Saturday, October 18, 2025

एनईपी 2020 की भावना के अनुरूप ‘कृति की अवधारणा’ पर डिजिटल कंटेंट विकास कार्यशाला – एससीईआरटी देहरादून में प्रारंभ

 


देहरादून, 13 अक्टूबर 2025 – राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों और दृष्टि के अनुरूप एनसीईआरटी पुस्तक “कृति की अवधारणा” पर आधारित डिजिटल कंटेंट विकास हेतु पाँच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ एससीईआरटी, देहरादून के कला विभाग में किया गया। यह कार्यशाला 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की जा रही है।

इस कार्यशाला में संगीत विषय के विशेषज्ञों, गायन एवं वादन के कलाकारों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। साथ ही एससीईआरटी के विशेषज्ञों ने भी सहभागिता कर राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (SCF)राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020)कौशल विकाससंज्ञानात्मक (Cognitive) विकासभावात्मक (Affective) विकास, तथा सांस्कृतिक विविधता जैसे महत्वपूर्ण आयामों को ध्यान में रखते हुए विषयवस्तु के अनुरूप संचार स्क्रिप्ट तैयार करने का कार्य प्रारंभ किया।

कार्यशाला का समन्वयन डॉ. ऊषा कटियार द्वारा किया जा रहा है। नीति की गहन समझ एवं दिशा प्रदान करने में सुनील भट्ट, डॉ. नन्द किशोर हटवाल, कमाक्षा मिश्रा, और डॉ. संजीव चेतन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

संगीत विशेषज्ञों में डॉ. हिमांशु जोशी, मनोज थापा, मिनी सोई, आशा भट्ट, पुष्पिंदर सिंह, और विक्रम जी ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। इन सभी प्रतिभागियों के संयुक्त प्रयास से संगीत शिक्षण को डिजिटल रूप में अधिक सजीव, रचनात्मक और सुलभ बनाने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।

यह डिजिटल कंटेंट न केवल संगीत शिक्षकों और शिक्षिकाओं के लिए उपयोगी होगा, बल्कि विद्यार्थियों में संगीत के प्रति रुचि और संवेदनशीलता विकसित करने में भी सहायक सिद्ध होगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में नैतिकता, मूल्य, संस्कार, और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा।

‘कृति की अवधारणा’ पर आधारित यह पहल संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयास है, जो नई शिक्षा नीति की उस भावना को मूर्त रूप देती है जिसमें ज्ञान, कौशल, और संवेदना का समन्वय सर्वोपरि है।

माध्यमिक स्तर के छात्रों हेतु करियर बुक सामग्री विकास कार्यशाला का शुभारंभ

 Dr Deepak Pratap Report

एस.सी.ई.आर.टी., उत्तराखंड, देहरादून में “माध्यमिक स्तर के छात्रों हेतु करियर बुक सामग्री विकास” विषय पर पाँच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ 13 अक्टूबर 2025 को हुआ। यह कार्यशाला 17 अक्टूबर तक आयोजित की जाएगी।

कार्यशाला में राज्य के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने प्रतिभाग के रूप में भाग लिया। कार्यशाला का समन्वयन  प्रिया गुसाईं द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ कार्यशाला के उद्देश्यों, प्रस्तावित करियर बुक की रूपरेखा तथा आगामी गतिविधियों की जानकारी साझा की।

इस अवसर पर सहायक निदेशक डॉ  के. एन. बिजल्वाण ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने करियर बुक में स्व-रोजगार से संबंधित सामग्री को भी शामिल करने पर बल दिया, ताकि छात्र केवल रोजगार पाने के लिए ही नहीं बल्कि रोजगार सृजन के लिए भी प्रेरित हों।

कार्यशाला के प्रथम दिवस में प्रतिभागियों ने माध्यमिक स्तर पर करियर मार्गदर्शन की आवश्यकता, विषयवार करियर विकल्प, तथा छात्रों के लिए उपयोगी स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

पहले दिन की कार्यवाही उत्साहपूर्ण रही और सभी प्रतिभागियों ने करियर शिक्षा को व्यवहारिक और प्रेरणादायक बनाने के सुझाव प्रस्तुत किए।

राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समागम ‘इंटर-डायट कल्चरल मीट कौथिग 2025’ का दो दिवसीय प्रोग्राम — उत्तराखंड की लोक संस्कृति के रंगों में रंगा SCERT सभागार

 

देहरादून, 13 अक्टूबर 2025।

देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समागम — इंटर-डायट कल्चरल मीट “कौथिग 2025” का दो दिवसीय आयोजन आज SCERT उत्तराखंड के सभागार में डायट देहरादून के तत्वावधान में आरंभ हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे मुख्य अतिथि विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, वंदना गर्ब्याल  ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया । उन्होंने अपने संबोधन में इस आयोजन की आवश्यकता एवं नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के साथ इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।


निदेशक, माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती ने अपने संदेश में प्रदेश के युवाओं से अपनी संस्कृति, लोककला और परंपराओं से गहराई से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में निर्णायक मण्डल के रूप में डॉ. माधुरी बर्थवाल, श्रीमती रेखा धस्माना, श्रीमती संगीता ढोंडियाल, श्री गिरीश सुनेरियाल एवं श्री अरुण जोशी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डायट देहरादून के प्रवक्ता  राम सिंह और  सुरेश चन्द्र पोखरियाल ने कुशलतापूर्वक किया। डायट प्राचार्य  हेमलता गौड़ ने सभी आगंतुकों एवं अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया।

कार्यक्रम के उद्देश्य और गतिविधियाँ

कार्यक्रम संयोजक राखी पांडेय ने बताया कि इस सांस्कृतिक समागम का उद्देश्य प्रदेश के भावी शिक्षकों को उत्तराखंड की गौरवशाली लोक परंपराओं से जोड़ना है, ताकि वे आने वाली पीढ़ियों तक लोककथाओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को पहुंचा सकें।

दो दिवसीय यह कार्यक्रम प्रदेश के सभी डायट्स के डी.एल.एड. प्रशिक्षुओं की सक्रिय भागीदारी से संपन्न हो रहा है। प्रशिक्षु पांच प्रमुख गतिविधियों — नृत्य नाटिका, पारंपरिक लोक नृत्य, बाल कविता, नाटक एवं वाद्य वादन में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।


उद्घाटन सत्र में सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। विभिन्न डायट्स की टीमों ने रामी बौराणी, जीतू बगड़वाल, माधव सिंह भंडारी और गंगा जैसी प्रसिद्ध लोकगाथाओं पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिकाएँ प्रस्तुत कीं।

भोजनावकाश के उपरांत कक्षा 3 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियाँ मंचित की गईं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करना रहा। इस वर्ष डायट देहरादून को इस राज्य स्तरीय आयोजन की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ है। अपर निदेशक परिषद पदमेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाए प्रेषित की । 

Visitor counter