Monday, March 31, 2025

आप भी बना रहे हैं Ghibli image? भारी पड़ेगी लापरवाही! फोटो अपलोड करने से पहले पढ़ें ये खबर....


आजकल सोशल मीडिया पर एक नया क्रेज छाया हुआ है, घिबली स्टाइल में अपनी तस्वीरें बनाना. नेता हों या सेलिब्रिटी, हर कोई फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अपनी एआई-जनरेटेड घिबली स्टाइल वाली तस्वीरें खूब शेयर कर रहा है. लोग अपने और अपने बच्चों की इन तस्वीरों को खूब पसंद कर रहे हैं. इन एआई-जनरेटेड तस्वीरों का आकर्षण बेजोड़ है, लेकिन ये देखने में जितना मजेदार लगता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है.

लोग सिर्फ चैटजीपीटी ही नहीं, बल्कि कई एआई टूल्स का इस्तेमाल कर आकर्षक एआई-जनरेटेड तस्वीरें बना रहे हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है कि ये तस्वीरें कहां स्टोर हो रही हैं? क्या इस ट्रेंड का हिस्सा बनकर बिना सोचे-समझे एआई प्लेटफॉर्म्स पर अपनी तस्वीरें शेयर करना सुरक्षित है?

भारी पड़ सकती है लापरवाही!
एआई टेक्नोलॉजी को हल्के में लेने की भूल न करें. बिना सोचे समझे किसी भी एआई प्लेटफॉर्म पर तस्वीरें अपलोड करना आपको मुश्किल में डाल सकता है. कुछ समय पहले Clearview AI नाम की एक कंपनी पर बिना इजाजत सोशल मीडिया और न्यूज वेबसाइट्स से करीब 3 अरब से ज्यादा तस्वीरें चुराने का आरोप लगा था. यह डेटा प्राइवेट कंपनियों और पुलिस को बेचा गया.

यही नहीं, मई 2024 में ऑस्ट्रेलिया की Outabox कंपनी का डेटा लीक हुआ, जिसमें 10 लाख से ज्यादा लोगों के फेशियल स्कैन, ड्राइविंग लाइसेंस और पते चोरी हो गए. यह डेटा खुलेआम एक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया, जिससे हजारों लोग पहचान चोरी और साइबर धोखाधड़ी के शिकार हो गए.

आपके चेहरे से कोई और कमा रहा पैसा
अगर आपको लगता है कि एआई से अपनी तस्वीरें जनरेट करवाना केवल मनोरंजन के लिए है, तो आप गलत हैं. Statista की रिपोर्ट के अनुसार, फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का बाजार 2025 तक 5.73 बिलियन डॉलर और 2031 तक 14.55 बिलियन डॉलर का हो सकता है. इसका मतलब है कि कंपनियां आपके चेहरे को पहचानने और उसका उपयोग करने के लिए भारी निवेश कर रही हैं.

मेटा (फेसबुक) और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों पर आरोप लगते रहे हैं कि वे यूजर्स की तस्वीरों का उपयोग अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए करती हैं. PimEyes जैसी वेबसाइट्स किसी भी व्यक्ति की फोटो अपलोड करके उसकी पूरी डिजिटल उपस्थिति निकाल सकती हैं. इससे स्टॉकिंग, ब्लैकमेलिंग और साइबर क्राइम के मामले बढ़ सकते हैं. आपकी तस्वीर का इस्तेमाल आपकी जानकारी के बिना, गलत उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.

सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, हमें भी स्मार्ट बनना होगा
AI ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, लेकिन यह हमें अनजाने में बड़ी मुश्किलों में भी डाल सकता है. डेटा लीक, आइडेंटिटी चोरी और साइबर धोखाधड़ी जैसी समस्याओं से बचने के लिए हमें खुद सतर्क रहना होगा. सवाल यह नहीं है कि AI आपके लिए कितना फायदेमंद है, बल्कि यह है कि आप इसे कितनी समझदारी से इस्तेमाल कर रहे हैं. अगली बार जब आप किसी AI ऐप पर अपनी तस्वीर अपलोड करें, तो एक बार जरूर सोचें कि कहीं यह आपका सबसे बड़ा खतरा तो नहीं बन जाएगा?

कैसे बच सकते हैं आप?
  • सोशल मीडिया पर हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें अपलोड करने से बचें.
  • फेस अनलॉक की जगह मजबूत पासवर्ड या पिन का इस्तेमाल करें.
  • किसी अनजान ऐप को कैमरा एक्सेस न दें.
  • एआई-जनरेटेड इमेज ऐप्स की प्राइवेसी पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि वे आपकी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल न करें.
  • वाटरमार्क का इस्तेमाल करें

Saturday, March 22, 2025

AI Education: 6 साल का बच्चा भी बन जाएगा AI का मास्टर, चीन ने बना लिया टॉप लेवल का प्लान, जानिए वहां का स्कूल सिलेबस


भारत हो या अमेरिका, चीन.. एआई की बादशाहत हर जगह बढ़ रही है. ज्यादातर देशों में स्कूल स्तर पर ही एआई की पढ़ाई करवाई जा रही है. जहां भारत में क्लास 1 का बच्चा ए, बी, सी, डी.. क, ख, ग, घ, ड़.., कविताएं और कहानियां पढ़ता है, वहीं चीन में मात्र 6 साल की उम्र से बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पढ़ाना शुरू कर दिया जाता है (India vs China). चीन की राजधानी बीजिंग सहित कई क्षेत्रों में AI को अनिवार्य शिक्षा का हिस्सा बना दिया गया है.


