एक और आतंकी हमले में चार जवान बलिदान हो गए। पिछले तीन वर्ष में जम्मू संभाग में यह सातवां बड़ा हमला था। इन सात हमलों में अब तक 32 जवान बलिदान हो चुके हैं। पुंछ के भाटादूड़ियां के जंगलों से निकला आतंक का जिन्न डोडा पहुंच गया है। वहीं, आतंकियों पर कार्रवाई रणनीतिक बैठकों और सर्च ऑपरेशन से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि आतंकियों पर अब बड़ी और तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। जंगलों में छिपे आतंकियों पर कार्रवाई के लिए आधुनिक संचार नेटवर्क, खुफिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है। पूर्व मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जमवाल कहते हैं कि सुरक्षा एजेंसियां अपने साथ जंगल के हर एक गांव को जोड़ें। खासकर युवाओं और पूर्व सैनिकों को साथ जोड़ें। जम्मू संभाग में तैनात रह चुके स्थानीय पूर्व सैनिकों की मदद लेनी चाहिए। सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ाने से जरूरी है कि आम लोगों को साथ जोड़ा जाए।
