Monday, January 27, 2025

Uttrakhand: खानपुर फायरिंग मामले में बड़ा एक्शन, आरोपी सलाखों के पीछे, शस्त्र लाइसेंस निरस्त


Haridwar News: उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद अंतर्गत खानपुर से विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन विवाद मामले में फायरिंग की घटना के बाद पुलिस प्रशासन एक्शन मोड में है। पुलिस ने जहां दोनों पक्षों पर मुकदमा दर्ज कर विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन सहित उनके समर्थकों को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया। न्यायालय से विधायक उमेश कुमार को जहां जमानत मिली वहीं पूर्व विधायक प्रणव चैंपियन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं प्रशासन ने शिकंजा कसते हुए चैंपियन और उनके परिजनों के शस्त्र लाइसेंस भी निलंबित कर दिए हैं। 

खानपुर से विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बीच विवाद के बाद गिरफ्तार किए गए चैंपियन को आज सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद चैंपियन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। पुलिस ने मेडिकल के बाद कुंवर प्रणव सिंह को कोर्ट में पेश किया, कोर्ट ने कुंवर प्रणव सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। चैंपियन के चार साथियों को भी कोर्ट ने जेल भेजा है सभी पांचों आरोपियों को हरिद्वार के जिला कारागार रोशानाबाद भेजा गया है। 

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। 

वहीं खानपुर विधायक उमेश शर्मा को भी पुलिस ने हरिद्वार के रोशनाबाद कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद उमेश कुमार को सीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गई। करीब 15 मिनट तक चली सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने जमानत दे दी। 40-40 हजार के दो मुचलके भरे गए। 

बता दें कि कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को खानपुर विधायक उमेश कुमार के आवास पर फायरिंग और मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था। हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। इस मामले से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 

गौरतलब है रविवार को पूर्व विधायक चैंपियन की ओर से विधायक उमेश के कैंप कार्यालय पर गोली चलाने के बाद माहौल गर्मा गया था। इसके बाद विधायक उमेश कुमार चैंपियन के कार्यालय पर हाथ में पिस्टल ले जाते हुए दिखाए दिए थे। पुलिस ने किसी तरह उन्हें रोका था। इस मामले में दोनों के समर्थकों में टकराव की स्थिति बन गई थी। जिसके बाद दोनों के कैंप कार्यालय पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इस बीच पुलिस चैंपियन को गिरफ्तार करते हुए देहरादून के नेहरू कालोनी थाने में 

उसके बाद देर रात पुलिस चैंपियन और उनके समर्थकों को लेकर रुड़की पहुंची थी। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। साथ ही विधायक उमेश कुमार और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। देर रात तक पुलिस अधिकारी रुड़की में ही डेरा डाले रहे थे। 

चैंपियन सहित उसके पुत्र और पत्नी के कुल 9 शस्त्र लाइसेंस निरस्त 

हरिद्वार। एसएसपी की संस्तुति पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आज कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन सहित उनकी पत्नी और पुत्र के नाम जारी शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए। 

जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह ने पुलिस विभाग की आख्या के आधार पर तत्काल कार्यवाही करते हुए तीन व्यक्तियों के शस्त्र लाईसेन्स निलम्बित कर दिये हैं। जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह ने शस्त्र लाईसेन्स अनुज्ञाओं की शर्तों का उल्लंघन किये जाने तथा कानून एवं शान्ति व्यवस्था बनाये रखने हेतु तीन व्यक्ति के शस्त्र लाईसेंन्स निरस्त किये हैं। जिलाधिकारी ने दिव्य प्रताप सिंह पुत्र कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन निवासी रंगमहल कस्बा लंढौरा थाना कोतवाली मंगलौर, तहसील रुड़की जिला हरिद्वार के शस्त्र लाईसेंस सं० 2108/13 रिवाल्वर नं0 3107638-32, शस्त्र लाईसेंस सं० 2109/13 रिवाल्वर नं0 75931-32 बोर व शस्त्र लाईसेंस नं0 2104/13 बन्दूक नं0 148042 तथा श्रीमती सुभद्रा देवी (कुंवर देवरानी) पत्नी कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन निवासी रंगमहल कस्बा लंढौरा, थाना कोतवाली मंगलौर, तहसील रुड़की जिला हरिद्वार के शस्त्र लाईसेंस सं० 1237/99 बंदूक डीबीबीएल, शस्त्र लाईसेंस सं० 1492/03 पिस्टल नं0 0041 व शस्त्र लाईसेंस सं० 1669/07 पिस्टल नं० 623745ए, कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन पुत्र श्री नरेन्द्र सिंह निवासी रंगमहल कस्बा लंढौरा थाना कोतवाली मंगलौर, तहसील रूड़की जिला हरिद्वार के शस्त्र लाईसेंस नं0 1038/93 रायफल नं0 2576544 डीबीएल, शस्त्र लाईसेंस नं0 1039/1993 पिस्टल नं०-ए-1707 व शस्त्र लाईसेंस नं0 2256/14 रिवाल्वर-ए-1905-32 बोर को निलम्बित करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 


