है. जिस तरह से इजरायल एक के बाद एक हमले कर रहा है वो कब बड़े युद्ध में बदल जाए कोई नहीं जानता. क्योंकि ईरान के अलावा मिडिल ईस्ट के कई और देश भी इजरायल को अपना दुश्मन मानते हैं और वो भी किसी सही मौके का इंतजार कर रहे हैं. संकेतों को मानें तो तीसरे विश्व युद्ध के खतरे का सबसे घना साया यूरोपीय देशों के ऊपर मंडरा रहा है.

Saturday, September 28, 2024

बाबा रे बाबा...नसरल्‍लाह को मारने के लिए इजरायल ने बरसाए 1000 किलो वाले 85 बम, तबाही देख भूल जाएंगे हिरोशिमा-नागासाकी


बेरुत/तेल अवीव. इजरायल अपने सबसे बड़े दुश्‍मनों में से एक हसन नसरल्‍लाह को आखिरकार मार गिराया है. नसरल्‍लाह पिछले तकरीबन चार दशक से आतंक मचा रखा था. आरोप है कि नसरल्‍लाह ने इजरायल पर कई हमले करवाए, जिसमें बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई. इजरायली फोर्स ने उसी दुर्दांत नसरल्‍लाह को खत्‍म कर दिया है. हिजबुल्‍लाह ने भी बयान जारी कर अपने मुखिया नसरल्‍लाह के मारे जाने की पुष्टि कर दी है. इजरायल ने हिजबुल्‍लाह प्रमुख को खत्‍म करने के लिए खास तरह के बम का इस्‍तेमाल किया था. एक्‍सपर्ट की मानें तो एक बम का वजन 1000 किलोग्राम था और वह 33 मीटर के दायरे में सबकुछ तबाह करने में सक्षम था.


इजरायल पिछले सोमवार से लेबनान की राजधानी बेरुत और आसपास के इलाकों में लगातार बमबारी कर रहा है. इजरायली फोर्स ने बताया कि हिजबुल्‍लाह के हेडक्‍वार्टर में चीफ नसरल्‍लाह के साथ अन्‍य कई टॉप कमांडर इकट्ठा थे. इजरायली खुफिया एजेंसियों ने इसकी सटीक जानकारी IDF के साथ ही देश के शीर्ष कमांडर्स को दी. इसके बाद इजरायली एयरफोर्स ने प्‍लानिंग के तहत बेरुत स्थित हिजबुल्‍लाह के मुख्‍यालय पर बम बरसाना शुरू कर दिया. पलभर में ही हिजबुल्‍लाह का हेडक्‍वार्टर मलबे में तब्‍दील हो गया. जहां इमरातें खड़ी थीं, वह मरुस्‍थल जैसा हो गया. इसमें नसरल्‍लाह भी हलाक हो गया.

खास और खतरनाक बम
एक्‍सपर्ट की मानें तो इजरायली एयरफोर्स ने प्रिसीजन अटैक किया. हमले में अत्‍यंत ही खतरनाक बम का इस्‍तेमाल किया गया. एक बम का वजन 1000 किलो था. यह बम 33 मीटर के दायरे में तबाही मचाने में सक्षम था. मतलब यह कि बम धमाके के केंद्र के 33 मीटर के रेडियस में आने वाला कोई भी शख्‍स जिंदा नहीं बच सकता है. इजरायल ने ऐसे एक के बाद एक 85 बम हिजबुल्‍लाह के हडक्‍वार्टर पर गिराए और यह सुनिश्‍चत कर दिया कि यहां मौजूद एक भी इंसान न बचने पाए. इस तरह एयरफोर्स ने हिजबुल्‍लाह के मुख्‍यालय पर कुल 85000 किलो बारूद गिराया. ऐसे में बेरुत में तबाही का सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है.

प्रभावी था नसरल्‍लाह
लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह को पश्चिम एशिया में एक शक्तिशाली अर्धसैनिक और राजनीतिक ताकत में तब्दील करने में अहम भूमिका अदा करने वाला संगठन का सरगना हसन नसरल्लाह इजरायली हवाई हमले में मारा गया है. वह 64 साल का था. नसरल्लाह ने साल 2006 में इजराइल के खिलाफ हिजबुल्ला के युद्ध का नेतृत्व किया था. उसी के नेतृत्व में समूह पड़ोसी देश सीरिया के सशस्‍त्र संघर्ष में शामिल हुआ था. बेरूत के दक्षिणी उपनगर हरेत हरेक पर इजराइली हवाई हमले में संगठन का सरगना मारा गया और जहां वह रह रहा था, हमले में वहां कई बहुमंजिला इमारतें ढह गईं.