चीन एआई के सेक्टर में बढ़त हासिल करना चाहता है. इसीलिए वहां कम उम्र से ही बच्चों को एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कॉन्सेप्ट सिखाने पर फोकस किया जा रहा है (Artificial Intelligence Education). इससे बच्चों की इस विषय में दिलचस्पी बढ़ेगी और वह आगे भी इसमें काम करने की इच्छा जताएंगे. जानिए चीन में किस क्लास से एआई की पढ़ाई शुरू हो जाती है और वहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सिलेबस क्या है.

AI Education in China: चीन में AI की पढ़ाई किस क्लास से शुरू होती है?
प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से): बीजिंग म्यूनिसिपल एजुकेशन कमीशन ने मार्च 2025 में एक घोषणा की थी. इसके अनुसार, सितंबर 2025 से शुरू होने वाले एकेडमिक सेशन में प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में AI की पढ़ाई अनिवार्य होगी. इसका मतलब है कि 6 साल की उम्र से ही बच्चे AI से परिचित होंगे.


माध्यमिक और उच्चतर स्तर: मिडिल स्कूल (कक्षा 7-9) और हाई स्कूल (कक्षा 10-12) में एआई को ज्यादा गहनता के साथ पढ़ाया जाता है.

School Syllabus in China: चीन के स्कूलों में एआई सिलेबस क्या है?
चीन में AI का सिलेबस उम्र और शिक्षा के स्तर के आधार पर अलग-अलग तैयार किया गया है. यह एनसीईआरटी जैसे इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क के बजाय टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर फोकस्ड है. बीजिंग और अन्य प्रांतों (जैसे झेजियांग, गुआंगझोउ) में लागू सिलेबस के आधार पर इसकी डिटेल देख सकते हैं:

1. प्राथमिक स्कूल (कक्षा 1-6, उम्र 6-12)
अवधि: प्रति वर्ष कम से कम 8 घंटे.
फोकस: बेसिक समझ और प्रैक्टिकल अनुभव.

सिलेबस:
AI का परिचय: AI क्या है, यह कैसे काम करता है (सरल उदाहरण जैसे स्मार्ट टॉयज, वॉयस असिस्टेंट).
हैंड्स-ऑन एक्टिविटी: रोबोटिक्स, लेगो प्रोग्रामिंग और सरल AI टूल्स का इस्तेमाल.
डिजिटल टूल्स: स्पीच रिकग्निशन और सिंथेसिस की बेसिक समझ.
एआई एथिक्स: AI का जिम्मेदारी से इस्तेमाल (उदाहरण: गोपनीयता, निष्पक्षता).
उद्देश्य: बच्चों को टेक्नोलॉदजी से परिचित कराना और उनकी जिज्ञासा बढ़ाना.

2. मिडिल स्कूल (कक्षा 7-9, उम्र 13-15)
अवधि: प्रति वर्ष 8-10 घंटे या इससे ज्यादा.
फोकस: AI का रोजमर्रा में इस्तेमाल और बेसिक कॉन्सेप्ट्स.

सिलेबस:
AI एप्लीकेशंस: स्कूल और दैनिक जीवन में AI का इस्तेमाल (जैसे चैटबॉट्स, स्मार्ट डिवाइस).
डेटा और एल्गोरिदम: डेटा का महत्व और सरल एल्गोरिदम की समझ.
प्रोग्रामिंग: बेसिक कोडिंग (पायथन या ब्लॉक-बेस्ड प्रोग्रामिंग जैसे Scratch).
प्रोजेक्ट्स: छोटे AI प्रोजेक्ट्स जैसे स्पीच-टू-टेक्स्ट मॉडल बनाना.
उद्देश्य: प्रैक्टिकल स्किल और तकनीकी नींव तैयार करना.

3. हाई स्कूल (कक्षा 10-12, उम्र 16-18)
अवधि: 36 घंटे (2 क्रेडिट कोर्स, 18 घंटे प्रति क्रेडिट).
फोकस: एडवांस्ड एप्लिकेशंस एंड इनोवेशंस.

सिलेबस:
AI का इतिहास और विकास: AI का अब तक का सफर और जरूरी माइलस्टोन्स.
एल्गोरिदम और डेटा स्ट्रक्चर: न्यूरल नेटवर्क्स, मशीन लर्निंग की बुनियाद.
प्रोग्रामिंग: पायथन में AI मॉडल बनाना (उदाहरण: सरल चैटबॉट या इमेज रिकग्निशन).
एथिक्स और सोसाइटी: AI के सामाजिक प्रभाव, डेटा प्राइवेसी और एथिक्स.
प्रोजेक्ट्स: जटिल AI सिस्टम डिजाइन करना, जैसे ऑटोनॉमस रोबोट या डेटा एनालिटिक्स टूल.
उद्देश्य: छात्रों को AI में करियर के लिए तैयार करना और इनोवेशन की क्षमता विकसित करना.


दुनिया में बजेगा चीन के एआई का डंका
शिक्षण विधि:

  • प्राइमरी में ‘हैंड्स-ऑन’ और खेल-आधारित सीखने पर जोर.
  • मिडिल और हाई स्कूल में प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग और कोडिंग.
  • शिक्षकों का प्रशिक्षण: STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) बैकग्राउंड वाले शिक्षकों को AI सिखाने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है.
  • पायलट प्रोजेक्ट्स: 2024 में, 184 स्कूलों को AI शिक्षा के लिए आधार बनाया गया, जो अब पूरे देश में मॉडल हैं.
  • उपकरण: Squirrel AI जैसे प्लेटफॉर्म और रोबोटिक्स किट्स का इस्तेमाल.
  • नैतिकता पर जोर: बच्चों को शुरू से AI के जिम्मेदार इस्तेमाल की शिक्षा दी जाती है.

