Tuesday, April 29, 2025

NCERT Books: बच्चों की किताबों पर क्यों मचा है हंगामा? एक नहीं कई मुद्दे... एनसीईआरटी ने दिए सबके जवाब

7वीं की सोशल साइंस की किताब आने के बाद क्या मुद्दा बना?



NCERT Textbooks Latest Updates and Changes: एनसीईआरटी नई किताबें बाजार में उतार रहा है। इसी के साथ विवादों का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन इस बार मुद्दा कोई एक नहीं। क्लास 1 से लेकर 8 तक न्यू एनसीईआरटी बुक्स आ रही हैं और कई चीजों पर लोग आपत्ति जता रहे हैं। उठ रहे सवालों के जवाब खुद NCERT ने नवभारत टाइम्स से बातचीत में दिए हैं।

NCERT ने नये सेशन की किताबों जारी करना शुरू कर दिया है। अभी तक बाल वाटिका के साथ-साथ क्लास 1, 2, 3, 6 की नई एनसीईआरटी बुक्स पिछले सेशन में ही आ चुकी हैं। 2025-26 में चार और क्लासेज की नई किताबें तैयार की गई हैं। पहले NCERT की फाउंडेशनल से लेकर मिडिल क्लासेज की भाषाई पाठ्यपुस्तकों के नाम भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों और क्लासिकल रागों के नाम पर रखे जाने पर आपत्ति जताई गई। वहीं अब नई किताबों में पुरानी किताबों के कुछ संदर्भ न होने को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं।

Exploring Society: India and Beyond जारी की है। इसमें मुगलों व दिल्ली सल्तनत के संदर्भों को हटा दिया गया है। भारतीय राजवंशों पर चैप्टर, महाकुंभ का संदर्भ, मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, चार धाम, धार्मिक यात्राओं जैसी योजनाओं के बारे में बताया गया है।

क्लास 7 के लिए पाठ्यपुस्तक 'भारत और उससे आगे समाज की खोज' दो भागों में है। प्रत्येक छमाही के लिए एक-एक पार्ट है। पार्ट 1 अभी-अभी आया है और पार्ट 2 इस वर्ष के अंत में दूसरी छमाही के लिए समय पर आएगा। ये दोनों भाग विशेष रूप से कक्षा 7 के लिए हैं।


इस मसले पर एनसीईआरटी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पहले सातवीं की सोशल साइंस की 3 किताबें होती थीं। लेकिन अब सोशल साइंस की एक ही किताब है, जिसके दो पार्ट हैं। दूसरे पार्ट का इंतजार किए बिना इस तरह की तुलना ठीक नहीं है। 2005 में उस समय तैयार NCF के आधार पर नई किताबें आई थीं। जब भी नई किताबें आती हैं, तो पुरानी किताबों से उनकी तुलना करना ठीक नहीं होता है।

Wednesday, April 23, 2025

शिल्पा चौहान ने UPSC में हासिल की 188वीं रैंक, बनेंगी जौनसार की पहली महिला IAS

 देहरादून: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने बीते मंगलवार को सिविल सर्विसेज परीक्षा 2024 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया है। इस परीक्षा में उत्तराखंड की शिल्पा चौहान ने 188वीं रैंक हासिल की है। इस परीक्षा को पास करने के बाद अब शिल्पा चौहान जोनसार बावर की पहली महिला IAS बनेगी।



शिल्पा चौहान ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर UPSC की सिविल सर्विसेज परिक्षा 2024 में सफलता हासिल की है। 23 वर्षीय शिल्पा ने प्रथम प्रयास में ही UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाई है। उन्होंने इस परीक्षा में ऑल इंडिया स्तर पर 188वीं रैंक हासिल की है। शिल्पा ने इस परीक्षा को उतीर्ण कर एक नया इतिहास रचा है। शिल्पा अब जौनसार बावर की पहली महिला आईएएस अधिकारी बनेंगी। शिल्पा ने अपनी इस उपलब्धी से अपने परिजनों सहित पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

