Tuesday, December 2, 2025

आज का खास कार्यक्रम: बच्चों की जुबानी कहानी

 आज का खास कार्यक्रम: बच्चों की जुबानी कहानी : DIET Ratura Rudrapryag Initiative

 

आज दिनांक 29 नवंबर 2025 को अपराह्न 12.15  बजे हमारे संस्थान का अभिनव कार्यक्रम "आज की कहानी बच्चों की जुबानी" रेडियो मंदाकिनी की आवाज, रेडियो केदार और रेडियो ऋषिकेश से प्रसारित होगा।

हम सभी से विनम्र अनुरोध है कि इस कार्यक्रम को ध्यानपूर्वक सुनें और अपने विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को भी सुनाने हेतु उचित व्यवस्था करें। निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने भी इस नवाचारी पहल की तारीफ अपने संदेश मे की । 


कार्यक्रम की विशेष झलक

  • कहानी प्रस्तुतकर्ता: रा०प्रा०वि० फली फसालत वि०ख० ऊखीमठ के कक्षा दो के छात्र स्वाति और वैभव

  • मार्गदर्शक शिक्षिका:  अर्चना बगवाड़ी

  • विशेष संदेश: कहानी से पूर्व निदेशक महोदया, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखंड,  बंदना गर्ब्याल  का प्रेरणादायी संदेश । इसी क्रम मे अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने भी इस पहल की शुरुवात के लिए प्राचार्य डाइट सी पी रतूडी को बधाई दी । 


कार्यक्रम का उद्देश्य

  • भाषाई दक्षता का विकास: बच्चों को अपनी भाषा में सहज और प्रवाहपूर्ण अभिव्यक्ति का अवसर मिलता है।

  • आत्मविश्वास और एक्सपोजर: रेडियो मंच पर प्रस्तुति से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें व्यापक श्रोताओं तक पहुँचने का अनुभव मिलता है।

  • नवाचार और प्रेरणा: यह कार्यक्रम शिक्षा में नवाचार का उदाहरण है, जो बच्चों को सीखने के साथ-साथ प्रेरित भी करता है।

क्यों है यह कार्यक्रम खास?

कक्षा १ और २ के छोटे बच्चों द्वारा रेडियो स्टेशन पर जाकर अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप कहानी का वाचन करना अपने आप में एक अनूठा अनुभव है। यह न केवल उनकी सीखने की यात्रा को रोचक बनाता है, बल्कि उन्हें समाज के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी देता है।


Saturday, November 1, 2025

SARTHAQ 2.0: Operationalising NEP 2020

 SARTHAQ 2.0: Operationalising NEP 2020

The SARTHAQ 2.0 framework outlines SCERTs’ five-year roadmap to:

  • Achieve Foundational Literacy and Numeracy (FLN) goals by 2026

  • Implement Quality Assessment and Assurance Frameworks

  • Lead systematic teacher capacity building

  • Establish monitoring and benchmarking systems for accountability

This framework empowers SCERTs to act as agents of systemic reform, linking national policy with state-level implementation.


Implementation Challenges & Strategic Solutions

The Concept Note also identified key challenges faced by SCERTs:

  • Human Resource Constraints: Lack of standardized cadre structures and limited professional development

  • Infrastructure Gaps: Shortage of ICT labs, smart classrooms, and research facilities

  • Fragmented Coordination: Weak linkages between NCERT, SCERTs, and DIETs

  • Research Deficits: Limited capacity for documentation and innovation

To address these, the conference emphasized the use of Quality Assurance Frameworks and SCERT Benchmarking Tools for structured self-assessment and performance-based planning.


Peer Learning & National SCERT Excellence Network (NSEN)

The conference proposed the creation of NSEN, a collaborative platform for:

  • Sharing state-level best practices

  • Facilitating inter-state mentoring and innovation

  • Institutionalizing 50-hour CPD programs and peer learning sessions

  • Promoting digital knowledge sharing via repositories and forums

This network aims to transform SCERTs into vibrant Professional Learning Commons, cultivating a culture of excellence and collaboration.


Evening Reflections & Vision for Viksit Bharat

The evening session was graced by Dr. Dinesh Saklani, Director of NCERT, who delivered a visionary address:

“Let us build an ecosystem where students and teachers enjoy education, collaborate meaningfully, and contribute to Viksit Bharat 2030. Let real Bharat’s knowledge system flourish.”