Thursday, March 20, 2025

छात्रों के हित में CBSE का बड़ा कदम, खास हैंडबुक लॉन्च, करियर सिलेक्शन में मिलेगी मदद, अभिभावक करेंगे मार्गदर्शन


केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) छात्रों के हित में अक्सर बड़े फैसले लेता रहता है। अब पैरेंट्स के लिए हैंडबुक “भारत में स्कूल के बाद करियर पर अभिभावक” लॉन्च किया गया है। इस संसाधन सामग्री में 21 अलग-अलग वर्टिकल बुक्स शामिल हैं, जो एग्रीकल्चर, मास मीडिया, लॉ इत्यादि करियर ऑप्शन की जानकारी दी गई है। इसके अलावा एन्ट्रेंस एग्जाम 2025 से जुड़ी जानकारी भी इस हैंडबुक में दी गई है। इसे मोहित मंगल द्वारा लिखा गया है।

सीबीएसई ने इस संबंध में प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी किया है। साथ ही कैरियर के अवसरों के बारे में जानकारी पूर्ण चर्चा के लिए इन सामग्रियों का सही इस्तेमाल करने का अनुरोध भी किया है। इस नोटिस में हैंडबुक के लिंक भी साझा की गई है।

बोर्ड ने कही ये बात

बोर्ड ने नोटिस में कहा कि, “करियर मार्गदर्शन छात्रों को उनके भविष्य के बारे में सूचित निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लगातार विकसित और गतिशील जों मार्केट प्लेस में छात्रों को सार्थक करियर विकल्पों के लिए सही टूल्स और अंतर्दृष्टि से लैस करने के लिए स्कूलों, अभिभावकों और हितधारकों के बीच सहयोग जरूरी है। इस प्रयास के समर्थन के लिए सीबीएसई “भारत में स्कूल के बाद करियर पर अभिभावक” हैंडबुक शेयर कर रहा है।

हैंडबुक से कैसे होगा छात्रों को लाभ?

हैंडबुक का उद्देश्य छात्रों के लिए विभिन्न शैक्षणिक और व्यावसायिक मार्गों पर संरचित मार्गदर्शन प्रदान करना है। इस जरिए अभिभावक को अपने बच्चों को प्रभावी ढंग से करियर विकल्प तलाश में मदद कर पाएंगे। मूल्यांकन अंतर्दृष्टि और व्यावहारिक सलाह प्रदान कर पाएं।

बता दें कि सीबीएसई बोर्ड कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा समाप्त हो चुकी है। 12वीं की परीक्षा अप्रैल में खत्म होगी। एग्जाम होते ही छात्रों को भविष्य की चिंता सताती है। उनके पास करियर के कई विकल्प होते हैं, लेकिन समझ नहीं उनके लिए क्या सही रहेगा? ऐसी स्थिति में छात्रों को पैरेंट्स, शिक्षक और स्कूल के सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। ताकि उन्हें मार्गदर्शन के लिए इधर-उधर भटकना न पड़ें। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने यह हैंडबुक जारी की है।

Sunday, March 16, 2025

चिपको आंदोलन 2.0: उत्तराखंड में यहां पेड़ों से चिपक गई महिलाएं, सड़कों पर उतरे हजारों पर्यावरण प्रेमी



भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग चौड़ीकरण के नाम पर करीब 3300 पेड़ों को काटने के विरोध में दो-दो पद्मश्री, लोकगायिका समेत बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी सड़क पर उतर गए। पेड़ों से चिपक कर महिलाओं ने उनके रक्षा का संकल्प लिया और चिपको आंदोलन 2.0 शुरू करने का एलान किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।

ऋषिकेश से भानियावाला के बीच सड़क को फोरलेन किया जाना है। करीब 21 किमी के दायरे में 600 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ीकरण कार्य किया जाना है। चौड़ीकरण के दौरान करीब 3300 पेड़ भी कटान की जद में हैं। जिनका इन दिनों छंटाई कार्य चल रहा है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान की जद में आने पर पर्यावरणविदों व लोगों ने कड़ा आक्रोश जताया है।

रविवार को विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग सात मोड़ क्षेत्र में एकत्र हुए। पर्यावरणविदों का कहना था कि पिछले कुछ दशकों में, देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय असंतुलन तेजी से बढ़ा है। बढ़ते तापमान, घटते भूजल स्तर और खराब होती वायु गुणवत्ता लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं।



इन गंभीर संकेतों के बावजूद, बिना किसी दीर्घकालिक पर्यावरणीय योजना के बड़े-बड़े विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। उत्तराखंड के लोग लंबे समय से वनों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के विनाश का विरोध कर रहे हैं। लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सातमोड़ क्षेत्र में पेड़ों को रक्षा सूत्र बांध कर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। कहा कि यह चिपको आंदोलन 2.0 का आगाज है।

इन्होंने की भागेदारी
विरोध प्रदर्शन में ये रहे मौजूद
प्रमुख रूप से पद्मश्री डॉ. माधुरी बर्तवाल, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, लोकगायिका कमला देवी, इरा चौहान, अनूप नौटियाल, सूरज सिंह नेगी, नितिन मलेथा, इंद्रेश मैखुरी आदि

