Sunday, June 23, 2024

पीएम मोदी बोले- आज का दिन गौरवमय, पहली बार नए संसद भवन में शपथ ग्रहण

 


18वीं लोकसभा के पहले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिन गौरवमय है। पहली बार नए संसद भवन में शपथग्रहण होगा। उन्होंने लोकसभा चुनाव को लेकर कहा कि इतिहास में ऐसा दूसरी बार है कि जनता ने किसी सरकार को लगातार तीसरी बार शासन करने का अवसर दिया है। ये मौका 60 साल बाद आया है। अगर जनता ने ऐसा फैसला किया है तो उसने सरकार नियत पर मुहर लगाई है। उसकी नीतियों पर मुहर लगाई है।

'भारतीय संसद के इतिहास में प्रोटेम स्पीकर कभी मुद्दा नहीं रहा'
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "मैंने सभी नेताओं से मुलाकात की है...सभी इस बात पर सहमत हैं कि भारतीय संसद के इतिहास में प्रोटेम स्पीकर कभी मुद्दा नहीं रहा और प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति मूल रूप से नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने और नए अध्यक्ष के चुनाव में मदद करने के लिए होती है..."

राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन 27 को
राष्ट्रपति मुर्मू बृहस्पतिवार 27 जून को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। इस दौरान वह नई सरकार की पांच साल की योजनाओं और प्राथमिकताओं को सामने रखेंगी। 28 जून और 1 जुलाई को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा होगी। 2 जुलाई को लोकसभा और 3 जुलाई को राज्यसभा में प्रधानमंत्री चर्चा का जवाब देंगे। इसके बाद दोनों सदन संक्षिप्त अवधि के लिए स्थगित किए जाएंगे। 22 जुलाई से फिर सत्र आरंभ होगा, जिसमें केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा।

महताब को राष्ट्रपति भवन में प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलाई जाएगी
राष्ट्रपति मुर्मू सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले महताब को राष्ट्रपति भवन में प्रोटेम अध्यक्ष पद की शपथ दिलाएंगी। इसके बाद महताब संसद भवन पहुंचकर 11 बजे से सदन का संचालन आरंभ करेंगे। कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट मौन रखने से होगी।

Thursday, June 20, 2024

NEET Exam : नीट परीक्षा रद्द कराने लायक खेल हुआ है बिहार में? तेजस्वी यादव से क्यों जुड़ा तार; जानें हर जवाब


नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने फरवरी में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कराई थी। पांच मई को परीक्षा हुई। रिजल्ट में नंबरों से लेकर ग्रेस मार्क्स तक का बवाल खूब हुआ। कई न्यायालयों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक बात गई और अब भी केस चल ही रहा है। इस बीच राजनीतिक दलों में भी उठापटक हो रही है। लेकिन, चौंका रहा है बिहार। परीक्षा के दिन से पूरे खेल पर नजर के बावजूद अब भी यहीं मामला फंसा है। इसके साथ ही चौंका रहा है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिला और पूर्व उप मुख्यमंत्री व बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का नाम। आगे पढ़ें, हर सवाल का जवाब...

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सबसे पहला सवाल, बिहार में अभी क्यों मचा है बवाल? 
बिहार में नीट परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक का फायदा उठाने वाला एक अभ्यर्थी अपनी मां के साथ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के गेस्ट हाउस में ठहरा था। एनएचएआई के गेस्ट हाउस की देखरेख बिहार सरकार का पथ निर्माण विभाग करता है। पथ निर्माण विभाग में इस अभ्यर्थी को बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आप्त सचिव प्रीतम कुमार ने ठहराया था। प्रीतम के मोबाइल नंबर से एक मई को पथ निर्माण विभाग के एक कर्मी प्रदीप कुमार को कॉल आया था। इसमें सिकंदर कुमार यादवेंदु के लिए कमरा बुक कराने को कहा गया। प्रदीप ने उस दिन तो कमरा बुक नहीं किया, लेकिन फिर चार मई को सुबह में प्रीतम के नंबर (7488061813) से दोबारा कॉल आया। इस बार भी सिकंदर कुमार यादवेंदु के लिए कमरा बुक कराने कहा गया। इस बार प्रदीप ने गेस्ट हाउस बुकिंग के लिए कनीय अभियंता को उसने मैसेज कर दिया। इस कमरे में सिकंदर कुमार यादवेंदु का रिश्तेदार और नीट का अभ्यर्थी अनुराग यादव अपनी मां के साथ यहां ठहरा था। बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गेस्ट हाउस बुकिंग में शामिल रहे पथ निर्माण विभाग के तीन कर्मियों को निलंबित करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है, क्योंकि उन्होंने इस विभाग के पूर्व मंत्री तेजस्वी यादव के आप्त सचिव के कॉल पर और तेजस्वी यादव को ‘मंत्रीजी’ के रूप में चिह्नित करते हुए कमरा बुक किया था।

सिर्फ अभ्यर्थी के ठहरने पर ही मचा है हंगामा?
अभ्यर्थी अनुराग यादव के लिए कमरा बुक कराते समय सिकंदर कुमार यादवेंदु के नाम का जिक्र आया है और नीट परीक्षा 2024 के पेपर लीक में इस शख्स को सरगना के रूप में गिरफ्तार किया जा चुका है। ठेकेदार से बिहार सरकार में जूनियर इंजीनियर बने सिकंदर यादव की संलिप्ता नीट पेपर लीक में न केवल सामने आयी है, बल्कि अबतक गिरफ्तार अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने लिखित तौर पर उसकी भूमिका भी बताई है।

