Tuesday, November 14, 2023

पाकिस्तान में 7 महीने में भारत के 7 मोस्ट वॉन्टेड दुश्मनों का खात्मा, अब अगला नंबर किसका?

 


नई दिल्ली. पाकिस्तान (Pakistan) को आतंकी अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते रहे हैं. आतंकी पाकिस्‍तानी सेना (Pakistan Army) और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की मदद से अपनी टेरर एक्टिविटी चलाते रहे हैं, लेकिन बीते 7 महीनों में 7 बड़े आतंकियों की रहस्यमयी हत्‍याओं ने पूरा माहौल बदल कर रख दिया है. अब पाकिस्‍तानी सेना, आईएसआई और आतंकी संगठन खौफ में हैं. आतंकियों को यह डर सता रहा है कि क्‍या अगला नंबर उनका हो सकता है? बीते रविवार को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) प्रमुख मौलाना मसूद अज़हर के करीबी सहयोगी मौलाना रहीम उल्लाह तारिक की हत्या के बाद से आतंकियों ने अपनी सुरक्षा बढ़ा ली है.

पाकिस्‍तानी मीडिया के अनुसार भारत का मोस्‍ट वांटेड आतंकी रहीम उल्‍लाह तारिक पाकिस्‍तान से अपना नेटवर्क चला रहा था. भारत विरोधी एक्टिविटी और नफरत वाले भाषणों के लिए तारिक पाकिस्तान के गरीब इलाकों की यात्रा करता था. रविवार को भी वह भारत-विरोधी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कराची की एक विशाल झुग्गी बस्ती ओरंगी टाउनशिप जा रहा था; तभी दो अज्ञात हमलावरों ने उसे गोलियों से भून दिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो थी. इस घटना के पीछे जैश ए मोहम्‍मद की अंदरूनी कलह को भी एक कारण माना जा रहा है.

पाकिस्तान बिना सबूत भारत पर लगा रहा आरोप
पाकिस्‍तानी न्‍यूजपेपर डॉन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटना के लिए पाकिस्तान सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियों ने बिना किसी सबूत के भारत पर आरोप लगाया था, लेकिन वह स्वीकार करने में विफल है कि पाकिस्‍तान ने अपने गठन के बाद से आतंकवादियों का समर्थन करके जो बोया है, वही काट रहा है.

पिछले सात महीनों में पाकिस्तान में मारे गए मोस्‍ट वांटेड आतंकवादियों की सूची यहां दी गई है:

6 मई- परमजीत सिंह पंजवार: भारत के मोस्ट वांटेड अपराधियों में से एक और आतंकवादी संगठन खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के प्रमुख परमजीत सिंह पंजवार को अज्ञात हमलावरों ने उस समय गोली मार दी जब वह पाकिस्तान के लाहौर में टहलने के लिए निकला था. पंजवार को पाकिस्तानी सरकार की ओर से दो अंगरक्षक दिए गए थे. एक अंगरक्षक, एक हमलावर को मारने में कामयाब रहा जबकि दूसरा हमलावर गोलीबारी में घायल हो गया था.

12 सितंबर – मौलाना ज़िया-उर रहमान: लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का जिया-उर रहमान भी पंजवार की तरह ही मारा गया था. जब वह कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर के एक पार्क में टहलने के लिए निकला था, तभी अज्ञात हमलावर आए और उनके शरीर में कई राउंड गोलियां मार दीं.

30 सितंबर – मुफ्ती कैसर फारूक: लश्कर प्रमुख हाफिज सईद के करीबी फारूक को पाकिस्तान के कराची में गोली मार दी गई.

10 अक्टूबर – शाहिद लतीफ़: पठानकोट में भारतीय वायुसेना अड्डे पर 2016 में हुए हमले का मास्टरमाइंड जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी शाहिद लतीफ की पाकिस्तान के सियालकोट के दस्का शहर की एक मस्जिद में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. तीन नकाबपोश बंदूकधारी आए और आतंकवादी को उसके अंगरक्षकों की मौजूदगी में गोली मार दी. लतीफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत एक नामित आतंकवादी था और 2010 तक भारतीय जेल में बंद था.