यह हैं प्रदर्शनकारियों की मांग
1. ऋषिकेश-जौलीग्रांट हाईवे परियोजना और इसके तहत 3,300 पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई जाए।
2. देहरादून और इसके आसपास के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में वनों के व्यावसायिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। भविष्य की सभी परियोजनाओं में सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।
3. देहरादून की पारंपरिक नहरों का संरक्षण और पुनरुद्धार किया जाए। ये नहरें भूजल रिचार्ज और अत्यधिक गर्मी के दौरान तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
4. देहरादून की प्रमुख नदियों (रिस्पना, बिंदाल और सौंग) को पुनर्जीवित किया जाए। इन्हें प्लास्टिक कचरे और अनुपचारित सीवेज से बचाया जाना चाहिए।
5. हरे भरे स्थानों को बढ़ावा देने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में आने वाली सभी नई आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में कम से कम 25% भूमि हरित क्षेत्र के लिए आरक्षित होनी चाहिए।
6. वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए।
7. 1980 के वन अधिनियम में संशोधन कर जंगलों में लगने वाली आग को रोकने के लिए प्रभावी रणनीतियां अपनाई जाएं।

Thursday, March 13, 2025

तमिलनाडु में क्या फिर भड़क रहा है हिंदी विरोधी आंदोलन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर क्यों मची है रार


हिंदी विरोधी भावना एक बार फिर तमिलनाडु में भड़क रही है.दरअसल तमिलनाडु सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)को राज्य में लागू नहीं किया है. उसका कहना है कि यह नीति हिंदी थोपने की कोशिश है.यह मामला सोमवार को संसद में भी उठा. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु की डीएमके सरकार वहां के छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है. उनके इस बयान का डीएमके सांसदों ने विरोध किया.उन्होंने प्रधान के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव दिया है. वहीं धर्मेंद्र प्रधान को अहंकारी बताते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि उन्हें अनुशासन सिखाने की जरूरत है.

तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन

एनईपी को लेकर तमिलनाडु में राजनीति पिछले काफी समय से चल रही है. राज्य में परिसीमन के साथ-साथ हिंदी विरोध का मुद्दा भी गरमाया हुआ है. तमिलनाडु का कहना है कि एनईपी के जरिए केंद्र सरकार उस पर हिंदी और संस्कृत थोपने की कोशिश कर रही है. हिंदी का विरोध तमिलनाडु के लिए नया नहीं है. तमिलनाडु में हिंदी का विरोध आजादी से पहले से चला आ रहा है. तमिल लोग अपनी भाषाई पहचान को दूसरे राज्य के लोगों की तुलना में अधिक गंभीरता से लेते हैं. तमिलनाडु में हिंदी विरोध की शुरुआत 1937 में हुई थी. उस समय हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के खिलाफ आंदोलन हुआ था. इसे हिंदी भाषा विरोधी आंदोलन के रूप में जाना जाता है. इससे पहले 1928 में मोतीलाल नेहरू ने हिंदी को भारत में सरकारी कामकाज की भाषा बनाने का प्रस्ताव रखा था. उनके इस प्रस्ताव का भी तमिल नेताओं ने भरपूर विरोध किया था.


हिंदी विरोधी भावना एक बार फिर तमिलनाडु में भड़क रही है.दरअसल तमिलनाडु सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)को राज्य में लागू नहीं किया है. उसका कहना है कि यह नीति हिंदी थोपने की कोशिश है.यह मामला सोमवार को संसद में भी उठा. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु की डीएमके सरकार वहां के छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है. उनके इस बयान का डीएमके सांसदों ने विरोध किया.उन्होंने प्रधान के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव दिया है. वहीं धर्मेंद्र प्रधान को अहंकारी बताते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि उन्हें अनुशासन सिखाने की जरूरत है.

तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन

एनईपी को लेकर तमिलनाडु में राजनीति पिछले काफी समय से चल रही है. राज्य में परिसीमन के साथ-साथ हिंदी विरोध का मुद्दा भी गरमाया हुआ है. तमिलनाडु का कहना है कि एनईपी के जरिए केंद्र सरकार उस पर हिंदी और संस्कृत थोपने की कोशिश कर रही है. हिंदी का विरोध तमिलनाडु के लिए नया नहीं है. तमिलनाडु में हिंदी का विरोध आजादी से पहले से चला आ रहा है. तमिल लोग अपनी भाषाई पहचान को दूसरे राज्य के लोगों की तुलना में अधिक गंभीरता से लेते हैं. तमिलनाडु में हिंदी विरोध की शुरुआत 1937 में हुई थी. उस समय हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के खिलाफ आंदोलन हुआ था. इसे हिंदी भाषा विरोधी आंदोलन के रूप में जाना जाता है. इससे पहले 1928 में मोतीलाल नेहरू ने हिंदी को भारत में सरकारी कामकाज की भाषा बनाने का प्रस्ताव रखा था. उनके इस प्रस्ताव का भी तमिल नेताओं ने भरपूर विरोध किया था.

बनाने का प्रस्ताव आया. इसे 26 जनवरी 1965 से लागू किया जाना था. इससे पहले तमिलनाडु में इसका विरोध शुरू हो गया. इस हिंदी विरोधी आंदोलन में पुलिस कार्रवाई और आत्मदाह की घटनाओं में करीब 70 लोगों की जान चली गई थी. इस दौरान रेलवे स्टेशन जला दिए गए. हिंदी में लिखे साइनबोर्ड तोड़ दिए गए.

हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने से पीछें क्यों हटी केंद्र सरकार

सीएन अन्नादुराई 26 जनवरी को सभी घरों की छत पर काला झंडा देखना चाहते थे.लेकिन गणतंत्र दिवस को देखते हुए घरों पर काला झंडा फहराने की तारीफ 25 जनवरी कर दी गई थी. उस दिन मदुरई में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुआ. कांग्रेस के ऑफिस के बाहर आठ लोगों को जिंदा जला दिया गया. तमिलनाडु में 25 जनवरी को 'बलिदान दिवस' के रूप में मनाया जाता है. इसे देखते हुए केंद्र सरकार को अपने कदम पीछे खिंचने पड़े. सरकार ने 1967 में भाषा नीति में संशोधन किया. इसमें अंग्रेजी को भी आधिकारिक भाषा के रूप में बनाए रखा गया.