सिकंदर की गिरफ्तारी कितनी महत्वपूर्ण है?
पांच मई को जब परीक्षा हो रही थी, तब केंद्रीय एजेंसी के इनपुट पर देशभर में छापेमारी हो रही थी। ऐसी ही एक छापेमारी बिहार में भी हुई। पटना में बिहार पुलिस के पास यह जानकारी आई थी कि एक डस्टर गाड़ी से नीट परीक्षा के कदाचार हो रहा है। इस गाड़ी पर ‘दानापुर नगर प्रशासन’ का प्लेट लगा हुआ था। इस गाड़ी के साथ बिहार सरकार में जूनियर इंजीनियर सिकंदर कुमार यादवेंदु को 5 मई को ही दोपहर करीब दो बजे पकड़ा गया था। इस गाड़ी में उस समय यादवेंदु के अलावा ड्राइवर और एक नीट अभ्यर्थी के पिता को बैठा हुआ पाया गया था। सिकंदर के पास मिली एक कॉपी में नीट परीक्षा के कुछ अभ्यर्थियों का नंबर था। पूछताछ में उसने बताया कि वह उसके रिश्तेदार अभ्यर्थियों का है। इसमें से एक अभ्यर्थी आयुष को बिहार पुलिस ने परीक्षा खत्म होते ही पटना के एक स्कूल स्थित परीक्षा केंद्र से पकड़ा। शाम करीब 5:20 में जब उसे पकड़ा गया तो उसने कबूल लिया- “सिकंदर अंकल ने रात में पटना के खेमनीचक में उसे और कुछ अभ्यर्थियों को ठहराया था। वहीं प्रश्नपत्र में दिया उत्तर रटाया गया, जो नीट के पेपर में आया था।”

सिर्फ पूछताछ ही हुई या कुछ प्रमाण भी मिला?
सिकंदर से आयुष तक पहुंचने के बाद पुलिस खेमनीचक में उस जगह तक भी पहुंची। यहां कोविड के दौरान बंद पड़ चुके लर्न एंड प्ले स्कूल में चार तारीख की रात इन्हें उत्तर रटाए गए थे। इसकी बिल्डिंग के छत पर जले हुए कागज मिले। यह और कुछ नहीं, बल्कि नीट के प्रश्नपत्र थे। इसके साथ ही सिकंदर यादवेंदु की निशानदेही पर कुल 13 लोगों को पकड़ा गया। इसमें उसका साथ देने वाले छह परीक्षा माफिया, चार परीक्षार्थी और तीन अभिभावक थे। अभिभावकों में एक सिकंदर की सलहज थी, जो अपने बेटे नीट अभ्यर्थी अनुराग यादव के साथ एनएचएआई के गेस्ट हाउस में ठहरी थी।

जले हुए प्रश्नपत्र ही थे, यह कैसे प्रमाणित होगा?
माफिया की निशानदेही पर जिन अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हुई, उन्होंने बयान और पुनर्बयान में स्वीकार किया है कि उन्हें प्रश्नों के उत्तर रटाए गए थे और वही परीक्षा में सवाल भी आए। प्रश्नपत्र के जले हिस्से भी मिल गए। लेकिन, इससे प्रमाणित होना मुश्किल होता। लेकिन बिहार पुलिस से जब यह मामला आर्थिक अपराध इकाई के पास आया तो उसने जलने से बचे टुकड़ों को जोड़कर प्रश्नपत्रों में से 74 प्रश्न निकाले। इसके साथ ही प्रश्न का एक बुकलेट नंबर भी। 10 मई को आर्थिक अपराध इकाई ने यह केस हाथ में लिया और उसके बाद 21 मई से अबतक तीन बार उसने इस बुकलेट नंबर के मिलान के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से सारे प्रश्न बुकलेट की मांग की, लेकिन उसे अबतक यह नहीं मिला है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी असहयोग कर रहा है?
परीक्षा लेने की जिम्मेदारी एनटीए की थी और जब लीक प्रश्नों के टुकड़े के साथ बुकलेट की जानकारी आर्थिक अपराध इकाई बिहार के पास है तो सभी बुकलेट नहीं भेजना असहयोग ही माना जाएगा। सहयोग के नाम पर एनटीए ने इतना ही किया कि इस पेपर लीक का लाभ उठाने वाले 11 अभ्यर्थियों के मिलान में आर्थिक अपराध इकाई को उनसे जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई है। 

सीएम नीतीश कुमार के नालंदा का जिक्र क्यों आ रहा?
कांग्रेस के नंबर वन नेता राहुल गांधी नीट परीक्षा में पेपर लीक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया है। इधर, भाजपा परीक्षा माफिया के तेजस्वी यादव से संबंध को लेकर हमलावर है। तीसरी बात राजद की ओर से निकल कर आ रही है। राजद नेताओं का कहना है कि इस परीक्षा के भी ज्यादातर माफिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से हैं। दरअसल, सिकंदर यादवेंदु तो समस्तीपुर के बिथान का है, लेकिन इस केस का अहम किरदार संजीव मुखिया फरार है। वह नालंदा का है। इस रैकेट में शामिल और गिरफ्तार रॉकी, पिंटू, चिंटू भी नालंदा के हैं। एक और गिरफ्तार माफिया नीतीश गया का रहने वाला है, जिसने गिरफ्तारी से पहले मोबाइल फॉर्मेट कर जांच को बाधित करने में पूरी ताकत झोंक दी।