Friday, September 27, 2024

उत्तराखंड में भू कानून की मांग: अगले बजट सत्र में लाएंगे भू-कानून, सीएम पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान



देहरादून: सीएम धामी ने भू कानून से संबंधित तैयारियों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अगले बजट सत्र में व्यापक भू कानून पेश करने की योजना बना रही है और इस पर पहले से ही एक समिति कार्यरत है।

उत्तराखंड में भू कानून की मांग को लेकर चल रहे आंदोलनों के बीच सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार भू कानून और मूल निवास जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर है। सरकार संवेदनशीलता के साथ इन मुद्दों पर काम कर रही है और अगले बजट सत्र में उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार एक व्यापक भू कानून लाने का प्रयास कर रही है, ज्ञात हो कि बजट सत्र हर साल फरवरी-मार्च में होता है। ऐसे में उत्तराखंड में अलगे 5 महीने में भू-कानून को लेकर बड़ा फैसला होने की उम्मीद जग गई है।

सीएम धामी ने आगे कहा कि इसके लिए पहले से ही एक समिति गठित की जा चुकी है, जो भू कानून का अध्ययन कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार इस मुद्दे का समाधान निकालेगी और भू कानून की तैयारी में सभी पक्षों और विशेषज्ञों से राय ली जाएगी।
भू कानून में बदलाव की दिशा में सरकार ने बढ़ाए कदम

भू कानून पर बात करते हुए सीएम धामी ने कहा कि उनकी सरकार बजट सत्र तक इस मुद्दे पर काम पूरा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि समिति इस पर कार्यरत है और जल्द ही बड़ा फैसला लिया जाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड में नगर निकाय क्षेत्र से बाहर 250 वर्ग मीटर भूमि बिना अनुमति खरीदी जा सकती है। हाल ही में जानकारी मिली है कि कई लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम से भूमि खरीदी है, जिसकी जांच की जाएगी। कानून के उल्लंघन कर खरीदी गई सभी भूमि सरकारी संपत्ति में शामिल की जाएगी। सीएम धामी ने बताया कि 2017 में कानून में बदलाव के बावजूद सकारात्मक परिणाम नहीं मिले, इसलिए ऐसे प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समाप्त किया जाएगा। जिन लोगों ने जमीन खरीदी लेकिन उसका सही उपयोग नहीं किया उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ये विडियो देखिये...

Tuesday, September 17, 2024

Delhi CM: विधायक, मंत्री और फिर CM... सिर्फ चार सालों में आतिशी बन गईं दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री


आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के नए मुख्यमंत्री के रूप में आतिशी मार्लेना के नाम की घोषणा की है। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी अब उनकी जगह लेंगी। वहीं अरविंद केजरीवाल आज उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। मनीष सिसोदिया समेत कई दिग्गज नेताओं ने आतिशी के नाम का प्रस्ताव रखा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। (Delhi New Chief Minister Updates) आम आदमी पार्टी ने (आप) आज दिल्ली के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी है। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी अब उनकी जगह लेंगी। वहीं अरविंद केजरीवाल आज उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।

केजरीवाल मंगलवार शाम साढ़े 4 बजे दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात कर सकते हैं। केजरीवाल ने 15 सितंबर दिन रविवार को सीएम पद से इस्तीफे का एलान किया था।




कौन हैं आतिशी ?
आम आदमी पार्टी में आतिशी ने तेजी से अपनी पहचान बनाई है। आम आदमी पार्टी अपने आठ साल के कार्यकाल में जिन उपलब्धियों को सबसे ज्यादा बार गिनाती रही है उनमें शिक्षा का क्षेत्र सबसे ऊपर है और इसका बहुत बड़ा श्रेय आतिशी को जाता है। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी का मेनिफेस्टो तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। 2014 लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रवक्ता बनाया गया था।


फिर साल 2019 में उन्होंने पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। लेकिन भाजपा के गौतम गंभीर के सामने 4.77 लाख वोटों से हार गई थीं, वो तीसरे नंबर पर रहीं थीं।
इसके बाद साल 2020 में उन्होंने कालकाजी विधानसभा से चुनाव जीता। साल 2023 में पहली बार दिल्ली की केजरीवाल सरकार में मंत्री का पदभार संभाला। अब साल 2024 में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं।

आपको बता दें कि आतिशी शुरू से ही दिल्ली की शिक्षा क्रांति का महत्वपूर्ण चेहरा रही हैं। यह सभी जानते हैं कि शिक्षा मंत्री के तौर पर मनीष सिसोदिया ने जो काम किए उसमें आतिशी ने उन्हें काफी सहयोग किया। आतिशी ही मनीष सिसोदिया की सलाहकार रही हैं और हर रणनीति उन्होंने ही बनाई है। लेकिन अप्रैल 2018 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था।