तमिलनाडु ने 1968 से अपने दो-भाषा फॉर्मूले पर काम करना शुरू किया. इसमें तमिल के साथ-साथ अंग्रेजी में शिक्षा देने पर जोर दिया गया. तमिलनाडु में तमिल के साथ-साथ अंग्रेजी में शिक्षा दी जाती है. इसका असर यह हुआ है कि भारत में हुई साफ्टवेयर क्रांति दक्षिण में अधिक सफल हुई. अंग्रेजी के महत्व को अब दूसरे राज्यों ने भी पहचाना है. उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे ठेठ हिंदी भाषी राज्य में अब हर तरफ अंग्रेजी मीडियम के स्कूल दिखाई देते हैं

एनईपी और त्रिभाषा फार्मूला

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन भाषाओं में पठन-पाठन की नीति है. इसमें सरकार ने प्रस्तावित किया कि माध्यमिक स्तर तक हिंदी भाषी राज्यों में छात्र हिंदी और अंग्रेजी के अलावा दक्षिणी भाषाओं में से एक और गैर-हिंदी भाषी राज्यों में क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी के साथ हिंदी सीखें. राजीव गांधी सरकार में 1986 में बनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नरेंद्र मोदी सरकार में 2020 में बनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी यही फार्मूला है. साल 1986 की एनईपी के विपरीत 2020 की एनईपी में हिंदी का कोई उल्लेख नहीं है.इसमें कहा गया है कि बच्चों द्वारा सीखी जाने वाली तीन भाषाएं राज्यों, क्षेत्रों और निश्चित रूप से स्वयं छात्रों की पसंद की होंगी, बशर्ते कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं हों.हालांकि इसके बाद भी तमिलनाडु सरकार इसे हिंदी थोपने का प्रयास बता रही है.इसी को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार में ठन गई है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि अगर तमिलनाडु नई शिक्षा नीति को लागू नहीं करता है तो उनकी सरकार उसे समग्र शिक्षा अभियान के तहत वित्तीय मदद नहीं देगी. तमिलनाडु ने इसे ब्लैकमेलिंग बताया है.

Tuesday, March 11, 2025

भारत में स्कूल शिक्षा प्रणाली में ए.आई. का उपयोग और उसकी चुनौतियाँ

 भारत में स्कूल शिक्षा प्रणाली में ए.आई. का उपयोग



भारत में शिक्षा प्रणाली सदियों से विकसित होती आ रही है, लेकिन हाल के वर्षों में तकनीक के आगमन ने इसमें अभूतपूर्व परिवर्तन लाया है। विशेष रूप से, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) ने शिक्षा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। ए.आई. ने शिक्षकों, छात्रों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, व्यक्तिगत और उन्नत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में, जहां शिक्षा प्रणाली को प्रभावी बनाना एक चुनौती है, वहाँ ए.आई. एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभर रहा है।

भारत की शिक्षा प्रणाली और उसकी चुनौतियाँ

भारत की शिक्षा प्रणाली अभी भी कई पारंपरिक पद्धतियों पर निर्भर करती है, जिसमें कक्षाओं में शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जाना, पुस्तकों से ज्ञान अर्जन, और परीक्षा-आधारित मूल्यांकन प्रणाली शामिल हैं। हालांकि, यह प्रणाली कई चुनौतियों का सामना कर रही है:

  1. बढ़ती जनसंख्या और शिक्षकों की कमी – भारत में लाखों बच्चे आज भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं क्योंकि पर्याप्त शिक्षकों और संसाधनों की कमी है।

  2. व्यक्तिगत शिक्षा का अभाव – पारंपरिक कक्षाओं में एक शिक्षक कई छात्रों को एक साथ पढ़ाते हैं, जिससे हर छात्र की व्यक्तिगत जरूरतों पर ध्यान देना कठिन हो जाता है।

  3. तकनीकी संसाधनों की कमी – ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी अच्छी शिक्षा तक पहुंच नहीं है, जिससे डिजिटल और तकनीकी संसाधनों की कमी बनी हुई है।

  4. आधुनिक कौशल की आवश्यकता – 21वीं सदी के डिजिटल युग में, छात्रों को नई तकनीकों जैसे कि कोडिंग, डेटा साइंस और ए.आई. से परिचित कराना आवश्यक हो गया है।

ए.आई. का शिक्षा प्रणाली में योगदान

कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने शिक्षा प्रणाली को बदलने की क्षमता रखी है और कई क्षेत्रों में इसका प्रभाव देखा जा सकता है:

1. व्यक्तिगत शिक्षा (Personalized Learning)

ए.आई. आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म छात्रों के सीखने की गति, उनकी कमजोरियों और रुचियों के अनुसार पाठ्यक्रम को अनुकूलित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एडटेक कंपनियां जैसे कि BYJU'S और Vedantu ए.आई. तकनीकों का उपयोग कर रही हैं ताकि छात्रों को उनके सीखने के स्तर के अनुसार कंटेंट प्रदान किया जा सके।

2. स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लर्निंग

भारत में स्मार्ट क्लासरूम का चलन बढ़ रहा है, जहां ए.आई. आधारित सॉफ्टवेयर छात्रों को इंटरेक्टिव तरीके से पढ़ने में मदद कर रहे हैं। वर्चुअल रियलिटी (VR) और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) जैसी तकनीकें छात्रों को जटिल विषयों को आसानी से समझने में सहायता कर रही हैं।