Dinner was offered and hosted by Dr Saklani for all participants, fostering informal dialogue and camaraderie. Prof. Amrandra BehraJoint Director, CIET, joined the gathering, along with Prof. BhardwajProf. Srivastava, and Prof. Ranjana Arorawho had actively contributed to earlier sessions.


Key Objectives of the Conference

  1. Review SCERTs’ evolving roles under NEP 2020

  2. Assess progress on SARTHAQ 2.0 implementation

  3. Strengthen institutional autonomy and capacity

  4. Document scalable state-level innovations

  5. Promote inter-state collaboration via NSEN

  6. Develop a roadmap for SCERTs as learning commons

Expected Outcomes

  • A shared national framework for SCERT transformation

  • Identification of scalable innovations and best practices

  • Establishment of inter-state peer learning mechanisms

  • Drafting of state-specific action plans aligned with NEP 2020

  • Consensus on monitoring and benchmarking tools

A Collective Leap Forward

This landmark conference reaffirmed SCERTs’ central role in India’s educational transformation. With a clear roadmap, collaborative spirit, and visionary leadership, SCERTs are poised to become the academic backbone of a future-ready education system.

Uttarakhand’s showcase of digital innovation stood out as a model for inclusive, scalable reform. As we move toward 2030, the synergy between policy, practice, and technology will define the next chapter of educational excellence.

Source- SCERT 

Saturday, October 18, 2025

एनईपी 2020 की भावना के अनुरूप ‘कृति की अवधारणा’ पर डिजिटल कंटेंट विकास कार्यशाला – एससीईआरटी देहरादून में प्रारंभ

 


देहरादून, 13 अक्टूबर 2025 – राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों और दृष्टि के अनुरूप एनसीईआरटी पुस्तक “कृति की अवधारणा” पर आधारित डिजिटल कंटेंट विकास हेतु पाँच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ एससीईआरटी, देहरादून के कला विभाग में किया गया। यह कार्यशाला 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की जा रही है।

इस कार्यशाला में संगीत विषय के विशेषज्ञों, गायन एवं वादन के कलाकारों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। साथ ही एससीईआरटी के विशेषज्ञों ने भी सहभागिता कर राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (SCF)राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020)कौशल विकाससंज्ञानात्मक (Cognitive) विकासभावात्मक (Affective) विकास, तथा सांस्कृतिक विविधता जैसे महत्वपूर्ण आयामों को ध्यान में रखते हुए विषयवस्तु के अनुरूप संचार स्क्रिप्ट तैयार करने का कार्य प्रारंभ किया।

कार्यशाला का समन्वयन डॉ. ऊषा कटियार द्वारा किया जा रहा है। नीति की गहन समझ एवं दिशा प्रदान करने में सुनील भट्ट, डॉ. नन्द किशोर हटवाल, कमाक्षा मिश्रा, और डॉ. संजीव चेतन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

संगीत विशेषज्ञों में डॉ. हिमांशु जोशी, मनोज थापा, मिनी सोई, आशा भट्ट, पुष्पिंदर सिंह, और विक्रम जी ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। इन सभी प्रतिभागियों के संयुक्त प्रयास से संगीत शिक्षण को डिजिटल रूप में अधिक सजीव, रचनात्मक और सुलभ बनाने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।

यह डिजिटल कंटेंट न केवल संगीत शिक्षकों और शिक्षिकाओं के लिए उपयोगी होगा, बल्कि विद्यार्थियों में संगीत के प्रति रुचि और संवेदनशीलता विकसित करने में भी सहायक सिद्ध होगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में नैतिकता, मूल्य, संस्कार, और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा।

‘कृति की अवधारणा’ पर आधारित यह पहल संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयास है, जो नई शिक्षा नीति की उस भावना को मूर्त रूप देती है जिसमें ज्ञान, कौशल, और संवेदना का समन्वय सर्वोपरि है।

माध्यमिक स्तर के छात्रों हेतु करियर बुक सामग्री विकास कार्यशाला का शुभारंभ

 Dr Deepak Pratap Report

एस.सी.ई.आर.टी., उत्तराखंड, देहरादून में “माध्यमिक स्तर के छात्रों हेतु करियर बुक सामग्री विकास” विषय पर पाँच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ 13 अक्टूबर 2025 को हुआ। यह कार्यशाला 17 अक्टूबर तक आयोजित की जाएगी।

कार्यशाला में राज्य के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने प्रतिभाग के रूप में भाग लिया। कार्यशाला का समन्वयन  प्रिया गुसाईं द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ कार्यशाला के उद्देश्यों, प्रस्तावित करियर बुक की रूपरेखा तथा आगामी गतिविधियों की जानकारी साझा की।