7 नवंबर – ख्वाजा शाहिद: ख्वाजा शाहिद का बेजान और सिर कटा शरीर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मिला था. वह जम्मू-कश्मीर के सुंजुवान में भारतीय सेना शिविर पर 2018 के आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंडों में से एक था, जिसमें पांच भारतीय सेना के जवानों की मौत हो गई थी. मौत से पहले लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी को यातनाएं दी गई थीं. यह स्पष्ट नहीं है कि ख्वाजा शाहिद की हत्या किसने की.

10 नवंबर – अकरम गाज़ी: लश्कर के एक अन्य भर्तीकर्ता और कमांडर अकरम खान गाजी को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बाइक सवार हमलावरों ने गोली मार दी. पाकिस्तानी कानून प्रवर्तन ने भारत पर उंगली उठाने की कोशिश की है लेकिन पाकिस्तानी समाचार मीडिया आउटलेट्स का कहना है कि आतंकवादी समूह के गुटों के भीतर अंदरूनी कलह के कारण उनकी हत्या हुई.

12 नवंबर – रहीम उल्लाह तारिक: कराची में अज्ञात हमलावरों ने जैश प्रमुख के करीबी सहयोगी की गोली मारकर हत्या कर दी.

Saturday, September 9, 2023

Morocco Earthquake: मोरक्को में भूकंप ने मचाई भयंकर तबाही, मारे गए लोगों की संख्या 2000 के पार, सैकड़ों घर जमींदोज



मोरक्को में 8 सितंबर की रात को आए 6.8 तीव्रता के भूकंप (Morocco Earthquake) ने इस अफ्रीकी देश में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. इस प्राकृतिक आपदा के बाद मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अब तक 2000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. भूकंप आने के 48 घंटे बाद भी राहत एवं बचाव कार्य जारी है. मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. हजारों घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

मोरक्को में शुक्रवार देर रात आए भूकंप में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 2000 के पार चला गया है। भूकंप के चलते मोरक्को में भारी नुकसान हुआ है, जिससे उबरने में मोरक्को को लंबा समय लगेगा। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, मोरक्को में 6.8 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया। इस भूकंप का केंद्र माराकेश से 72 किलोमीटर दूर दक्षिण पश्चिम में था। मोरक्को सरकार ने बताया कि भूकंप में अभी तक 2012 लोगों की मौत हुई है और 2059 लोग घायल हैं। इनमें से 1404 लोगों की हालत गंभीर है। ऐसे में माना जा रहा है कि मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। 



अभी तक डरे हुए हैं लोग 
लोगों ने बताया कि मोरक्को के कासाब्लांका और राबत शहरों में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि वह लोग सो रहे थे, जब अचानक से उन्होंने दरवाजे बजने की आवाजें सुनीं। वह इससे घबरा गईं और तुरंत घर से बाहर निकल गईं। बताया जा रहा है कि बीते 120 सालों में यह उत्तर अफ्रीकी देश मोरक्को का सबसे तेज भूकंप था। 

तारोदांत राज्य के अल हौज में भूकंप का केंद्र था और वहीं पर सबसे ज्यादा लोगों की जान गई है। इसके अलावा क्वारजाते, चिचौआ, अजिलाल और यूसुफिया प्रांत के साथ ही माराकेश और अगादिर में भी लोगों की जान गई है। एक व्यक्ति ने बताया कि जैसे ही भूकंप आया, वैसे ही असहनीय चीख-पुकार मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे और भगदड़ सी मच गई। उस व्यक्ति ने बताया कि लोग अभी भी डरे हुए हैं और सड़कों पर सो रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई फुटेज वायरल हो रही हैं, जिनमें लोग बदहवास इधर-उधर भागते नजर आ रहे हैं। 

भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में लोग अभी भी सदमे में हैं। मोरक्को की सरकार ने बताया कि संसाधनों को इकट्ठा कर प्रभावित इलाकों में मदद भेजी गई है। लोगों से अपील की गई है कि वह रक्तदान करें। सेना ने फील्ड अस्पताल बनाकर लोगों का इलाज शुरू कर दिया है। मोरक्को में भूकंप से भारी नुकसान हुआ है लेकिन अभी तक इसका आकलन किया जा रहा है।

विदेशी नेताओं ने जताया दुख
विदेशी नेताओं ने भी मोरक्को में मारे गए लोगों के प्रति संवेदनाएं जाहिर की हैं। पीएम मोदी ने शनिवार को जी20 बैठक के दौरान ही मोरक्को के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की थी। अब अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी बयान जारी कर कहा है कि वह मोरक्को में भूकंप से हुए जान-माल के नुकसान से दुखी हैं और उन्होंने मोरक्को की सरकार को हरसंभव मदद की बात कही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी दुख व्यक्त किया है। पोप फ्रांसिस ने भी अपनी संवेदनाएं जाहिर की हैं। बता दें कि अल्जीरिया में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि वहां किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। 