3. स्वचालित मूल्यांकन और परीक्षा प्रणाली

पारंपरिक परीक्षा प्रणाली में समय और संसाधनों की खपत अधिक होती है, लेकिन ए.आई. आधारित परीक्षा प्रणाली, जैसे कि ऑनलाइन प्रॉक्टर्ड एग्जाम, स्वचालित मूल्यांकन और ग्रेडिंग सिस्टम इसे अधिक प्रभावी बना रहे हैं। ए.आई. आधारित चैटबॉट्स और डिजिटल असिस्टेंट परीक्षा संबंधी प्रश्नों का उत्तर देने में मदद कर सकते हैं।

4. शिक्षकों की सहायता

ए.आई. शिक्षकों को भी अधिक कुशल बनाने में सहायता कर सकता है। शिक्षकों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने, छात्रों की प्रगति को ट्रैक करने और कक्षा के वातावरण का विश्लेषण करने में ए.आई. आधारित टूल्स उपयोगी साबित हो रहे हैं। इससे शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों में समय बर्बाद करने के बजाय छात्रों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

5. भाषा अनुवाद और समावेशी शिक्षा

भारत में विभिन्न भाषाओं के चलते शिक्षा में भाषाई बाधाएँ आती हैं। ए.आई. आधारित भाषा अनुवाद टूल्स, जैसे कि Google Translate, छात्रों को उनकी मातृभाषा में सामग्री उपलब्ध कराने में सहायता कर सकते हैं, जिससे शिक्षा अधिक समावेशी बन सकती है।

6. कैरियर मार्गदर्शन और परामर्श

ए.आई. आधारित करियर गाइडेंस सिस्टम छात्रों के कौशल, रुचि और अकादमिक प्रदर्शन के आधार पर उन्हें सही करियर चुनने में मदद कर सकते हैं। यह सिस्टम छात्रों को उनकी संभावनाओं के अनुसार सही कॉलेज और कोर्स चुनने में सहायता कर सकता है।

भारत में ए.आई. शिक्षा के क्षेत्र में अपनाने की पहल

भारत सरकार और निजी संस्थान मिलकर ए.आई. को शिक्षा प्रणाली में लागू करने के लिए कई पहल कर रहे हैं:

  1. नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) – इसमें डिजिटल और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, जिसमें ए.आई. आधारित शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है।

  2. NITI Aayog का 'AI for All' कार्यक्रम – इस पहल के तहत ए.आई. को स्कूल स्तर पर सुलभ बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

  3. राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा वास्तुकला (NDEAR) – यह पहल डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है, जिसमें ए.आई. आधारित टूल्स का समावेश किया गया है।

  4. CBSE और IBM का सहयोग – CBSE ने IBM के साथ मिलकर स्कूलों में ए.आई. शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया है।

ए.आई. के उपयोग में संभावित चुनौतियाँ

हालांकि ए.आई. के शिक्षा प्रणाली में कई लाभ हैं, फिर भी कुछ प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं:

  1. तकनीकी पहुंच की समस्या – भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल डिवाइस की सीमित उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।

  2. डेटा गोपनीयता और नैतिकता – छात्रों के व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखने के लिए उचित साइबर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

  3. शिक्षकों का प्रशिक्षण – शिक्षकों को ए.आई. आधारित टूल्स का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।

  4. रोजगार पर प्रभाव – ए.आई. के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक शिक्षकों की भूमिका में परिवर्तन हो सकता है, जिससे कुछ नौकरियों पर प्रभाव पड़ सकता है।

निष्कर्ष

ए.आई. भारत की शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। यह छात्रों के लिए व्यक्तिगत और समावेशी शिक्षा प्रदान कर सकता है, शिक्षकों को अधिक प्रभावी बना सकता है और शिक्षा प्रणाली को अधिक कुशल और पारदर्शी बना सकता है। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक संसाधनों, नीति समर्थन और उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। यदि इन चुनौतियों से निपटा जाए, तो भारत में ए.आई. आधारित शिक्षा न केवल छात्रों को सशक्त बनाएगी, बल्कि देश के शैक्षणिक स्तर को भी वैश्विक मानकों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी।

Pakistan Train Hijack: पाक‍िस्‍तानी सेना का ऑपरेशन शुरू, जवानों को बचाने के ल‍िए उतरी आर्मी, जानें लेटेस्‍ट अपडेट


पाक‍िस्‍तान भी अजबगजब है. इस बार बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने पाक‍िस्‍तान की सबसे खास ट्रेन जाफर एक्सप्रेस पर कब्ज़ा कर लिया है और 400 यात्रियों को बंधक बना लिया है. बीएलए के प्रवक्ता ने बताया कि यह ऑपरेशन बीएलए मजीद ब्रिगेड फतेह स्क्वाड और एसटीओएस की ओर से चलाया जा रहा है. उधर, ट्रेन पर कब्‍जा होने की खबर जैसे ही पाक‍िस्‍तान की सरकार और आर्मी को मिली उनकी सांसें अटक गई हैं. बंधकों को रिहा कराने की कोश‍िशें हो रही हैं. 

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने एक बयान जारी कर कहा, ‘सभी आम नागरिकों को रिहा कर दिया है, जबकि 100 से अधिक पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बल के जवान उनकी हिरासत में हैं. यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है जो साबित करता है कि बलूचिस्तान में विद्रोह अब “निम्न-स्तरीय विद्रोह” नहीं रह गया है.’

बलूच ल‍िबरेशन आर्मी के हमले का एक और वीडियो सामने आया है. पाकिस्तानी सेना के हेलीकॉप्टर लगातार अपने जवानों को बचाने के लिए जद्दोजहद करते दिख रहे हैं. पाकिस्तानी जवानों की जान सूली पर अटकी हुई है.