क्या हो सकता है और किस हालत में?
अगर एनटीए ने प्रश्नपत्र का बुकलेट दे दिया और उस बुकलेट का मिलान आर्थिक अपराध इकाई बिहार जले हुए कागजातों में मिले बुकलेट से कर लेती है तो सिर्फ औपचारिकता बचेगी नीट परीक्षा के पेपर लीक की पुष्टि में। इस एक आधार पर परीक्षा को रद्द करना पड़ जाएगा, क्योंकि बाकी प्रमाण और बयान उपलब्ध हैं।

Friday, June 14, 2024

अयोध्या के राम मंदिर को उड़ाने की धमकी, जैश-ए-मोहम्मद का ऑडियो वायरल होने के बाद अलर्ट जारी


 

अयोध्या के राम मंदिर को उड़ाने की एक बार फिर धमकी मिली है। इस बार धमकी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने दी है। इसका एक ऑडियो वायरल होने के बाद यूपी की योगी सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है।

अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर को उड़ाने की एक बार फिर धमकी मिली है। इस बार धमकी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने दी है। इसका एक ऑडियो वायरल होने के बाद यूपी की योगी सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है। राम नगरी में तैनात सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। अलर्ट के बाद अयोध्या में रामकोट के सभी बैरियरों पर सघन चेकिंग अभियान के साथ जांच शुरू कर दी गई है। रामलला के दर्शन मार्ग पर भी श्रद्धालुओं की निगरानी बढ़ा दी गई है। बताया जाता है कि धमकी वाले ऑडियो में आमिर नामक जैश-ए-मोहम्मद आतंकी को कहते सुना जा रहा है कि हमारी मस्जिद को हटाकर मंदिर बनाया गया है। अब इसे बम से उड़ा दिया जाएगा। आतंकी कह रहा है कि हमारे तीन साथी कुर्बान हुए हैं और अब इस मंदिर को गिराना ही होगा। अलर्ट के साथ ही सुरक्षा एजेंसियां ऑडियो की जांच कर रही हैं। राज्य सरकार की तरफ से निर्देश के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार की सभी एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

अयोध्या के राम मंदिर पर हमले की धमकी इससे पहले भी दो तीन बार मिल चुकी है। पिछले साल भी धमकी मिली थी। हालांकि तब फर्जी निकली थी। इससे पहले 2005 में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने यहां हमला भी किया था। अब एक बार फिर जैश-ए-मोहम्मद के नाम से अयोध्या में आतंकी हमले का ऑडियो वायरल हुआ तो सतर्कता तत्काल बढ़ा दी गई है।

Wednesday, June 12, 2024

Kuwait Fire: अग्निकांड में मृतकों का आंकड़ा 49 तक पहुंचा, 41 भारतीयों के मरने की खबर; PM ने आपात बैठक बुलाई

 


कुवैत में एक इमारत में भीषण आग लग गई। इस हादसे में कम से कम 49 लोगों की मौत हो गई, जिनमें  41 भारतीयों की मौत की खबर है।  इसके अलावा इस हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार सुबह कुवैत के दक्षिणी अहमदी प्रांत के मंगफ इलाके में छह मंजिला इमारत की रसोई में आग लग गई थी। जिस इमारत में यह भीषण आग लगी, उसमें 190 से अधिक लोग रहते थे। सभी एक ही संस्थान में काम करते थे।

‘मृतकों में अधिकांश भारतीय नागरिक’
कुवैत के फॉरेंसिक विभाग के महानिदेशक मेजर जनरल ईद अल-ओवैहान का कहना है कि मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। उन्होंने बताया कि मृतकों में से अधिकांश केरल, तमिलनाडु और उत्तर भारतीय राज्यों के नागरिक थे। मृतकों की उम्र 20 से 50 साल के बीच बताई गई है।



भारतीय दूतावास ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने इसे लेकर हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। दूतावास का कहना है कि इस अग्निकांड में भारतीयों की मौत के संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए +965-65505246 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। दूतावास की तरफ से हर संभव मदद का एलान किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक प्रकट किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुवैत में हुए अग्निकांड पर शोक प्रकट किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा ‘कुवैत में आग की दुर्घटना दुखद है। मेरी संवेदनाएं उन सभी के साथ हैं, जिन्होंने अपने परिजनों को खो दिया है। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। कुवैत में भारतीय दूतावास द्वारा इस घटना पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।’

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जताया दुख
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा ‘कुवैत में आग की घटना से आहत हूं। इस घटना में 40 लोगों की मौत और 50 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की खबर है। हमारे राजदूत शिविर में गये हैं। हम आगे की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।’ विदेश मंत्री ने इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने आशा जताई है कि जो लोग घायल हुए हैं वे जल्द ही पूर्ण स्वस्थ होंगे।

विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह कुवैत जाएंगे
कुवैत में हुए अग्निकांड के बाद पीएम मोदी के निर्देशों पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह कुवैत जाएंगे। वे वहां राहत कार्यों की निगरानी करेंगे। इसके साथ ही इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में मारे गए लोगों के शवों की शीघ्र स्वदेश वापसी के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। विदेश राज्य मंत्री ने कहा 'प्रधानमंत्री मोदी ने इस मामले में एक आपात कालीन बैठक बुलाई है। इसके तुरंत बाद हम लोग कुवैत जाएंगे। 
 एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस हादसे में केरल के कई लोग मारे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट में मृतकों के नाम भी बताए गए हैं। हालांकि, अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों की पहचान इस प्रकार की गई: शिबू वर्गीस, उमरुद्दीन शमीर (33), आकाश शशिधरन नायर (23), रंजीत, थॉमस जोसेफ, प्रवीण माधव सिंह, लुकोस उन्नुन्नी, भुनाथ रिचर्ड रॉय आनंद, केलू पी , स्टीफन अब्राहम साबू, मोहम्मद शरीफा, अनिल गिरी, संजू वर्गीस, द्वारिकेश पटनायक, पीवी मुरलीधरन, विश्वास कृष्णन, अरुण बाबू, साजन जॉर्ज, रेमंड, जीसस लोप्स, डेनी बेबी करुणाकरण।

इमारत के मालिक को गिरफ्तार करने के आदेश 
कुवैत के आंतरिक मामलों के मंत्री शेख फहद अल-यूसुफ अल-सबा ने पुलिस को मंगफ स्थित इमारत के मालिक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस हादसे के जिम्मेदार कंपनी और बिल्डिंग के मालिक हैं। उन्होंने कुवैत प्रशासन और नगर पालिका को इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 
बता दें कि कुवैत में करीब 10 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें से करीब 9 लाख भारतीय वहां काम करते हैं।  

Friday, June 7, 2024

नरेंद्र मोदी कैबिनेट में कौन इन-कौन आउट, JDU-TDP से कौन बन सकते हैं मंत्री, मांझी- चिराग को कितना मिलेगा हिस्सा?

 


नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी की 3.0 सरकार का शपथ ग्रहण कल शाम को होने वाला है. इस बार बीजेपी को अपने दम पर पूरा बहुमत नहीं मिला है. सरकार चलाने के लिए उसे अब NDA के अपने सहयोगियों पर निर्भर रहना होगा. कल होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में शपथ लेने वाले मंत्रियों की लिस्ट पर भी इसका असर देखा जा सकता है. इस बार हो सकता है कि बीजेपी कोटे से मंत्रियों की संख्या कम हो और एनडीए के सहयोगी दलों के मंत्रियों की संख्या बढ़ जाए. इसका एक कारण ये भी है कि बीजेपी के कई मंत्री चुनाव हार गए हैं. इनमें स्मृति ईरानी और आर. के. सिंह भी शामिल हैं.

सूत्रों के मुताबिक श्रीकाकुलम लोकसभा क्षेत्र से तेलूगु देशम पार्टी (टीडीपी) के तीन बार के सांसद राममोहन नायडू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है. टीडीपी को मोदी कैबिनेट में एक कैबिनेट मंत्री का पद मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा दो राज्य मंत्री पद भी मिलेंगे. हालांकि पार्टी ने चार पदों- दो कैबिनेट और दो राज्य मंत्री पद के लिए पैरवी की है. इसके अलावा, पार्टी को डिप्टी स्पीकर पद की पेशकश किए जाने की संभावना है.

नीतीश करेंगे मोलभाव!
इसी तरह जनता दल (यू) भी अपने लिए इस बार मंत्री पदों के मामले में जमकर मोलभाव करने से पीछे नहीं हटेगी. जद-यू से भी कई लोग मंत्री बनने की होड़ में शामिल हैं. जिनमें सबसे अहम ललन सिंह और केसी त्यागी को माना जा रहा है. बहरहाल जद-यू के कोटे से कौन मंत्री बनेगा, इसका अंतिम फैसला को पार्टी के मुखिया और बिहार के सीएम नीतीश कुमार के ही हाथ में है. मगर इतना तय है कि नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में ज्यादा बड़ी हिस्सेदारी की इच्छा रखते हैं. सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार ने इसके लिए NDA की बैठक में एक फॉर्मूला भी रखा है. जिसके मुताबिक 4 सांसदों पर एक मंत्री बनाने की प्रस्ताव है. जद-यू को 12 सीटें मिली हैं. इस तरह वो 3 मंत्री पदों की मांग कर सकते हैं.

बीजेपी से ये बनेंगे मंत्री!
इसी तरह बिहार से एनडीए में शामिल चिराग पासवान और जीतनराम मांझी भी कल शपथ लेने वालों में शामिल हो सकते हैं. यूपी में अपना दल की अनुप्रिया पटेल भी शपथ ले सकती हैं. वहीं आंध्र प्रदेश के पवन कल्याण को जिस तरह महत्व मिला है, उससे उनका भी मंत्री बनना तय माना जा रहा है. बीजेपी से जिन लोगों के मंत्री पद की शपथ लेना तय माना जा रहा है, उनमें कई दिग्गजों के नाम शामिल हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी, अनुराग ठाकुर, अर्जुन राम मेघवाल, प्रह्लाद जोशी और मनसुख मांडविया ऐसे नाम हैं, जिनका मंत्री पद की शपथ लेना तय माना जा रहा है.