जिलाधिकारी ने तीनों व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। कारण बताओ नोटिस के अनुसार तीनों व्यक्तियों को नोटिस प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर लिखित रूप से स्वयं अथवा प्रतिनिधि/अधिवक्ता के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा। नोटिस में यह भी सूचित किया गया है कि यदि सूचना के बावजूद नियत समयावधि के भीतर लिखित उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो न्यायालय जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रकरण में एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा।

Sunday, January 26, 2025

श्रीनगर नगर निगम को मिली पहली महिला मेयर, निर्दलीय प्रत्याशी आरती भंडारी ने दिग्गजों को धूल चटाकर लहराया जीत का परचम




श्रीनगर गढ़वाल: पौड़ी गढ़वाल के नगर निगम श्रीनगर को पहली मेयर मिल चुकी है। मेयर पद पर भाजपा से बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप चुनाव मैदान में उतरी आरती भंडारी ने भाजपा को बड़ा झटका देकर ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए श्रीनगर की पहली महापौर बनने का गौरव हासिल किया है।

आरती भंडारी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी आशा मैठाणी उपाध्याय को 1,639 से ज्यादा वोटों से हराकर शानदार जीत दर्ज की। आरती भंडारी को कुल 7,959 वोट मिले। जबकि भाजपा की आशा उपाध्याय को 6,320 मत प्राप्त हुए। कांग्रेस की मीना रावत को 2075, यूकेडी प्रत्याशी सरस्वती देवी को 243 व निर्दलीय प्रत्याशी पूनम तिवाड़ी को 2633 मत पाकर संतोष करना पड़ा। 90 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया, जबकि 483 मद रद्द किए गए।

गौरतलब है कि मेयर पद पर टिकट बंटवारे से नाराज पूर्व भाजपा जिला उपाध्यक्ष लखपत भंडारी ने अपनी पत्नी आरती भडारी को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतार दिया था। जिसके बाद श्रीनगर विधानसभा से भाजपा ने इसे नाक की लड़ाई बनाते हुए एडी चोटी का जोर लगा दिया था। यहाँ तक प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भाजपा प्रत्याशी के प्रचार में श्रीनगर आना पड़ा। परन्तु बावजूद इसके आरती भंडारी ने ऐसी कुलहाड़ी चलाई, जिसके आगे बीजेपी धराशाही हो गयी।

शनिवार देर शाम चुनाव परिणाम घोषित होते ही जीत की खुशी में आरती भंडारी के समर्थकों ने विजयी जुलूस भी निकाला। अपनी जीत के बाद नवनिर्वाचित मेयर आरती भंडारी ने जनता का आभार व्यक्त किया और भरोसा दिलाया कि वह अपने घोषणापत्र को पूरी तरह लागू करेंगी। उन्होंने कहा, यह जीत जनता की जीत है। श्रीनगर के विकास के लिए हरसंभव प्रयास करूंगी।

Wednesday, January 22, 2025

हरक सिंह पर ईडी की सबसे बड़ी कार्रवाई, 70 करोड़ की 101 बीघा जमीन की अटैच


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार में वन मंत्री रहे (अब कांग्रेस में शामिल) हरक सिंह रावत पर बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने हरक सिंह की सहसपुर स्थित 70 करोड़ रुपए की करीब 101 बीघा भूमि को प्रारंभिक रूप से अटैच कर लिया है। इस भूमि पर दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस का संचालन किया जाता है। जिसके प्रबंधन हरक सिंह के पुत्र तुषित संभालते हैं। दिसंबर 2024 में जब ईडी ने दोनों प्रकरण में जांच और पूछताछ तेज की थी, तभी से माना जा रहा था कि ईडी कुछ बड़ा करने वाली है।