बीएलए के लड़ाकों का जाफर एक्सप्रेस पर पूरा नियंत्रण है. बीएलए ने स्पष्ट किया है कि बंधकों में पाकिस्तानी सेना, पुलिस, आईएसआई और एटीएफ के सक्रिय-ड्यूटी कर्मी शामिल हैं, जो सभी छुट्टी पर यात्रा कर रहे थे. नागरिक यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बलूच नागरिकों को सुरक्षित रूप से रिहा कर दिया गया है और उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया गया है.

बीएलए ने आगे चेतावनी दी है कि यदि सैन्य हस्तक्षेप जारी रहा, तो सभी बंधकों को मार दिया जाएगा. ऑपरेशन का नेतृत्व मजीद ब्रिगेड, एसटीओएस, फतह स्क्वाड और बीएलए की जिराब यूनिट द्वारा किया जा रहा है और किसी भी सैन्य कार्रवाई का निर्णायक जवाब दिया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, 182 यात्री अभी भी बलूच ल‍िबरेशन आर्मी कब्‍जे में हैं. दावा क‍िया जा रहा है क‍ि बलूच लड़ाकों ने ट्रेन में आग लगा दी है. अगर ऐसा होता है तो कई लोगों के मारे जाने की बात सामने आएगी.


सूत्रों के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी ने ट्रेन में सवार मह‍िलाओं और बच्‍चों को छोड़ द‍िया है. लेकिन ट्रेन में सवार 100 से ज्‍यादा आर्मी के अफसरों और आईएसआई के अध‍िकाार‍ियों को कैद कर रखा है. उन्‍हें नहीं छोड़ना चाहते. सूत्रों के मुताबिक, सेना और बलूच‍ विद्रोह‍ियों के बीच संघर्ष में अब तक 11 जवान मारे जा चुके हैं.

पाक‍िस्‍तानी मीडिया रिपोर्ट में दावा क‍िया जा रहा है क‍ि बलूच विद्रोह‍ियों की गोलीबारी में पाक‍िस्‍तानी आर्मी के 6 जवानों की मौत हो चुकी है. ये जवान ट्रेन की सिक्‍योरिटी में तैनात बताए जा रहे हैं. बीएलए ने पाक‍िस्‍तान की सरकार को सीधी धमकी दी है क‍ि अगर उन पर अटैक करने की कोश‍िश की गई तो वे सभी बंधकों को मार डालेंगे.

पाक‍िस्‍तानी अखबार डॉन के मुताबिक, मंगलवार को बलूचिस्तान में पेशावर जाने वाली ट्रेन पर गोलीबारी की गई. इसके बाद तुरंत सेना को अलर्ट क‍िया गया. बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने कहा, क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस पर पेहरो कुनरी और गदलार के बीच भारी गोलीबारी की खबरें हैं. रेलवे नियंत्रक मुहम्मद काशिफ ने बताया कि नौ डिब्बों वाली इस ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे. लेकिन बलूच लिबरेशन आर्मी के जवानों का दावा है क‍ि उन्‍होंने पूरी ट्रेन पर कब्‍जा कर ल‍िया है.

सुरंग में बलूच‍ विद्रोह‍ियों ने रोकी ट्रेन
पाक‍िस्‍तान रेलवे के मुताबिक, ट्रेन जब सुरंग संख्या 8 से होकर गुजर रही थी, तभी हथियारबंद आतंक‍ियों ने ट्रेन को रोक ल‍िया. यात्रियों और कर्मचार‍ियों से अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है. अस्‍पतालों में आपातकाल लागू कर द‍िया गया है. एंबुलेंस और सुरक्षा बलों को उस इलाके की ओर रवाना क‍िया गया है. रिंद ने कहा कि चट्टानी इलाका होने के कारण अधिकारियों को घटनास्थल तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. रेलवे ने बचाव कार्य के लिए घटनास्थल पर और ट्रेनें भेज दी हैं.

Thursday, March 6, 2025

Haridwar: कॉरिडोर की तैयारी...हटेगा बस स्टैंड, जान्ह्वी मार्केट के प्रभावितों के लिए बनेगा कॉम्प्लेक्स


हरिद्वार कॉरिडोर को लेकर शासन का नजरिया और तैयार रुपरेखा का नजारा अब स्पष्ट होने लगा है। इसकी शुरुआत बृहस्पतिवार से तब हुई जब प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम ने डामकोठी पहुंचकर विभिन्न सगठनों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर निर्माण के संबंध में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए यह पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों और अन्य हितधारकों में कोई संशय न रहे इसके लिए उनके साथ स्पष्ट तौर पर वार्ता की जा रही है।

कॉरिडोर को लेकर बन रहे प्लान पर चर्चा करते हुए प्रमुख सचिव ने कहा कि इसके निर्माण में अपर रोड, बड़ा बाजार किसी भी स्थल को प्रभावित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल जाह्नवी मार्केट को हटाया जा रहा है। इसके अलावा वर्तमान में संचालित हो रहे बस स्टैंड की जगह पर कॉम्प्लेक्स बनाकर प्रभावित दुकानदारों, किरायेदारों को मालिकाना हक के साथ दुकान उपलब्ध कराने या नकद कैश का विकल्प दिया जाएगा।

किरायेदारों की ओर से मिले सुझावों के आधार पर संभावनाएं तलाशने के भी निर्देश प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को दिए। उन्होंने श्रीगंगा सभा के पदाधिकारियों को हरकी पैड़ी क्षेत्र के विकास एवं सौन्दर्यीकरण के लिए प्रस्तावित गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। श्रीगंगा सभा की ओर से दिए गए सुझावों को डीपीआर में शामिल करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।