भारतीय सेना में तैनात हैं पिता

शिल्पा चौहान देहरादून जनपद के त्यूनी तहसील क्षेत्र में स्थित ग्राम शेडिया की मूल निवासी हैं। शिल्पा के पिता राजेंद्र सिंह चौहान भारतीय सेना में अपनी सेवा दे रहे हैं। वर्तमान में उनकी ड्यूटी दिल्ली में है। वहीं शिल्पा की माता संगीता चौहान गृहणी हैं। बेटी की इस उपलब्धि पर परिजनों में खुशी का माहौल छाया हुआ है।

क्षेत्रीय नेताओं ने दी बधाई

शिल्पा चौहान ने शेडिया गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। उसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करक ठियोग व बिलासपुर से कक्षा 10वीं और 12 वीं की शिक्षा पूरी की। शिल्पा ने डीएवी से ग्रेजुएशन करने के बाद दिल्ली में रहकर एक साल तक कोचिंग की। अब उन्होंने UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर परिजनों सहित पूरे क्षेत्र का नाम रौशन किया है। शिल्पा चौहान की इस उपलब्धी पर क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह, विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान आदि जनप्रतिनिधियों समेत कई क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई दी और साथ में उनके उज्जवल भविष्य की भी कामना भी की।

Monday, April 21, 2025

CBSE और NCERT सिलेबस में बड़ा बदलाव! अब छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स अनिवार्य, जानें क्या है bridge course

 CBSE New Syllabus: सीबीएसई और एनसीईआरटी ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से स्कूल पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तहत अब कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स अनिवार्य कर दिया गया है।



यह बदलाव छात्रों की समझ, दक्षता और विषयों के बीच की कड़ी को मजबूत बनाने के लिए किया जा रहा है। ब्रिज कोर्स का उद्देश्य छात्रों को पिछले कक्षा के अधिगम से जोड़ना है, जिससे उन्हें नए विषयों को समझने में सहूलियत हो। खासकर गणित, विज्ञान, भाषा और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में यह सेगमेंट पढ़ाई की नींव को और मजबूत करेगा।

CBSE New Syllabus: क्या है ब्रिज कोर्स?

ब्रिज कोर्स एक ऐसा लर्निंग सेगमेंट है जो नई कक्षा में दाखिले के बाद छात्रों को पिछली कक्षा के मूलभूत विषयों को दोहराने और समझने का अवसर देता है। यह बच्चों के माइंडसेट को नए पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार करता है।

सीबीएसई स्कूलों में मिल रहा प्रशिक्षण

सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों को नए पाठ्यक्रम को लेकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिक्षकों को यह बताया जा रहा है कि ब्रिज कोर्स को नियमित पढ़ाई का हिस्सा कैसे बनाया जाए।

क्या कहते हैं छात्र

बदलते पैटर्न को लेकर छात्रों में भी उत्सुकता है। रमेश साहू, अविनाश सक्सेना आदि छात्रों ने कहा कि ब्रिज कोर्स उन्हें कठिन विषयों को बेहतर समझने में मदद करेगा। वहीं शिक्षकों का कहना है कि इससे कमजोर छात्रों को अतिरिक्त सहारा मिलेगा।

एनसीईआरटी ने बदले किताबों के फॉर्मेट

इस साल कक्षा 3 और 6 की किताबों में बदलाव किया गया है। एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित नई किताबों में गतिविधि आधारित शिक्षा, जीवन कौशल और प्रोजेक्ट वर्क को प्रमुखता दी गई है। कक्षा 6 की विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की किताबों में कई इनोवेटिव एक्टिविटीज को शामिल किया गया है।

Saturday, April 19, 2025

उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में बोर्ड टॉपर अनुष्का ने जेईई मेंस में भी मारी बाजी, शिक्षा मंत्री का फोन आया तो खुशी से झूम उठी


उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में जीआईसी बड़ासी देहरादून की अनुष्का राणा ने 98.6 फीसदी अंक पाकर पूरे प्रदेश में टॉप किया है। इसके साथ ही उन्होंने नया रिकॉर्ड बनाया है। खास बात ये है कि बेटी अनुष्का ने जिस स्कूल से पढ़ाई कर टॉप किया हैं, पिता रामेंद्र राणा वहीं बड़ासी इंटर कॉलेज में भौतिकी विज्ञान के प्रवक्ता हैं और मां गृहिणी हैं। इसके अलावा अनुष्का ने जेईई मेंस में 98.8 परसेंटाइल हासिल कर बाजी मारी है।