इस अवसर पर सहायक निदेशक डॉ  के. एन. बिजल्वाण ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने करियर बुक में स्व-रोजगार से संबंधित सामग्री को भी शामिल करने पर बल दिया, ताकि छात्र केवल रोजगार पाने के लिए ही नहीं बल्कि रोजगार सृजन के लिए भी प्रेरित हों।

कार्यशाला के प्रथम दिवस में प्रतिभागियों ने माध्यमिक स्तर पर करियर मार्गदर्शन की आवश्यकता, विषयवार करियर विकल्प, तथा छात्रों के लिए उपयोगी स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

पहले दिन की कार्यवाही उत्साहपूर्ण रही और सभी प्रतिभागियों ने करियर शिक्षा को व्यवहारिक और प्रेरणादायक बनाने के सुझाव प्रस्तुत किए।

राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समागम ‘इंटर-डायट कल्चरल मीट कौथिग 2025’ का दो दिवसीय प्रोग्राम — उत्तराखंड की लोक संस्कृति के रंगों में रंगा SCERT सभागार

 

देहरादून, 13 अक्टूबर 2025।

देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समागम — इंटर-डायट कल्चरल मीट “कौथिग 2025” का दो दिवसीय आयोजन आज SCERT उत्तराखंड के सभागार में डायट देहरादून के तत्वावधान में आरंभ हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे मुख्य अतिथि विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, वंदना गर्ब्याल  ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया । उन्होंने अपने संबोधन में इस आयोजन की आवश्यकता एवं नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के साथ इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।


निदेशक, माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती ने अपने संदेश में प्रदेश के युवाओं से अपनी संस्कृति, लोककला और परंपराओं से गहराई से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में निर्णायक मण्डल के रूप में डॉ. माधुरी बर्थवाल, श्रीमती रेखा धस्माना, श्रीमती संगीता ढोंडियाल, श्री गिरीश सुनेरियाल एवं श्री अरुण जोशी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डायट देहरादून के प्रवक्ता  राम सिंह और  सुरेश चन्द्र पोखरियाल ने कुशलतापूर्वक किया। डायट प्राचार्य  हेमलता गौड़ ने सभी आगंतुकों एवं अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया।

कार्यक्रम के उद्देश्य और गतिविधियाँ

कार्यक्रम संयोजक राखी पांडेय ने बताया कि इस सांस्कृतिक समागम का उद्देश्य प्रदेश के भावी शिक्षकों को उत्तराखंड की गौरवशाली लोक परंपराओं से जोड़ना है, ताकि वे आने वाली पीढ़ियों तक लोककथाओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को पहुंचा सकें।

दो दिवसीय यह कार्यक्रम प्रदेश के सभी डायट्स के डी.एल.एड. प्रशिक्षुओं की सक्रिय भागीदारी से संपन्न हो रहा है। प्रशिक्षु पांच प्रमुख गतिविधियों — नृत्य नाटिका, पारंपरिक लोक नृत्य, बाल कविता, नाटक एवं वाद्य वादन में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।


उद्घाटन सत्र में सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। विभिन्न डायट्स की टीमों ने रामी बौराणी, जीतू बगड़वाल, माधव सिंह भंडारी और गंगा जैसी प्रसिद्ध लोकगाथाओं पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिकाएँ प्रस्तुत कीं।

भोजनावकाश के उपरांत कक्षा 3 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियाँ मंचित की गईं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करना रहा। इस वर्ष डायट देहरादून को इस राज्य स्तरीय आयोजन की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ है। अपर निदेशक परिषद पदमेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाए प्रेषित की । 

लोकधुन” कार्यक्रम में झूम उठा SCERT सभागार — संस्कृति और संगीत का संगम

 

 

दिनांक: 15 अक्टूबर 2025, स्थान: SCERT सभागार, देहरादून

समग्र शिक्षा उत्तराखण्ड के तत्वावधान में आयोजित नवाचारी कार्यक्रम “लोकधुन” का आयोजन 15 अक्टूबर को SCERT के सभागार में किया गया। राज्य के 380 विद्यालयों में संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, संगीत और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।


कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक अकादमिक  बन्दना गर्ब्याल द्वारा किया गया। उन्होंने लोकगायक प्रीतम भरतवाण और प्रसिद्ध ढोल वादक डॉ. सोहन लाल सहित उनकी पूरी टीम का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।