आम आदमी पार्टी में की महिला नेता आतिशी एक होनहार स्टूडेंट, बेहतरीन टीचर होने के साथ ही शैक्षणिक योग्यता में भी अव्वल हैं। वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं। वह शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए जानी जाती हैं। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सुधार का सबसे बड़ा श्रेय आतिशी को दिया जाता है। वह आप की राजनीति मामलों की समिति की सदस्य भी हैं।

साल 2020 में आतिशी पहली बार कालकाजी विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार धर्मवीर सिंह को 11 हजार 393 वोटों से मात दी थी। आतिशी का जन्म दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विजय कुमार सिंह और त्रिप्ता वाही के घर 8 जून 1981 को हुआ। आतिशी ने नई दिल्ली के स्प्रिंगडेल स्कूल में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। आतिशी ने सेंट स्टीफंस कॉलेज में इतिहास की पढ़ाई की। इसके बाद ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में शेवनिंग छात्रवृत्ति पर मास्टर की डिग्री हासिल की। कुछ साल बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड से शैक्षिक अनुसंधान में रोड्स स्कॉलर के रूप में अपनी दूसरी मास्टर डिग्री हासिल की।

आतिशी ने मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में सात साल बिताए थे, यहां वो जैविक खेती और प्रगतिशील शिक्षा प्रणालियों से जुड़ीं रहीं। उन्होंने वहां कई गैर-लाभकारी संगठनों के साथ भी काम किया था, यहां उनकी पहली बार आम आदमी पार्टी के कुछ सदस्यों से मुलाकात हुई थी, आतिशी आम आदमी पार्टी की स्थापना के समय से हैं।

Tuesday, September 3, 2024

अब चश्‍मे को कर दें टाटा-बाय बाय! भारत में आई ऐसी आई ड्रॉप, 15 मिनट में हट जाएंगे स्‍पेक्‍स, सरकार की मंजूरी



नई दिल्‍ली. आप भी अपनी कमजोर आई-साइट के चलते अक्‍सर टीवी देखने या न्‍यूजपेपर पढ़ते वक्‍त बिना चश्‍मे के खुद को असहाय महसूस करते हैं? तो य‍ह खबर आप ही के लिए हैं. अब एक आई-ड्रॉप को डालते ही 15 मिनट में आपके आंख की रौशनी अस्‍थाई तौर पर लौट आएगी. दो साल से ज्‍यादा वक्‍त तक विचार-विमर्श के बाद, दवा नियामक यानी ड्रग्‍स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने पढ़ने के चश्मे की आवश्यकता को खत्म करने के लिए भारत की पहली आई ड्रॉप को मंजूरी दे दी है.

मुंबई में स्थित एन्टोड फार्मास्यूटिकल्स ने मंगलवार को पिलोकार्पाइन का उपयोग करके बनाई गई “प्रेस्वू” आई ड्रॉप लॉन्च की. यह दवा आंख की पुतलियों के आकार को कम करके ‘प्रेसबायोपिया’ का इलाज करती है. इस तरीके से किसी भी चीज को करीब से देखने में मदद मिलती है. प्रेसबायोपिया की स्थिति उम्र से जुड़ी हुई है और पास की चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की आंखों की क्षमता में कमी पर काम करती है.

6 घंटे तक बढ़ेगी आंखों की रौशनी
न्यूज18 को दिए इंटरव्‍यू में, एन्टोड फार्मास्यूटिकल्स के सीईओ निखिल के मसुरकर ने कहा कि दवा की एक बूंद सिर्फ 15 मिनट में काम करना शुरू कर देती है और इसका असर अगले छह घंटों तक रहता है. अगर पहली बूंद के तीन से छह घंटे के भीतर दूसरी बूंद भी डाली जाए, तो असर और भी लंबे समय तक रहेगा. कहा गया, “अब तक, धुंधली, पास की नजर के लिए पढ़ने के चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस या कुछ शल्य चिकित्सा हस्तक्षेपों को छोड़कर कोई दवा-आधारित समाधान नहीं था.”

कब और कितने में उपलब्‍ध?
एन्टोड फार्मास्यूटिकल्स आई, ईएनटी और त्वचाविज्ञान दवाओं में विशेषज्ञता रखता है और 60 से अधिक देशों को निर्यात करता है. अक्टूबर के पहले सप्ताह से, प्रिस्क्रिप्शन-आधारित ड्रॉप्स 350 रुपये की कीमत पर फार्मेसियों में उपलब्ध होंगे. यह दवा 40 से 55 साल की आयु के लोगों के लिए हल्के से मध्यम प्रेसबायोपिया के उपचार के लिए संकेतित है. मसुरकर का दावा है कि यह दवा भारत में अपनी तरह की पहली दवा है जिसका परीक्षण भारतीय आंखों पर किया गया है और भारतीय आबादी के आनुवंशिक आधार के अनुसार अनुकूलित किया गया है.

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