Sunday, September 3, 2023

Chandrayaan-3:आराम पर प्रज्ञान, मिशन पर सूर्ययान, पढ़ें- 'सोने' से पहले चंद्रयान-3 ने क्या जानकारियां दीं

 


शिवशक्ति प्वाइंट पर रोवर और लैंडर दोनों के बीच 100 मीटर का फासला है. प्रज्ञान रोवर पर लगे दोनों पेलोड APXS और LIBS बंद कर दिए गए हैं. इन पेलोड ने जो डाटा जमा किया था, वो लैंडर के जरिए हम तक पहुंच गया है. एक ओर जहां भारत का चंद्रयान मिशन पूरा हुआ. वहीं भारत का एक और ऐसा मिशन शुरू हो गया, जिसको दुनिया ने हैरत के साथ देखा. भारत का आदित्य-L1 स्पेसक्राफ्ट सूर्य और पृथ्वी के बीच मौजूद L1 पॉइंट के 125 दिन के लंबे सफर के लिए निकल पड़ा है.

10 दिन तक चांद से जुड़े रहस्य सुलझाने की कोशिशों के बाद आखिर हमारा प्रज्ञान रोवर गहरी नींद में सो गया. चांद पर अब एक लंबी रात है और माइनस 200 के तापमान में प्रज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर का काम करना मुमकिन नहीं है, लेकिन स्लीप मोड में जाने से पहले रोवर और लैंडर ने कई ऐसी जानकारियां हमें दे दी हैं, जिनसे मानवता का भला हो सकता है.

14 जुलाई को भारत ने अपना मिशन चंद्रयान-3 लॉन्च किया था. 40 दिन का सफर पूरा करने के बाद 23 अगस्त को चंद्रयान चांद के साउथ पोल पर उतरा और भारत एक झटके में उन विकसित देशों की कतार में शुमार हो गया, जिन्होंने चांद पर अपने मिशन उतारने में कामयाबी हासिल की थी. 

Thursday, August 31, 2023

CBSE साल में दो बार आयोजित करेगा बोर्ड परीक्षाएं, कक्षा 11वीं, 12वीं के स्टूडेंट को पढ़ने होंगे 2 लैंग्वेज

 

CBSE Board Exam 2024: पिछले कुछ दिनों से बोर्ड परीक्षाएं 2024 सुर्खियों में हैं. दरअसल हाल ही में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्कूल एजुकेशन का नया नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) तैयार किया गया है. शिक्षा मंत्रालय के नए पाठ्यक्रम ढांचे के अनुसार, बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी, जिसमें छात्रों के पास सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाए रखने का विकल्प होगा, जबकि कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों को एक के बजाय दो भाषाओं का अध्ययन करना होगा. सीबीएसई, सीआईएससीई, यूपी, बिहार बोर्ड समेत तमाम स्टेट बोर्ड की बोर्ड परीक्षाएं भी अब से साल में दो बार आयोजित की जाएंगी. 


एनसीएफ की गाइडलाइंस के मुताबिक साल में दो बार होने वाली बोर्ड परीक्षाएं टर्म वाइज आयोजित नहीं की जाएंगी. जिस परीक्षा में स्टूडेंट के अच्छे मार्क्स होंगे, वहीं स्कोर मान्य होंगे. इसका मतलब है कि अब बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए स्टूडेंट को साल में दो मौके मिलेंगे. 


शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, नई शिक्षा नीति के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है और 2024 शैक्षणिक सत्र के लिए इसके आधार पर पाठ्यपुस्तकें विकसित की जाएंगी. अंतिम एनसीएफ (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा) दस्तावेज़ में कहा गया है, "कक्षा 11वीं और 12वीं में, छात्रों को दो भाषाओं को पढ़ना होगा और उनमें से एक भारतीय भाषा होनी चाहिए."