मूल रूप से टिहरी गढ़वाल जिले के जामणीखाल क्षेत्र के भल्डियाना गांव की रहने वाली अनुष्का वर्तमान में देहरादून के जीईसी बड़ासी स्कूल की छात्रा हैं। दून के बंजारावाला में अपने परिवार के साथ रहने वाली अनुष्का ने अपनी सफलता का श्रेय अपने अभिभावकों और शिक्षकों को दिया है। बताया, परिवार में पढ़ाई का माहौल शुरू से ही रहा है।


अनुष्का भविष्य में डॉक्टर बन देश सेवा करना चाहती हैं। इसी के लिए अनुष्का ने बोर्ड परीक्षा के साथ जेईई मेंस की भी तैयारी की थी। वहीं अनुष्का के माता-पिता ने कहा, बेटी की इस सफलता पर उन्हें गर्व है। कहा, बेटी ने परिवार का नाम रोशन तो किया है साथ ही अपनी मेहनत से अन्य युवाओं को भी प्रेरित किया है। अनुष्का का एक बड़ा भाई भी है, जो इस समय आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।
 

शिक्षा मंत्री के फोन से टॉपर को चला पता

अनुष्का ने कहा, परिणाम देखने के लिए वह सुबह से फोन पर ऑनलाइन परिणाम देख रही थीं। लेकिन सर्वर व्यस्त होने और इंटरनेट ठीक से न चल पाने की वजह से उन्हें अपना रिजल्ट ही पता नहीं चला। लेकिन सुबह करीब 11 बजे शिक्षा निदेशालय से शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अनुष्का को फोन किया तो उन्हें पता चला कि 98.6 फीसदी अंक पाकर अनुष्का ने पूरे प्रदेश में टॉप किया है। इसके बाद तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा।

अंग्रेजी माध्यम से बेहतर हैं सरकारी विद्यालय

अनुष्का ने 10वीं तक की पढ़ाई दून के एक प्रसिद्ध स्कूल से की है। लेकिन पिता सरकारी विद्यालय में प्रवक्ता हैं, तो उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उत्तराखंड बोर्ड से संबद्ध विद्यालय से करनी चाही। अनुष्का ने कहा, अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय की तुलना में सरकारी विद्यालय बेहतर हैं। शिक्षक और पढ़ाई का माहौल भी कई गुना अच्छा है। बस इसके लिए छात्रों को लगन से पढ़ाई करनी होगी।


बेटी ने साबित किया सरकारी स्कूल से पढ़कर भी हासिल कर सकते हैं सफलता

अभिभावकों को संदेश देते हुए अनुष्का की मां कुमुद राणा ने कहा, अभिभावकों का यह सोचना कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल नहीं है, यह हमारे समाज का दुर्भाग्य है। लेकिन मेरी बेटी ने यह साबित कर दिया कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई कर भी बच्चे सफलता हासिल कर सकते हैं। बताया, बेटी ने जिसे निजी विद्यालय से 10वीं तक की पढ़ाई की वह घर के पास और शहर में मौजूद था। लेकिन, बेटी ने मन बनाया कि घर से 20 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर पढ़ाई करना चाहती है।

Thursday, April 10, 2025

बीएड का झंझट खत्म, अब इस परीक्षा से बन सकेंगे टीचर

 सरकारी से लेकर प्राइवेट स्कूलों में टीचर बनने के लिए बीएड डिग्री की मांग की जाती है. इसके बाद ग्रेजुएशन के बाद लिए छात्रों को कोर्स करना होता है. नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुसार बीएड कोर्स की मान्यता खत्म करने का फैसला लिया जा रहा है. बीएड डिग्री की जगह अब नया कोर्स लॉन्च किया जाने वाला है. कई बड़ी यूनिवर्सिटी में ये कोर्स शुरू भी हो चुका है.


What is BEd: क्या है बीएड कोर्स?

BEd का पूरा नाम बैचलर ऑफ एजुकेशन है. यह एक प्रोफेशनल ग्रेजुएशन प्रोग्राम है. टीचिंग के सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों को यह कोर्स ग्रेजुएशन के बाद करना होता है. बता दें कि इस कोर्स में पढ़ाने का तरीका और स्पेशल सब्जेक्ट की डिटेल नॉलेज होती है. नई शिक्षा नीति में अब इस कोर्स को बंद करने का फैसला लिया जा रहा है.