Thursday, June 6, 2024

लोकसभा चुनाव 2024: अग्निवीर और ओपीएस ने बिगाड़ा भाजपा का खेल



लोकसभा चुनाव के परिणामों पर सबसे अधिक प्रभाव रोजगार का दिखा। सेना में लागू अग्निवीर योजना और सरकारी शिक्षक कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की मांग ने देश भर में असर दिखाया। आने वाले चुनावों में ये मुददे और असरकारक होंगे।

18 वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम पर निर्वाचन आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। किसी भी दल को सरकार बनाने का पूर्ण बहुमत नहीं मिला। अबकी बार चार सौ पार के नारे के साथ चुनाव में उतरी भाजपा के लिए ये बड़ा झटका रहा। हालांकि भाजपानीत एनडीए गठबंधन के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़े हैं। एनडीए की सरकार बनने जा रही है। तय है कि इस सरकार में भाजपा की हनक और खनक पहले जैसी नहीं रहेगी।

चुनाव परिणामों का राजनीतिक दल, राजनीति के जानकार अपने-अपने हिसाब से विश्लेषण कर रहे हैं। जातिय गणितों, धार्मिक मुददों का ऑपरेशन किया जा रहा है। यूपी मंे सपा की जीत को दूसरी नजर से देखा जा रहा है तो मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल आदि राज्यों में भाजपा की एकतरफा जीत को दूसरे नजर से। दरअसल, देश भर से आए चुनाव परिणामों में युवाओं के रोजगार के मुददे का सबसे अधिक असर दिखा। सरकारी शिक्षक/कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग का भी खूब असर दिखा। आने वाले चुनावों में ये असर और स्पष्ट तरीके से दिखेंगे।

किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार के रवैए का भी कई राज्यों के चुनाव परिणामों में असर दिखा। दरअसल, पिछले 10 सालों में केंद्र की मोदी सरकार कई मामलों में हद दर्जे की जिद दिखाई। लोकतंत्र में जिद और मनमर्जी के लिए कोई स्थान नहीं है।

मोदी सरकार और भाजपा सरकारी शिक्षक/कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग की खिल्ली उड़ाते रहे हैं। एनपीए की एडवोकेसी करते रहे। जिन राज्यों ने पुरानी पेंशन बहाल की उन राज्यों को वित्तीय प्रबंधन के नाम पर कोसते रहे। सेना में चार साल की नौकरी अग्निवीर योजना की भाजपाई विशेषता गिनाते रहे। आज भी गिना रहे हैं।युवा इस मामले में भाजपा से दूर छिटक गया। अब युवाओं के मन में भाजपा को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं रहा। 2014 और 2019 के आम चुनाव में युवाओं ने भाजपा को एक तरफा सपोर्ट किया था। युवाओं के सपोर्ट ने भाजपा और विपक्ष के बीच बड़ा अंतर बना दिया था।

भाजपा अग्निवीर को लेकर युवाओं की नाराजगी और पुरानी पेंशन बहाल न होने से शिक्षक/कर्मचारियों की नाराजगी को फ्री राशन से पाटना चाहती थी। उत्तराखंड, हिमाचल, मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में भाजपा इसमें सफल भी हुई। मगर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में भाजपा का ये प्रयोग सफल नहीं हो सका। इन राज्यों में विपक्ष ने अग्निवीर योजना की हकीकत लोगों को बेहतर तरीके से समझाई। पेंशन न होने से सरकारी कर्मचारियों के बुढ़ापे की दुश्वारियों को बताया। परिणाम सबके सामने है।

उत्तराखंड और हिमाचल जैसे राज्य में अग्निवीर और पुरानी पेंशन बहाली मुददे ने कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी की वजह से असर नहीं दिखाया। उक्त मुददे दोनों राज्यों में सुलग रहे थे और अभी भी सुलग रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा उपचुनाव में इसका असर दिखा। हिमाचल की चारों लोकसभा सीट भले ही भाजपा जीतने में कामयाब रही हो। मगर, विधानसभा उपचुनाव में जीत कांग्रेस को मिली। छह में से चार सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। इस तरह से हिमाचल की जनता ने कांग्रेस की सुक्खू सरकार को पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया है। सुक्खू सरकार ने हिमाचल प्रदेश में सरकारी शिक्षक/कर्मचारियों की पेंशन बहाल की है।

बहरहाल, अग्निवीर योजना और पुरानी पेंशन बहाली के मुददों को भले ही भाजपा तवज्जो नहीं देती हो। मगर, एनडीए में शामिल कई दल इन मुददों को मानती और समझती है। उम्मीद है कि एनडीए सरकार अग्निवीर की भी समीक्षा होगी और कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की दिशा में भी कुछ होगा।

Lok Sabha Chunav 2024 : दुनिया का सबसे महंगा चुनाव! अमेरिका से भी ज्‍यादा, कितने रुपये का पड़ा एक वोट?


नई दिल्‍ली. दो महीने तक चला लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) समाप्‍त हो गया और नई सरकार का फैसला भी कर गया. चौंकाने वाले नतीजों के अलावा भी यह चुनाव कई मायनों में काफी खास रहा. सबसे बड़ी बात तो यह कि भारत का लोकसभा चुनाव दुनिया का सबसे महंगा इलेक्‍शन बन गया है. इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि साल 2024 में चुनाव पर हुआ कुल खर्च 2019 के मुकाबले करीब दोगुना से भी ज्‍यादा पहुंच गया है. इतना कि अमेरिका में हुआ हालिया चुनाव का खर्च भी इसके आगे फीका पड़ गया और भारत सबसे महंगा चुनाव कराने वाला देश बन गया है.