नए करिकुलम फ्रेमवर्क के तहत बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाने पर जोर दिया जाएगा. इसके तहत अब हल्का बोर्ड परीक्षएं महीनों की कोचिंग और रट्टा लगाने के बजाय विद्यार्थियों की समझ और दक्षता का आकलन किया जाएगा. यही नहीं कक्षा 11वीं और 12वीं में विद्यार्थियों को चयन आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स स्ट्रीम तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि स्टूडेंट को पसंद का विषय चुनने की पूरी आजादी होगी. 

एनसीएफ में कहा गया, "छात्रों को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर मिले यह सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में कम से कम दो बार बोर्ड परीक्षा की पेशकश की जाएगी. छात्र तब उन विषयों में बोर्ड परीक्षा दे सकते हैं जिन्हें उन्होंने पूरा कर लिया है और जिसके लिए वे तैयार महसूस करते हैं.''

Saturday, August 26, 2023

स्कूली शिक्षा: वर्तमान सदी और भारतीय परंपराओं के अनुरूप है राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा

 



केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की जो रूपरेखा (एनसीएफ) लॉन्च की है, उसमें उन सभी तत्वों को शामिल किया गया है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में प्रस्तावित किए गए थे। हर देश की तरह भारत भी यह चाहता है कि उसकी शिक्षा पद्धतियां यहां की संस्कृति और ज्ञान परंपरा से आलोकित हों और शिक्षा व्यवस्था की जड़ें देश की ज्ञानार्जन परंपरा से जुड़ी हों। गौरतलब है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था का ब्रिटिशकालीन अनुभव अच्छा नहीं रहा। इसका उद्देश्य एक वर्ग विशेष को फायदा पहुंचाना और अपने लिए लोग तैयार करना था। लेकिन जो नई रूपरेखा पेश की गई है, उसमें भारतीय शिक्षा व्यवस्था के पुराने अनुभवों और कमियों पर बेहतर ढंग से विचार किया गया है।


नई रूपरेखा में बच्चों पर पड़ने वाले तनाव पर खास ध्यान दिया गया है। पिछले काफी समय से स्कूली बच्चों पर पुस्तकों, पाठ्यक्रम और परीक्षा के बढ़ते भय को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं, जिनके समाधान के लिए एनसीएफ में प्रयास किए गए हैं। वर्ष में दो बार बोर्ड की परीक्षा और छात्रों के पास इन बोर्ड परीक्षाओं में से सर्वश्रेष्ठ अंक चुनने का विकल्प जैसे प्रावधान निश्चित ही बच्चों पर से पढ़ाई के बोझ को हल्का करेंगे। हालांकि इसके लिए स्कूलों और बोर्ड को अपना प्लेटफॉर्म तैयार करना होगा। बच्चे जब भी खुद को तैयार पाएंगे, वे अगली परीक्षा में भाग ले सकेंगे।

दरअसल, साल में एक बार होने वाली परीक्षा में बच्चों को अनेक दिक्कतें आती हैं। साल भर जो भी पढ़ा है, उसे कंठस्थ कर परीक्षा देने का तनाव हम सभी समझ सकते हैं। फिर यही तनाव कोचिंग व्यवस्था के पैदा होने की वजह बनता है और कोटा जैसे कोचिंग के गढ़ पैदा होते हैं। पिछले कुछ ही महीनों में कोटा में 20 से अधिक बच्चों के आत्महत्या कर लेने के मामले सामने आए हैं। पूरा देश ऐसी घटनाओं से शर्मसार होता है। बड़ा सवाल यह है कि ‘कोटा’ क्यों पनप रहा है?

स्कूलों को समझना होगा कि इसकी वजह वे खुद हैं। उनकी लचर व्यवस्थाओं के चलते ही बच्चे कोटा जाने की जरूरत महसूस करते हैं। मेरा सुझाव यह है कि इसके लिए गांवों के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाना होगा। प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति सुधारनी होगी। बच्चों को बचपन से ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मानसिक तौर पर तैयार करने की शुरुआत वहीं से करनी होगी। अच्छी बात यह है कि सरकार इसके लिए पूरी तरह से गंभीर है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने स्वयं कहा है कि अब विद्यार्थियों को कोचिंग व रटने के जंजालों से मुक्ति मिल सकेगी।