ईडी के सूत्रों के अनुसार पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत के करीबी बीरेंद्र सिंह कंडारी और नरेंद्र कुमार वालिया ने हरक सिंह रावत के साथ आपराधिक साजिश करते हुए एक जमीन की 02 पवार ऑफ अटॉर्नी पंजीकृत कराई। हालांकि, कोर्ट ने संबंधित भूमि के विक्रय विलेख रद्द कर दिए थे। बावजूद इसके भूमि को अवैध रूप से हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत और उनकी करीबी लक्ष्मी राणा को बेचा जाना दिखाया गया। दिसंबर 2024 में ईडी प्रकरण में हरक सिंह की पत्नी दीप्ति रावत, करीबी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा के साथ ही पुत्र तुषित रावत को पूछताछ के लिए बुला चुकी है। उस दौरान ईडी ने सहसपुर की भूमि को लेकर भी तमाम सवाल किए थे। अब यह कार्रवाई बताती है कि भूमि खरीद को ईडी अधिकारियों ने मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा माना है।

फरवरी 2024 में दोनों मामलों में उत्तराखंड समेत हरियाणा व दिल्ली में 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी भी कर चुकी है। जिसमें ईडी की 17 टीमों ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के देहरादून में डिफेंस कालोनी स्थित आवास, उनके बेटे के सहसपुर के शंकरपुर स्थित दून इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज समेत उनसे जुड़े करीबी अधिकारियों उत्तराखंड के वरिष्ठ आइएफएस अधिकारी सुशांत पटनायक व पेड़ कटान में आरोपित सेवानिवृत्त प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) किशन चंद के हरिद्वार के आवास पर जांच की थी।

साथ ही हरक सिंह रावत के निजी सचिव रहे बीरेंद्र कंडारी के दून स्थित आवास, उनके करीबी नरेंद्र वालिया के ऋषिकेश में गंगानगर स्थित अपार्टमेंट, हरिद्वार रोड पर छिद्दरवाला स्थित लक्ष्मी राणा के अमरावती पेट्रोल पंप, काशीपुर में भाजपा के जिला मंत्री अमित सिंह के आलू फार्म स्थित आवास पर भी जांच की गई। इसके अलावा हरक सिंह रावत के श्रीनगर गढ़वाल में श्रीकोट स्थित गहड़ के पैतृक आवास और उनके करीबियों के अन्य ठिकानों को कवर किया गया था।

छापेमारी में ईडी ने 1.10 करोड़ रुपये, 80 लाख रुपये का 1.3 किलो सोना, 10 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा जब्त की थी। साथ ही उल्लेख किया गया था कि कार्रवाई में कई बैंक लॉकर्स, डिजिटल डिवाइस को सीज किया गया है और अचल संपत्ति के बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इसके बाद ईडी जरूरत पड़ने पर समन भेजकर हरक सिंह रावत समेत उनकी पत्नी दीप्ति रावत, पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं, लक्ष्मी राणा और अन्य को बुलाती आ रही है।

Monday, January 13, 2025

MahaKumbh: आस्था का प्रचंड समागम, अमृत स्नान का अद्भुत नजारा; सबसे पहले इस अखाड़े के नागा साधुओं ने लगाई डुबकी



 पौष पूर्णिमा पर शुरू हुए महाकुंभ 2025 में आज पहला अमृत स्नान (शाही स्नान) चल रहा है। मकर संक्रांति के पर्व पर कई अखाड़ों के नागा साधुओं ने संगम में पवित्र डुबकी लगा ली है, महाकुंभ के अमृत स्नान में सबसे पहले महानिर्वाणी के नागा साधुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। संगम तट पर अमृत स्नान का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। हर-हर महादेव, जय श्रीराम के जयघोष करते हुए श्रद्धालु भी आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। 'स्नान' क्षेत्र की ओर जाने वाले अखाड़ा मार्ग पर कड़ी सुरक्षा है। पुलिस, पीएसी, अखाड़ों के साथ घुड़सवार पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। 