35 साल से चुनावी खर्च पर रिपोर्ट जारी करने वाली गैर लाभकारी संस्‍था सेंटर फॉर मीडिया स्‍टडीज (Centre for Media Studies) ने अनुमान लगाया है कि इस बार लोकसभा चुनाव में करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल खर्च 55 से 60 हजार करोड़ रुपये रहा था. इस तरह देखा जाए तो इस बार दोगुने से भी ज्‍यादा पैसा चुनाव में खर्च किया गया है. अमेरिका ने भी साल 2020 में हुए राष्‍ट्रपति चुनाव में करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये ही खर्च किए थे. इस लिहाज से भारत का लोकसभा चुनाव अमेरिका से भी महंगा हो गया है.

3 पार्टियों का खर्च ही 1 लाख करोड़
सेंटर फॉर मीडिया स्‍टडीज का दावा है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 3 राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) का खर्च ही 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह आंकड़ा तो पिछले चुनाव के कुल खर्च से भी करीब डेढ़ गुना ज्‍यादा है. वहीं, कुल चुनावी खर्च 1.35 लाख करोड़ के आसपास रहने का अनुमान है. पिछले लोकसभा चुनाव में हुए कुल खर्च का करीब 45 फीसदी सिर्फ भाजपा ने किया था. संस्‍था का मानना है कि इस बार यह आंकड़ा और भी ज्‍यादा पहुंच सकता है.

कितने रुपये का पड़ा एक वोट
चुनाव आयोग के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि देश में मतदाताओं की संख्‍या करीब 96.6 करोड़ है. इस लिहाज से देखा जाए तो चुनाव में हुए कुल खर्च के सापेक्ष एक वोट की कीमत करीब 1,400 रुपये होगी. पिछले लोकसभा चुनाव में एक वोट की कीमत 700 रुपये रही थी. इस तरह देखा जाए तो एक वोट की कीमत में मध्‍य वर्गीय परिवार का महीनेभर का राशन आ जाएगा. भारत चावल 29 रुपये किलो है और भारत आटा 27.50 प्रति किलोग्राम है.

…जबकि आयोग ने तय की है लिमिट
चुनावी दलों का अंधाधुंध खर्च तब दिख रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने हर कैंडीडेट के खर्च करने की लिमिट तय कर रखी है. चुनाव आयोग के अनुसार, लोकसभा चुनाव लड़ने वाला हर कैंडीडेट अधिकतम 95 लाख रुपये खर्च कर सकता है, जबकि विधानसभा चुनाव के लिए खर्च की लिमिट अधिकतम 40 लाख रुपये है. अरुणाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्‍यों में तो यह लिमिट सांसद के लिए 75 लाख और विधायकों के लिए 28 लाख रुपये ही रखी गई है.

आजादी के बाद से 300 गुना बढ़ा खर्च
भारत की आजादी के बाद 1951-52 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में हर कैंडीडेट के चुनावी खर्च की लिमिट महज 25 हजार रुपये थी. अब तक यह 300 गुना बढ़कर 75-90 लाख रुपये पहुंच गई है. साल 1998 में लोकसभा चुनाव का खर्च 9 हजार करोड़ था, जो 2019 में 60 हजार करोड़ और इस बार तो 1.35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.

Wednesday, June 5, 2024

चंद्रबाबू की वह एक बात... और मोदी सरकार 3.0 पर लग गई मुहर, शपथ ग्रहण की भी आ गई डेट


 नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी सस्पेंस से अब पर्दा उठता दिख रहा है. बीजेपी ने आज शाम एनडीए के घटक दलों की बैठक बुलाई है. इस बैठक से पहले टीडीपी चीफ चंद्रबाबू ने ऐसा बयान दिया, जिससे नरेंद्र मोदी सरकार 3.0 पर मुहर लग गई.

टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू से बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पूछा गया कि वह दिल्ली में किसे समर्थन देने जा रहे हैं, तो उन्होंने साफ किया कि वह एनडीए के साथ मजबूती से खड़े हैं. चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ‘आप हमेशा खबर चाहते हैं. मैं अनुभवी हूं और मैंने इस देश में कई राजनीतिक बदलाव देखे हैं. हम एनडीए में हैं, और मैं एनडीए की बैठक में जा रहा हूं.’ और फिर इसके बाद वह विमान के लिए कूच कर गए.

उधर सीएम नीतीश कुमार भी एनडीए की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं. उन्होंने समर्थन को लेकर कोई बयान नहीं दिया, लेकिन उनकी पार्टी जेडीयू साफ कर चुकी है कि वह एनडीए के ही साथ रहेगी.

दरअसल लोकसभा चुनाव में एनडीए को 292 सीटों पर जीत मिली है. ऐसे में उसे सरकार बनाने के लिए बहुमत तो हासिल है, लेकिन इसमें बीजेपी के पास 240 सीटें ही आई हैं. इसलिए अगली सरकार के गठन में 16 सीटों वाली टीडीपी और 12 सांसदों वाली जेडीयू का रोल अहम हो जाता है.