मैं 1962 से पढ़ा रहा हूं और कई स्कूलों को जानता हूं, जहां स्कूली शिक्षा के साथ प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा की सीख बच्चों को दी जा रही है और ऐसे बच्चे प्रतिस्पर्धाओं में सफल होेते हैं। लेकिन इसके लिए शिक्षकों को भी कमर कसनी होगी, ताकि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव बच्चों पर हावी न हो सके। एनसीएफ रूपरेखा में इन सभी बिंदुओं को संज्ञान में लिया गया है। हालांकि फिलहाल यह किस तरह से होगा, इस पर सीबीएसई और एनसीईआरटी से आगे जानकारी आएगी।

मुझे अपना एक अनुभव याद आता है, जब मैं 1982 में तत्कालीन सोवियत संघ गया था। वहां पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की अभिरुचि का खास ख्याल रखा जाता था। सरकार ने आवासीय स्कूल बनवाए थे, जिनमें सामान्य पढ़ाई के साथ बच्चों की अभिरुचियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। अगर यही पैटर्न भारत में अपनाया जाता है, तो इससे सरकारी स्कूल मजबूत बनेंगे। निजी स्कूलों का चलन कम होगा। इससे कोटा जैसे केंद्र हतोत्साहित किए जा सकेंगे और हर बच्चा देश की प्रगति में अपना योगदान दे सकेगा। हालांकि एनसीएफ में भी इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया गया है। इसमें नौवीं व 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है, ताकि छात्र स्वयं तय कर सकें कि उन्हें किस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना है।

अगले शैक्षणिक सत्र के लिए एनसीएफ गाइडलाइंस के अनुसार, पुस्तकें तैयार करने की जिम्मेदारी एनसीईआरटी को सौंपी गई है, जो तीसरी से बारहवीं कक्षा के लिए नए पाठ्यक्रम के अनुसार किताबें तैयार कर रही है। जो इस सारे परिवर्तन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पुनर्विचार करने की जरूरत है। एनसीएफ के दिशा-निर्देश सभी राज्यों की सहभागिता से तैयार हुए हैं। विभिन्न राज्यों में शिक्षा के क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों व सांविधानिक पदों पर बैठे विद्वानों की सलाहों को इसमें शामिल किया गया है।

शिक्षा को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। एनसीईआरटी स्थानिकता का महत्व समझती है। इसीलिए, वह पहले भी कहती रही है कि हर राज्य अपनी मातृभाषा में किताबें तैयार करे और उसमें स्थानीय पाठ्यक्रम/पाठ शामिल करे। अब अगर पर्यावरण पर कोई अध्याय है, तो उसकी विषय-वस्तु तिरुअनंतपुरम और त्रिपुरा में एक समान नहीं हो सकती। लेकिन स्तर एक होना चाहिए। देश के सभी शिक्षा बोर्ड एनसीईआरटी से जुड़े हैं। यह बेशक एक सलाहकारी निकाय है। लेकिन इसकी साख पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। एनसीएफ के दिशा-निर्देश देश की शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लाए गए हैं। इसलिए, आलोचना करने से पहले हम सभी को गंभीरतापूर्वक इन दिशा-निर्देशों का अध्ययन करना चाहिए।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा का अवलोकन करते हुए मुझे रवींद्रनाथ टैगोर का कथन याद आता है। उन्होंने कहा था कि हर बच्चे को बगैर किसी भेद-भाव के दो वरदान मिले होते हैं। पहला, विचारों की शक्ति और दूसरा, कल्पना की शक्ति। मैं इनमें दो तत्व और जोड़ना चाहता हूं, जिज्ञासा और सृजनात्मकता। जब इन चारों की अवहेलना होती है, तब शिक्षा व्यवस्था कुंठित हो जाती है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा में इन चारों पर ध्यान दिया गया है, ताकि ज्ञान समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता ‘नवाचार’ पूरी हो सके। लेकिन इनकी कामयाबी निर्भर करेगी शिक्षकों पर, जो कि सही मायनों में राष्ट्र-निर्माता हैं।

हमारी शिक्षा व्यवस्था की मूल आवश्यकता अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की है। इसे नैतिकता और मानवीय मूल्यों से जोड़ने की है। इसे गांधी के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के कल्याण तक ले जाने की है। 'वसुधैव कुटुंबकम' हमारी ज्ञान परंपरा का आधार रहा है और अच्छी बात है कि किताबों में 21वीं सदी की जरूरतों के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को खास तौर पर शामिल किया गया है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की जो रूपरेखा प्रस्तुत की है, वह इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करने की ओर उन्मुख है।
-शिक्षाविद और एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक

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