आपको बता दें कि अमृत स्नान के लिए अखाड़ों के संतों एवं नागाओं के स्नान का समय तय है। सबसे पहले महानिर्वाणी एवं अटल अखाड़े के संतों ने स्नान किया। शिविर से इस अखाड़े के संतों ने सुबह करीब सवा पांच बजे प्रस्थान किया। संगम पर सवा छह बजे पहुंचे। करीब 40 मिनट तक अमृत स्नान किया। इनके बाद निरंजनी एवं आनंद अखाड़ा के संतों ने 7.05 बजे स्नान किया। इसी क्रम में जूना, आवाहन एवं पंच अग्नि अखाड़ा के संतों ने एक साथ सुबह आठ बजे स्नान किया। 


महानिर्वाण अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान पुरी ने किया अमृत स्नान

मकर संक्रांति पर अमृत स्नान करने के बाद महानिर्वाण अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान पुरी ने कहा कि यहां बहुत भीड़ है, लेकिन सब कुछ जिस तरह से प्रवाहित होता है, वह अद्भुत है। हर कोई पवित्र स्नान के लिए जगह ढूंढ़ लेता है। मुझे लगता है कि यह सब यहीं देखना संभव है।

चरण रज लेने को अखाड़ा मार्ग पर देर रात से श्रद्धालुओं का डेरा
अमृत स्नान को जाते समय नागा संन्यासियों की चरण रज लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देर रात से ही अखाड़ा मार्ग पर डेरा डाल दिया। यहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने कई दफा उनको हटाया लेकिन, कुछ देर बाद दोबारा श्रद्धालु वहां आ जाते। देर रात तक हजारों श्रद्धालु अखाड़ा मार्ग पर डेरा डाले दिखाई दिए। मध्य प्रदेश के निवाड़ी से आए राजकुमार, उनकी पत्नी उर्मिला समेत परिजनों का कहना है कई साल बाद यह मौका मिलता है। वह यह चरण रज लेकर अपने गांव जाएंगे।

अखड़ों के निकलने वाले रास्ते पर भारी पुलिस बल तैनात

मकर संक्रांति पर्व पर मंगलवार को अखाड़ों का अमृत स्नान करीब साढ़े नौ घंटे तक चलेगा। शिविर से निकलने और वापस आने में 12 घंटे से भी अधिक समय लगेगा। अखड़ों के निकलने वाले रास्ते के दोनों तरफ भारी पुलिस बल तैनात है। 
 

हर तरफ हर-हर गंगे का उद्घोष
प्रयागराज महाकुंभ में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा है। कोई हनुमान चालीसा पाठ करता हुआ आगे बढ़ रहा है तो कोई हर-हर गंगे के जय उद्घोष के साथ संगम की ओर बढ़ रहा है। कंपकंपाती ठंड के बीच संगम में डुबकी लगाने के लिए लोग कई-कई किमी पैदल चलकर घाट तक पहुंच रहे हैं। 


विदेशियों की भागीदारी भी विशेष

महाकुंभ मेले में आए विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया व एशिया के विभिन्न देशों से आए श्रद्धालु भारतीय संस्कृति व आध्यात्मिकता से अभिभूत हो रहे हैं। गंगा किनारे योग, ध्यान और सत्संग में शामिल होकर वे आत्मशांति महसूस कर रहे हैं।

पग-पग जय जयकार...
144 वर्षों की प्रतीक्षा, अनन्य आस्था, अगाध भक्ति, हर्ष-उमंग और भावनाओं के उमड़ते ज्वार के बीच महाकुंभ लाखों श्रद्धालुओं के जप-तप और पुण्य-मोक्ष का मार्ग बनने के साथ ही एकता के सूत्र में पिरोने वाला माध्यम बन गया। मानवता के इस अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का साक्षी बनने, पुण्यों को साकार करने और मानव सभ्यता के सबसे बड़े विलक्षण क्षण का साक्षी बनने की होड़ नजर आई।