What is ITEP Course: क्या है आईटीईपी कोर्स?

टीचिंग सेक्टर को बेहतर बनाने के लिए नई शिक्षा नीति के तहत बीएड की जगह नया इंटीग्रेटेड प्रोग्राम लॉन्च हो चुका है. इस कोर्स का नाम इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) है. इसे नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन यानी (NCTE) की ओर से तैयार किया गया है. इसे हायर एजुकेशन सिस्टम में शामिल किया जा रहा है.

नई शिक्षा नीति के अनुसार, इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) कोर्स को स्कूल संरचना के आधार पर तैयारकिया गया है. इसमें शिक्षकों को बुनियादी, प्रारंभिक, मध्य और माध्यमिक चरणों के लिए तैयार किया जाएगा.

कितने साल का ITEP कोर्स?

आईटीईपी कोर्स चार साल की अवधि का होगा. इसमें 12वीं के बाद ही एडमिशन ले सकते हैं. इसे बीएड से अलग कोर्स बताया जा रहा है. बता दें कि आईटीईपी कोर्स कई बड़ी यूनिवर्सिटी में शुरू कर दिया गया है. इसे साल 2023 में ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के दो कॉलेजों में शुरू किया गया है.

Monday, April 7, 2025

AI Tools: पढ़ाई में चलेगा एआई का जादू, बच्चे बन जाएंगे सुपर स्मार्ट, टेक्निकल गुरु से मचेगी धूम


नई दिल्ली (AI Tools for Students). बच्चे हों या बड़े, इन दिनों हर कोई टेक सैवी बन चुका है. जहां बड़े ऑफिस के कामों के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, वहीं बच्चे पढ़ाई-लिखाई यानी होमवर्क और परीक्षा की तैयारी के लिए इनकी मदद लेने लगे हैं. स्टूडेंट्स के लिए उपयुक्त कई एआई टूल्स एकदम फ्री हैं. इनका इस्तेमाल करने के लिए किसी सब्सक्रिप्शन या पैसे जमा करने की जरूरत नहीं है. ये टूल्स बच्चों को ऑर्गनाइज़्ड, स्मार्ट और कॉन्फिडेंट बनाने में मदद करते हैं.



बच्चों के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल तभी उपयोगी है, जब उन्हें इसके फायदे और नुकसान, दोनों पता हों. इसके लिए जरूरी है कि पेरेंट्स भी उनके ऊपर थोड़ी नजर रखें (AI Tools Free for Students). एआई टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए कुछ गाइडलाइंस फॉलो करने से ही आप उसका भरपूर फायदा उठा पाएंगे. जानिए बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, होमवर्क और परीक्षा की तैयारी के लिए कौन से एआई टूल्स काम आ सकते हैं.

1. ChatGPT (OpenAI)
डिटेल: यह AI चैटबॉट सवालों के जवाब देता है और टेक्स्ट जेनरेट करता है. इससे इमेज भी जनरेट की जा सकती है.फायदे:
जटिल टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाता है.
निबंध लिखने, आइडिया जेनरेट करने और होमवर्क में मदद करता है.
24/7 उपलब्ध.
नुकसान:
कभी-कभी गलत या अधूरी जानकारी दे सकता है.
ज्यादा इस्तेमाल से सोचने की क्षमता कम हो सकती है.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
सवाल पूछें जैसे, ‘फोटोसिंथेसिस क्या है?’ या ‘इतिहास में 1857 की क्रांति समझाओ.’
जवाब को क्रॉस-चेक करें और अपनी भाषा में नोट्स बनाएं.


2. Grammarly
डिटेल: राइटिंग को बेहतर करने वाला AI टूल.फायदे:
ग्रामर, स्पेलिंग और लिखने के स्टाइल में सुधार करता है.
निबंध या असाइनमेंट को पॉलिश करता है.
नुकसान:
मुफ्त वर्जन में सीमित फीचर्स.
बहुत ज्यादा भरोसा करने से खुद की राइटिंग स्किल्स कमजोर हो सकती हैं.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
निबंध लिखने के बाद Grammarly में चेक करें.
सुझावों को समझें और अगली बार खुद सुधारने की कोशिश करें.