सतीकुंड पर पांच देवियों की मूर्ति के बीच रखा जाएगा श्वेत कमल
प्रमुख सचिव ने बताया कि सतीकुण्ड के सौंदर्यीकरण के लिए पांच देवियों की मूर्तियों के बीच शक्ति के रूप में श्वेत कमल को रखा जाएगा। इसके अलावा सभी शक्तिपीठों के छोटे-छोटे स्वरूप लगाए जाएंगे। इन स्थलों का सौंदर्यीकरण परम्परागत शैली में किया जाएगा। उन्होंने व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों से वार्ता करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार से तोड़फोड़ नहीं होगी। किसी को भी उजाड़ा नहीं जाएगा, यदि किसी एक दुकान को हटाना पड़ता है तो शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनाकर दुकान देने के बाद ही आगे कार्य किया जाएगा।

चंडी देवी मंदिर के सामने आईएसबीटी में शिफ्ट होगा बस स्टैंड
कॉरिडोर की तैयार रूपरेखा के आधार पर प्रमुख सचिव ने कहा कि सती कुण्ड का सौंदर्यीकरण और विकास, हरकी पैड़ी का सौंदर्यीकरण और विस्तार कार्ययोजना में शामिल है। इसके अलावा रोडवेज बस अड्डे को शिफ्ट करके चंडी देवी मन्दिर के सामने आईएसबीटी व लॉजिस्टिक हब के लिए चिन्हित किया गया है। वहीं रोड़ीबेलवाला के विकास के लिए भी प्लान तैयार किया गया है। इस दौरान अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधि महंत ललितानन्द गिरी महाराज, महामंत्री श्रीगंगा सभा तन्मय वशिष्ट, जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल, नगर आयुक्त वरूण चौधरी, एचआरडीए उपाध्यक्ष अंशुल सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान, उप जिलाधिकारी अजयवीर सिंह आदि उपस्थित मौजूद रहे।

Monday, March 3, 2025

MP Board : व्हाट्सएप ग्रुप पर पेपर वायरल, जिला शिक्षा अधिकारी ने किया निलंबित, क्या परीक्षा निरस्त होगी अभी फैसला नहीं


MP Board : माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल की कक्षा 5वीं और कक्षा 8वीं की परीक्षाएं कल मंगलवार से शुरू हुई, लेकिन पहले ही दिन पेपर होने से इसकी गोपनीयता भंग हो गई, मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने एक प्राथमिक शिक्षक को निलंबित कर दिया, आदेश में कहा है कि इसी शिक्षक ने पेपर को लीक किया और उसे व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल किया।

एमपी बोर्ड की 5वीं और 8वीं की परीक्षा का पहला पेपर गणित का था, जो मंगलवार को हुआ, लेकिन कुछ जिलों में परीक्षा केंद्रों पर पेपर लीक होने की खबर सामने आई इसमें सागर, डिंडोरी, ग्वालियर और भोपाल शामिल हैं, लीक होने की सूचना के बाद प्रश्नपत्र वितरण प्रक्रिया को रोका गया और बाद में 15 मिनट की देरी से पेपर वितरित कर परीक्षा शुरू कराई गई।

प्राइमरी टीचर ने लीक किया पेपर  

उधर सागर जिले में व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल हुआ पेपर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो उन्होंने इसकी जाँच कराई और जाँच की सुई एक प्राथमिक शिक्षक पर जाकर रुक गई, शुरूआती जाँच में सामने आया कि इसी प्राथमिक शिक्षक ने परीक्षा की गोपनीयता भंग करते हुए पेपर को लीक कर वायरल किया है।

प्राथमिक शिक्षक तत्काल प्रभाव से निलंबित  

अपने आदेश में DEO ने लिखा –  जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केन्द्र सागर ने एक प्रतिवेदित किया है कि शासकीय प्राथमिक शाला बेरसला, विकास खण्ड सागर में पदस्थ पुरुषोत्तम पटेल प्राथमिक शिक्षक द्वारा 25 फरवरी को दोपहर में वार्षिक परीक्षा 2024-25 कक्षा 5 एवं 8वीं के प्रश्नपत्रों को व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल करते हुए परीक्षा की गोपनीयताभंग की गई। ये एक अपराध है इसलिए प्राथमिक शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उन्हें कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी राहतगढ पदस्थ किया जाता है।

Saturday, March 1, 2025

चमोली: हिमस्खलन से 46 लोग सुरक्षित रेस्क्यू, 4 की मौत.. 5 की तलाश जारी



चमोली: बद्रीनाथ धाम के माणा के आगे घस्तौली मार्ग ग्लेशियर के बाद से अब तक बचाव कार्य लगातार जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी घायलों का हाल जानने के लिए जोशीमठ के आर्मी हेलीपेड पहुंचे हैं। बचाव कार्य टीम ने अब तक कुल 50 मजदूरों को रेस्क्यू कर लिया है, लेकिन इनमें से 4 की मृत्यु हो गई है।

हिमस्खलन में फंसे लोगों बचाने के लिए आर्मी के जवान अपनी जान पर खेलते हुए जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं। बचाव कार्य क्षेत्र में सात से आठ फीट तक बर्फ जमी हुई है, लेकिन जवान बिना रुके इस विषम परिस्थिति में रेस्क्यू अभियान चला रहे हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव, पीआरओ डिफेंस देहरादून, ने जानकारी दी है कि अब तक 50 में से 23 श्रमिकों को जोशीमठ पहुंचाया जा चुका है। लेकिन इनमें से 4 घायलों की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है, अब 5 अन्य लोगों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बर्फबारी से सड़कें बाधित हैं, जिस कारण छह हेलिकॉप्टरों को मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किया गया है।



Visitor counter