सियाराम जय राम, जय जय राम। गंगा मैया की जय। बोलो बजरंग बली की जय। ऐसे जयकारे महाकुंभ के मेला क्षेत्र में हर तरफ गूंज रहे हैं। अपनी आस्था के अनुसार जय-जयकार कर रहे हैं। कहीं साधुओं की टोली ढोलक की थाप पर रामधुन गा रही है, तो कहीं मंजीरे के साथ साधुओं की टोली भजन सुना रही है। लोग इन्हें अपनी आस्था के अनुसार दान भी कर रहे थे।

प्रथम अमृत स्नान पर सीएम योगी ने दी बधाई
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर महाकुंभ की तस्वीरें साझा की हैं और लिखा कि यह हमारी सनातन संस्कृति और आस्था का जीवंत स्वरूप है। आज आस्था के महापर्व 'मकर संक्रांति' के पावन अवसर पर महाकुंभ-2025, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर प्रथम अमृत स्नान कर पुण्य अर्जित करने वाले सभी श्रद्धालुओं को बधाई।
 

Saturday, January 11, 2025

डॉलर के मुकाबले क्यों गिर रहा रुपया, क्या आप पर भी पड़ेगा असर? जानें इसके फायदे और नुकसान


नई दिल्ली:
 अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। शुक्रवार, 10 जनवरी को रुपया 18 पैसे लुढ़क कर पहली बार 86.04 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 85.86 पर बंद हुआ था। भारतीय मुद्रा में लगातर गिरावट के बीच लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा यह है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया का वैल्यूएशन कम होने से आम जनता पर क्या असर पड़ेगा। आइए इसको समझने की कोशिश करते हैं।

सबसे पहले यह समझना होगा की अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत क्यों गिरता है। इसका जवाब यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये के कीमत में गिरावट के कई कारण हैं। जैसे कि-

  • विदेशी निवेशकों का पूंजी निकालकर भारत से बाहर जाना। इससे देश की करेंसी रुपये पर दबाव बढ़ाती है।
  • विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, विदेशों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और घरेलू शेयर बाजार नकारात्मक धारणा के कारण भी भारतीय मुद्रा पर दबाव पड़ा है।
  • अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को शपथ लेंगे। इसके बाद वह  व्यापार से जुड़े कई बदलाव कर सकते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी है जिस कारण रुपया कमजोर हुआ है।
  • फिलहाल भारत अन्य देशों से कच्चे तेल और सोने का आयात कर रहा है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है।
  • भारत का निर्यात अभी बहुत कम है। जब ज्यादा निर्यात होगा तो रुपये में तेजी आएगी। बहुत ज्यादा निर्यात न होने से भी रुपया कमजोर हो रहा है।

रुपये को स्थिर करने की कोशिश में RBI

रुपये की कीमत को स्थिर करने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) विदेश मुद्रा भंडार का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। रुपये की मांग स्थिर रखने के लिए आरबीआई ने डॉलर की सप्लाई बढ़ाई है। यही कारण है कि वर्तमान समय में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी देखी जा रही है। तीन जनवरी 2025 को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 5.7 बिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई है।

अब आते हैं मुख्य सवाल पर कि रुपये के गिरने से क्या असर पड़ता है। इसका जवाब ये हैं कि रुपये के गिरने का असर केवल सरकार पर ही नहीं बल्कि आम जनता पर पड़ता है। रुपया गिरने से आयात महंगा हो जाता है जबकि निर्यात सस्ता हो जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि सरकार को विदेशों से सामान खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। जैसे की तेल हो या सोना, इन चीजों की खरीदारी के लिए सरकार को अधिक पैसे चुकाने पड़ते हैं।

आम जनता पर पड़ता है असर

गौरतलब है कि भारत अपने कच्चे तेल का कुल 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत ने 87.7 फीसदी कच्चा तेल आयात किया था। वहीं इससे पिछले वर्ष में यह 87.4 फीसदी था। रुपया कमजोर होने पर कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर आम जनता पर महंगाई के रूप में पड़ता है।


रुपये में गिरावट से किसको फायदा ?

अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और रुपया गिरने से सबसे अधिक फायदा अमेरिका और उन देशों को होता है जो भारत को चीजें निर्यात करते हैं। चूंकि दुनिया के ज्यादातर देश अमेरिका डॉलर में कारोबार करते हैं। ऐसे में भारत के पास से अमेरिकी डॉलर कम होते जाते हैं। वहीं, अमेरिका में जॉब कर भारतीयों को भी इससे फायदा होता है। जब वे भारत आते हैं तो उन्हें डॉलर को रुपये में बदलना होता है। इससे पहले के मुकाबले ज्यादा वैल्यू में भारतीय करेंसी मिलती है।

Tuesday, January 7, 2025

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! फिर बढ़ेगा महंगाई भत्ता, सैलरी में आएगा उछाल, जानें DA Hike पर नया अपडेट

 


केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए खुशखबरी है। एक बार फिर महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की वृद्धि होने वाली है, जिसके बाद डीए बढ़कर 56 फीसदी हो जाएगा। यह अनुमान AICPI के जुलाई से अक्टूबर 2024 तक के आंकड़ों से लगाया गया है। हालांकि अभी नंवबर दिसंबर के अंक आना बाकी है, इसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी कि जनवरी 2025 से कितना महंगाई भत्ता बढ़ेगा।

दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा हर साल 2 बार केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दरों में संशोधन किया जाता है, जो अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करता है। यह वृद्धि हर साल जनवरी/जुलाई से की जाती है, जिसका ऐलान मार्च और अक्टूबर के आसपास होता है।साल 2024 की बात करें तो जनवरी 2024 से 4% तो जुलाई से 3% DA बढ़ाया गया था, जिसके बाद डीए 53% हो गया है, अब अगली वृद्धि जनवरी 2024 से होना है, जिसका ऐलान बजट 2025-26 के बाद होने की संभावना है।

DA Hike 2025: 3 या 4 फीसदी बढ़ेगा महंगाई भत्ता

  • वर्तमान में 48 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनरों को 53% डीए का लाभ मिल रहा है। अब अगला डीए जनवरी 2025 से बढ़ाया जाना है, जो कि AICPI इंडेक्स के जुलाई से दिसंबर 2024 के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
  • जुलाई से अक्टूबर तक के आंकड़ों पर गौर करें तो AICPI Index अंक 144.5 और DA स्कोर 55.05% पहुंच चुका है, ऐसे में डीए में 3% वृद्धि होना तय है, हालांकि अभी नवंबर दिसंबर के आंकड़े आना बाकी हैं।
  • आमतौर पर नवंबर के आंकड़े 31 दिसंबर 2024 को श्रम मंत्रालय द्वारा जारी कर दिए जाते है लेकिन इस बार देरी हुई है। उम्मीद है कि नवंबर दिसंबर के अंक अब एक साथ जनवरी में रिलीज किए जा सकते है।इसके बाद तय होगा डीए में कितने प्रतिशत वृद्धि होगी।

DA Hike : सैलरी पेंशन में होगी बड़ी वृद्धि

  • मौजूदा समय में जुलाई 2024 से केन्द्रीय कर्मचारियों पेंशनरों को 53% डीए का लाभ मिल रहा है। अनुमान है कि जनवरी 2025 से 3 से 4 फीसदी वृद्धि हो सकती है, जिसके बाद डीए 56 या 57 फीसदी तक पहुंच सकता है।इसका ऐलान मार्च में होली के आसपास होने की उम्मीद है।यह वृद्धि 7th Pay Commission के तहत की जाएगी।
  • उदाहरण के तौर पर, जिन कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18,000 रुपये है, उन्हें 3 फीसदी डीए बढ़ने पर 540 रुपये और 2,50,000 रुपये की अधिकतम सैलरी पाने वालों को 7,500 रुपये की बढ़ोतरी मिलेगी। पेंशनभोगियों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिनकी पेंशन में 270 से 3,750 रुपये तक का इजाफा हो सकता है।

ऐसे होती है महंगाई भत्ते की गणना

  • डीए और डीआर में बढ़ोतरी का कैलकुलेशन औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के 12 महीने के औसत में हुई प्रतिशत वृद्धि के आधार पर की जाती है। सरकार अमूमन हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को इन भत्तों में संशोधन करती है।
  • केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए DA ऐसा होता है कैलकुलेट- DA% = [(Average of AICPI (Base Year 2001 = 100) पिछले 12 महीने के लिए – 115.76)/115.76] x 100
  • पब्लिक सेक्टर कर्मचारियों के लिए DA ऐसा होता है कैलकुलेट- DA% = [(Average of AICPI (Base Year 2001 = 100) पिछले 3 महीने के लिए – 126.33)/126.33] x 100