3. QuillBot
डिटेल: पैराफ्रेजिंग और समरी बनाने का टूल.फायदे:
टेक्स्ट को आसान भाषा में बदलता है.
लंबे नोट्स को छोटा करने में मदद करता है.
नुकसान:
कभी-कभी मूल अर्थ बदल सकता है.
प्रीमियम फीचर्स के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
किताब के कठिन पैराग्राफ को आसान करने के लिए यूज कर सकते हैं.
समरी बनाकर रिवीजन के लिए इस्तेमाल करें.

4. Khan Academy (AI फीचर्स के साथ)
डिटेल: फ्री ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म जो AI से पर्सनलाइज्ड सुझाव देता है.फायदे:
मैथ्स, साइंस जैसे सब्जेक्ट्स में स्टेप-बाय-स्टेप गाइड.
कमजोर टॉपिक्स पर फोकस करने में मदद.
नुकसान:
इंटरनेट कनेक्शन जरूरी.
सीमित सब्जेक्ट्स कवर करता है.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
आप जिन चैप्टर्स में कमजोर हैं, उनकी प्रैक्टिस करें.
क्विज़ सॉल्व करके अपनी प्रोग्रेस चेक करें.

5. Wolfram Alpha
डिटेल: मैथ्स और साइंस के सवाल हल करने वाला AI टूल.फायदे:
मुश्किल इक्वेशन और कैलकुलेशन आसानी से सॉल्व करता है.
स्टेप्स के साथ समझाता है.
नुकसान:
सिर्फ टेक्निकल सब्जेक्ट्स के लिए उपयोगी.
फ्री वर्जन में कुछ लिमिट्स.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
मैथ्स का सवाल टाइप करें, जैसे “x² + 5x + 6 = 0”.
स्टेप्स फॉलो करके कॉन्सेप्ट समझें.

6. Notion AI
डिटेल: नोट्स और टास्क मैनेजमेंट के लिए AI-पावर्ड टूल.
फायदे:
स्टडी शेड्यूल और नोट्स ऑर्गनाइज़ करता है.
राइटिंग में मदद और आइडिया जेनरेट करता है.
नुकसान:
शुरू में समझना थोड़ा मुश्किल.
कुछ फीचर्स पेड हैं.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
हफ्ते का स्टडी प्लान बनाएं.
नोट्स को टॉपिक के हिसाब से डिवाइड करें.

7. Duolingo (AI फीचर्स के साथ)
डिटेल: भाषा सीखने का AI-बेस्ड ऐप.फायदे:
गेम जैसा मजेदार अनुभव.
पर्सनलाइज्ड लेसन देता है.
नुकसान:
डीप नॉलेज के लिए काफी नहीं है.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
हर दिन 10-15 मिनट नई भाषा (जैसे अंग्रेजी या फ्रेंच) सीखें.
क्विज़ खेलकर प्रैक्टिस करें.

8. Tutor AI
डिटेल: पर्सनलाइज्ड ट्यूशन देने वाला AI टूल.फायदे:
किसी भी टॉपिक पर कोर्स जेनरेट करता है.
सवाल पूछने और क्विज़ लेने की सुविधा.
नुकसान:
फ्री प्लान में सीमित सवाल.
गहराई में जानकारी कम हो सकती है.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
टॉपिक डालें, जैसे ‘पाइथागोरस थ्योरम’.
लेसन पढ़ें और क्विज़ सॉल्व करें.

9. Sublime Text (AI प्लगइन्स के साथ)
डिटेल: कोडिंग सीखने और प्रैक्टिस के लिए AI-सपोर्टेड टूल.फायदे:
कोडिंग में गलतियां ढूंढकर सुधारने का सुझाव देता है.
प्रोग्रामिंग के बेसिक्स सीखने में मदद.
नुकसान:
टेक्निकल नॉलेज की जरूरत.
शुरुआत में मुश्किल लग सकता है.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
बेसिक कोड (जैसे HTML या Python) लिखें.
AI सुझावों से गलतियां सुधारें.