उधर 234 सीटे जीतने वाला विपक्षी इंडिया गठबंधन भी अगली सरकार बनाने का दावा कर रहा और खबर है वह भी इन दोनों नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटी है. इस बीच सियासत के मंझे खिलाड़ी के रूप में मशहूर शरद पवार भी दिल्ली पहुंच गए. माना जा रहा है कि इंडिया एलायंस के सबसे बुजुर्ग नेता पवार एनडीए में तोड़फोड़ की कोशिश करेंगे.

हालांकि अब चंद्रबाबू नायडू के इस बयान के बाद शरद पवार की कोशिशों पर विराम लग सकता है. इस बीच नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तारीख भी आ गई है. बीजेपी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि 8 जून को भी नई सरकार का शपथग्रहण हो सकता है. यह समारोह राष्ट्रपति भवन में हो सकता है. हालांकि इस पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है.

Tuesday, June 4, 2024

नीतीश कुमार करेंगे NDA के साथ खेला? INDIA गठबंधन द्वारा डिप्टी PM पद ऑफर देने की खबरें



लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सुबह से जारी काउंटिंग के रुझानों में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी पिछले दस सालों में पहली बार बहुमत से आंकड़े से नीचे आई है, जिसके चलते सरकार बनाने के लिए एनडीए के घटक दलों यानी जेडीयू और टीडीपी पर निर्भर हो गई है। इसके चलते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों के लिए अहम किरदार बन गए हैं। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि इंडिया गठबंधन की तरफ से नीतीश कुमार को डिप्टी PM का पद ऑफर किया गया है।

दरअसल, वोटों की काउंटिगं के बीच ही सपा के एक नेता ने कहा है कि नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन में वापसी करेंगे। सपा नेता के द्वीट ने ऐसे वक्त में चर्चा बटोरी है, जबकि एनडीए 300 सीटों के आंकड़े को पार करने के लिए संघर्ष कर रही है। समाजवादी पार्टी के आई.पी. सिंह ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि 'नीतीश हमारे थे, हमारे हैं और हमारे ही रहेंगे. जय सीता राम।'

दरअसल, वोटों की काउंटिगं के बीच ही सपा के एक नेता ने कहा है कि नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन में वापसी करेंगे। सपा नेता के द्वीट ने ऐसे वक्त में चर्चा बटोरी है, जबकि एनडीए 300 सीटों के आंकड़े को पार करने के लिए संघर्ष कर रही है। समाजवादी पार्टी के आई.पी. सिंह ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि 'नीतीश हमारे थे, हमारे हैं और हमारे ही रहेंगे. जय सीता राम।'

शरद पवार ने दिया स्पष्टीकरण

इस बात की खबर भी है कि शरद पवार ने नीतीश कुमार को फोन करके बात की है। दूसरी ओर सपा नेता के इन दावों को NCP प्रमुख शरद पवार ने सिरे से खारिज कर दिया है। शरद पवार का कहना है कि उनकी नीतीश कुमार से कोई बातचीत हुई है। दूसरी ओर बीजेपी इस बार अकेले बहुमत नहीं मिला है, तो पार्टी ने सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है।

लोकसभा चुनाव नतीजों के बीच शरद पवार ने कहा कि मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि ऐसा परिणाम आएगा। मैने सिर्फ कांग्रेस के लोगों से बात की है अब तक और किसी से नहीं बात नहीं है। शरद पवार ने कहा कि आज का परिणाम आने वाले विधानसभा चुनाव में हमारे लिए प्रेरणादाई होगा। राम मंदिर को लेकर जो माहौल बनाया गया, उसका जवाब जनता ने दे दिया है।


Monday, June 3, 2024

BREAKING NEWS: दिल्ली में AAP-कांग्रेस का 'ब्रेकअप', नतीजों से चंद घंटे पहले I.N.D.I.A. में बड़ी फूट




नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की मतगणना का परिणाम और आईएनडीआइए का भविष्य भले जो हो, लेकिन दिल्ली में आप एवं कांग्रेस की राहें अलग-अलग हो गई हैं। कांग्रेस की दिल्ली इकाई आप सरकार से जुड़े मुददों पर अब चुप्पी भी नहीं साधेगी, भाजपा के साथ आप भी हमलावर रहेगी। फरवरी 2025 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी यह अलगाव बरकरार रहने के संकेत हैं।

गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस की रजामंदी न होने पर भी शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर राजधानी में आप और कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में हाथ मिलाना पड़ा था। सात में से चार सीटों पर आप व तीन सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव लड़े। हालांकि पंजाब में दोनों पार्टियों ने अलग- अलग चुनाव लड़ा और एक- दूसरे के खिलाफ खासा जहर भी उगला।
आप से अलग होने की आधिकारिक घोषणा

दिल्ली में भी पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने मंच साझा नहीं किया। जबरन थोपे गए इस गठबंधन के विरोध में ही अरविंदर सिंह लवली ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ दिया तो छह अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी कांग्रेस को बाय- बाय कर दिया। अब जबकि लोकसभा चुनाव खत्म हो गया है और मंगलवार को चुनाव परिणाम भी सामने आ जाएगा, तो प्रदेश कांग्रेस ने आप से अलग होने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