Thursday, January 2, 2025

इजरायल का भारतीयों को खुला ऑफर, 16,000 को दी नौकरी, इजरायल सरकार ने भारतीय वर्कर्स की संख्या 50 हजार करने का लक्ष्य रखा है



नई दिल्ली. हमास के आतंकी हमले के बाद से इजरायल ने फिलिस्तीन पर जोरदार हमला किया है. इसके कारण वहां पर भारी अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया है. ऐसे में फिलिस्तीन के कामगारों की जगह भारत के कामगार लेने लगे हैं. इजरायल सरकार ने भारतीय वर्कर्स की संख्या 50 हजार करने का लक्ष्य रखा है. इजरायल दूतावास के मुताबिक हमास के साथ जंग के शुरू होने के बाद से 10 हजार से अधिक भारतीय कामगारों को काम मिला है. इजरायल-हमास युद्ध के बाद इजरायल में भारतीय कामगारों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी हुईं है और इन्हें सैलरी भी अधिक मिल रही है.


गौर करनेवाली बात है कि जंग के बाद पिछले एक साल में इजरायल में 10,000 हजार से अधिक भारतीय वर्कर बढ़े हैं. ये भारतीय कामगार फिलिस्तीन के वर्कर्स की जगह ले रहे हैं. 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के बाद इजरायल में फिलस्तीनी से आनेवाले कामगारों की जगह को धीरे-धीरे भारतीय वर्कर्स ने भरना शुरू कर दिया है. पिछले एक साल में इजरायल में काम करनेवाले भारतीय कामगारों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है. ये वर्कर इजरायल के कंस्ट्रक्शन उद्योग में ज्यादा काम कर रहे हैं और कृषि और दूसरे क्षेत्र में भी बढ़े हैं.


इजरायल के राजदूत ने बताई हकीकत
न्यूज 18 इंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में इजरायल के राजदूत रूविन अजार ने कहा है कि इजरायल का लक्ष्य भारतीय कामगारों की संख्या को 50 हजार तक पहुंचाने का है. उन्होंन कहा कि भारत की तुलना में इजरायल में काम करनेवाले भारतीय कामगारों को कम से कम तीन गुना ज्यादा सैलरी मिलती है और कइयों को तो इससे भी कहीं ज्यादा वेतन मिलता है. भारत और इजरायल के बीच हमास का युद्ध शुरू होने से पहले मार्च, 2023 में एक समझौते पर भारतीय वर्कर्स को लेकर हस्ताक्षर हुए थे. युद्ध के शुरू होने के बाद इजरायल में फिलिस्तीन के वर्कर्स की संख्या में भारी कमी हो गई और भारत और इजरायल के बीच समझौता भी युद्ध के बाद लागू हुआ. जिसका नतीजा ये रहा कि कंस्ट्रक्शन उद्योग में 16 हजार भारतीय पिछले एक साल में भारत से इजरायल गए हैं. इजरायल में निर्माण, कृषि और अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्र में मैन पॉवर की भारी जरूरत है और भारतीय वर्कर इस कमी को धीरे धीरे पूरा कर रहे हैं लेकिन अभी भी इजरायल को भारी संख्या में वर्कर्स की जरूरत है.

योगी आदित्यनाथ ने भी किया जिक्र
उत्तर प्रदेश विधानसभा में अभी हाल ही में योगी आदित्यनाथ ने भारतीयों के इजरायल में काम करने का जिक्र किया था. योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यूपी से 5600 कामगार इजरायल गए हैं. जिन्हें डेढ़ लाख रुपये वेतन मिलता है जबकि रहना और खाना फ्री है. गौरतलब है कि भारत और इजरायल के बीच समझौते के तहत बहुत सारे भारतीय वर्कर्स इजरायल जा रहे हैं और कुछ निजी कंपनियों के स्तर पर भी हैं. ऐसे में साफ है कि इजरायल में फिलिस्तीन के वर्कर्स की भारी कमी को पूरा करने में भारतीय वर्कर धीरे धीरे अपना योगदान दे रहे हैं और बदले में बड़ी सैलरी भी अपने घर भेज रहे हैं.

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