10. Canva (AI फीचर्स के साथ)
डिटेल: प्रेजेंटेशन और विजुअल्स बनाने का AI टूल.फायदे:
स्कूल प्रोजेक्ट्स के लिए आसान डिज़ाइन.
AI से ऑटोमैटिक लेआउट सुझाव.
नुकसान:
कुछ टेम्पलेट्स पेड हैं.
क्रिएटिविटी पर ज्यादा निर्भर.
बच्चे कैसे इस्तेमाल करें:
प्रोजेक्ट टॉपिक चुनकर डिज़ाइन शुरू करें.
AI टूल्स से बैकग्राउंड हटाएं या टेक्स्ट जोड़ें.

काम की बात
सही तरीके से इस्तेमाल: इन टूल्स का इस्तेमाल सिर्फ मदद के लिए करें, पूरे काम के लिए इन पर निर्भर न रहें. जैसे, ChatGPT से जवाब कॉपी करने के बजाय उसे समझें और अपने शब्दों में लिखें.

सीमित समय: रोजाना 1-2 घंटे से ज्यादा AI टूल्स पर न बिताएं, बाकी समय किताबों और प्रैक्टिस के लिए रिजर्व रखें.

सिक्योरिटी: इन टूल्स में किसी भी तरह की पर्सनल जानकारी (नाम, स्कूल का पता) न डालें. इनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

Wednesday, April 2, 2025

Ghibli Image का ट्रेंड खाली कर सकता है आपका बैंक अकाउंट ! एक क्लिक करने से लग सकता है लाखों रुपये का चूना


Ghibli Image का जादू इन दिनों सभी के सिर पर चढ़ा हुआ है। शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे इस बारे में पता न हो या जिसने अभी तक अपनी इमेज को Ghibli स्टूडियो आर्ट में न बदला हो। इसका क्रेज इस हद तक है कि इन इमेजेस को बनाने के लिए चैट जीपीटी पर इतना ट्रैफिक बढ़ा कि सर्वर ही डाउन हो गया। लोग अपनी अलग-अलग फोटोज को अपलोड करके, उनका Ghibli वर्जन बना रहे हैं। यूं तो इसे आप चैट जीपीटी के जरिए बना सकते हैं। लेकिन, इसके लिए कई एप्स और वेबसाइट भी आजकल ट्रेंड में हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि Ghibli इमेज को बनाने और सोशल मीडिया पर फ्लैक्स करने का यह मजा आपके लिए सजा बन सकता है। Ghibli Image बनाने के चक्कर में आप खुद साइबर फ्रॉड को इनवाइट करके अपना बैंक अकाउंट खाली करवा सकते हैं। इसलिए, जरा संभलिए वरना एक क्लिक से आपको लाखों का चूना लग सकता है। चलिए, आपको बताते हैं डिटेल्स।

Ghibli इमेज बनाने के सिक्योरिटी रिस्क को लेकर काफी बातें हो रही हैं। आपकी इमेज का किस तरह से इस्तेमाल हो रहा है, यह आप नहीं जानते हैं। इसलिए, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि यह आपका बैंक अकाउंट भी खाली कर सकता है। दरअसल, चैट जीपीटी के अलावा और भी कई वेबसाइट इस समय पर Ghibli इमेज बनाने का दावा कर रही हैं। कई बार आप एक वेबसाइट पर क्लिक करते हैं और फिर आपको किसी और लिंक पर भेज दिया जाता है। इस तरह दूसरी वेबसाइट्स पर जाना और टूल्स का इस्तेमाल करके Ghibli इमेज बनाना आपके लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। इन एप्स या वेबसाइट के ऑथेन्टिक होने को लेकर काफी सजग रहने की जरूरत है।

इस तरह की वेबसाइट पर अपने फोटोज और ईमेल लॉग इन जैसी डिटेल्स शेयर करके आप खुद को परेशानी में डाल सकते हैं। अगर आप किसी गलत लिंक पर क्लिक कर देंगे, तो इससे आपकी यूपीआई से पैसे भी ट्रांसफर किए जा सकते हैं। ऐसे में अगर आप अपनी Ghibli इमेज बना रहे हैं, तो किस सोर्स से बना रहे हैं, इसका पूरा ध्यान रखें।

क्या आपने Ghibli Image ट्रेंड को ट्राई किया, हमें जरूर बताएं। इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही,अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हर जिन्दगी के साथ।

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