आप की गलत नीतियों का विरोध करेंगे

जागरण से बातचीत में प्रदेश इकाई अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि आईएनडीआईए भी लोकसभा चुनाव के लिए ही बना था और दिल्ली में आप-कांग्रेस का सियायी गठजोड़ भी केवल इसी चुनाव के लिए किया गया था। अब दोनों के बीच कोई समझौता नहीं रहा है। कांग्रेस पूर्णत: स्वतंत्र है। ऐसे में निश्चित तौर पर हम जनहित के मुददाें पर भाजपा के साथ साथ आप को भी कठघरे में खड़ा करेंगे और पुरजोर तरीके से आप की गलत नीतियों का विरोध करेंगे।

आप से बेहतर चुनाव कांग्रेस उम्मीदवारों ने लड़ा

विधानसभा चुनाव के संदर्भ में पूछे जाने पर यादव ने कहा कि भविष्य के निर्णय को लेकर अभी स्पष्ट तौर पर कुछ कह पाना मुश्किल है।। हालांकि प्रबल संभावना यही है कि विधानसभा चुनाव आप-कांग्रेस अलग अलग अपने दम पर लडेंगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लोकसभा चुनाव में आप से बेहतर चुनाव कांग्रेस उम्मीदवारों ने लड़ा। चुनाव परिणाम में भी भाजपा उम्मीदवारों के साथ उनकी लड़ाई कहीं ज्यादा करीब रह सकती है।

Saturday, June 1, 2024

RBI ने क्‍यों मंगाया 100 टन सोना, 33 साल पहले मनमोहन सिंह ने ले जाकर बेचा था 47 टन गोल्‍ड, क्‍या इस बार भी...

 


नई दिल्‍ली. आज दिनभर आपको मीडिया में यह खबर पढ़ने को मिली है कि रिजर्व बैंक ने इंग्‍लैंड के बैंक में जमा अपना 100 टन गोल्‍ड वापस भारत मंगा लिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी भारी मात्रा में सोना देश में मंगाने का क्‍या कारण हो सकता है. आपको याद होगा कि आज से करीब 33 साल पहले जब मनमोहन सिंह वित्‍तमंत्री थे, तब भारत से 47 टन सोना देश के बाहर ले जाकर बेच दिया गया था. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल बार-बार उठ रहा कि आखिर इस बार आरबीआई ने इतनी बड़ी मात्रा में सोना क्‍यों मंगाया है.

सबसे पहले बात करते हैं कि आखिर रिजर्व बैंक देश का सोना बाहर क्‍यों रखता है. इसकी दो बड़ी वजहें हैं. पहली तो यह हर साल आरबीआई भारी मात्रा में गोल्‍ड खरीदता है. जाहिर है कि यह सोना विदेश से खरीदा जाता है और ग्‍लोबल लेवल पर सोने का सबसे बड़ा एक्‍सचेंज मार्केट भी इंग्‍लैंड में है. लिहाजा आरबीआई उसी एक्‍सचेंज से गोल्‍ड खरीदकर इंग्‍लैंड के ही बैंक में जमा करा देता है. इससे सोने की लॉजिस्टिक्‍स कॉस्‍ट बच जाती है. दूसरा बड़ा कारण ये है कि बैंक ऑफ इंग्‍लैंड सैकड़ों साल से सोने की हिफाजत करता आ रहा है और उसे इस मामले में काफी अनुभव है. इस बैंक को दुनिया का सबसे सुरक्षित बैंक भी माना जाता है.

क्‍या हुआ था 33 साल पहले
यह बात है साल 1991 की, जब केंद्र में चंद्र शेखर की सरकार थी, तब देश की बैलेंस शीट काफी गड़बड़ा गई थी. आरबीआई के पास आयात बिल जमा करने के लिए भी पैसे नहीं थे. इस कमी को पूरा करने के लिए आरबीआई को 46.91 टन सोना बैंक ऑफ इंग्‍लैंड के पास गिरवी रखना पड़ा था. इस सोने से तब 40 करोड़ डॉलर की रकम इंग्‍लैंड और जापान से लेनी पड़ी थी. उस समय मनमोहन सिंह देश के वित्‍तमंत्री थे.

फिर मनमोहन सिंह ने की थी भरपाई
20 साल बाद समय ने एक बार फिर सोने और मनमोहन सिंह की कहानी दोहराई. इस बार मामला पूरी तरह पलटा नजर आया. यह बात है साल 2009 की तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे. उन्‍होंने देश की संपत्तियों को डाईवर्सिफाई करने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 200 टन सोना खरीद लिया. इसके लिए आरबीई को 6.7 अरब डॉलर खर्च करने पड़े थे. इसके बाद से रिजर्व बैंक लगातार सोने की खरीद कर रहा है.

फिर क्‍यों मंगाया आरबीआई ने सोना
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो रिजर्व बैंक ने इतनी बड़ी मात्रा में सोना इसलिए वापस अपने वॉल्‍ट में मंगाया है, क्‍योंकि बैंक ऑफ इंग्‍लैंड इस गोल्‍ड की सुरक्षा के लिए आरबीआई से मोटा पैसा चार्ज करता है. विदेशी बैंक में सोने को रखने की लागत काफी ज्‍यादा हो रही है. इस लागत को बचाने के लिए ही रिजर्व बैंक ने 100 टन सोना इंग्‍लैंड से भारत मंगाने का फैसला किया है.

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