इस अवसर पर डॉ. उषा कटियार, प्रवक्ता SCERT, ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया जिसने पूरे सभागार को सांस्कृतिक वातावरण से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन गढ़वाली और कुमाउनी में थिएटर कलाकार धर्मेन्द्र नेगी तथा हिन्दी में रंगकर्मी व लोकप्रिय शिक्षक गिरीश बडोनी द्वारा किया गया, जिनके संयोजक शब्दों ने सभी को बांधे रखा।


लोकगायक प्रीतम भरतवाण और डॉ. सोहन लाल ने अपनी टीम के साथ ढोल, दमाऊं और रणसिंघा की थाप पर उत्तराखण्ड की लोकधुनों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुति दी कि पूरा सभागार झूम उठा। “ढोल सागर” की ताल पर उनकी जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में 100 से अधिक विद्यालयों के शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे, जिन्होंने उत्साहपूर्वक इन लोक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। इस अवसर पर अपर निदेशक समग्र शिक्षा कुलदीप गैरोलाउपनिदेशक अजीत भण्डारी और पल्लवी नैन सहित कई अधिकारी भी मौजूद रहे।


दूसरे सत्र में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा ने आगमन कर सभी कलाकारों को बधाई दी और इस अनूठी पहल की सराहना की।

निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने अपने वक्तव्य में कहा कि “लोकधुन” जैसे कार्यक्रम हमारी **संस्कृति को सहेजने और विद्यार्थियों तक जीवंत रूप में पहुँचाने का माध्यम हैं। यह पहल उत्तराखण्ड की लोक परंपरा को नए आयाम देगी।”

MOOC 3.0 वर्कशॉप

 MOOC 3.0 वर्कशॉप का दूसरा दिन – SME और कोर्स रिव्यूअर्स ने मिलकर दिए अंतिम रूप कोर्स मॉड्यूल्स को, दीपावली शुभकामनाओं के साथ सम्पन्न हुआ सत्र

17 अक्टूबर 2025  स्थान: आई.टी. लैब, SCERT उत्तराखण्ड, देहरादून

SCERT उत्तराखण्ड में चल रही MOOC 3.0 विकास कार्यशाला का आज दूसरा दिन उत्साह और नवाचार से भरपूर रहा। इस दिन SME (Subject Matter Experts) और कोर्स रिव्यूअर्स (Course Reviewers) ने मिलकर सभी छह कोर्सों की विस्तृत सामग्री, वीडियो स्क्रिप्ट, ई-पोर्टफोलियो और मॉड्यूल टाइमलाइन को अंतिम रूप दिया।
कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों के लिए एक उन्नत डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म तैयार करना है जो AI आधारित शिक्षण कौशलडिजिटल दक्षता, और नवाचारपूर्ण अध्यापन को बढ़ावा देगा।

आज के सत्र में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जुड़े सभी विशेषज्ञों ने समूह कार्य (Group Discussion) के माध्यम से Course 1 से Course 6 तक की स्क्रिप्ट, वीडियो कंटेंट, ई-पोर्टफोलियो गतिविधियाँ और मॉड्यूल-वार कार्य योजना को अंतिम रूप प्रदान किया।

कोर्स के प्रमुख विषय एवं दिशा:

क्रकोर्स का नामफोकस क्षेत्र
1Using AI in Productivityदस्तावेज़, रिपोर्ट और कक्षा प्रबंधन में AI का उपयोग
2AI-driven Interactive Lesson Plan Developmentइंटरएक्टिव शिक्षण योजनाओं में AI एकीकरण
3AI-based Multimedia & Video Integrationवीडियो, ऑडियो और दृश्य सामग्री में AI उपकरणों का प्रयोग
4Cybersecurity & Digital Hygieneसाइबर सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार
5AI, Coding & Educational Game Developmentगेम निर्माण और कोडिंग आधारित शिक्षण नवाचार
6Research Writing – Structure & Toolsअनुसंधान लेखन, डेटा विश्लेषण और संदर्भ उपकरण

कार्ययोजना और समयरेखा (Work Plan & Timeline):
सभी SMEs और कोर्स टीम ने 45 दिनों की कार्य समयरेखा तय की है जिसके अंतर्गत प्रत्येक कोर्स को क्रमशः निम्न चरणों में विकसित किया जाएगा:

  1. स्क्रिप्ट एवं सामग्री विकास: 45 दिन

  2. मल्टीमीडिया निर्माण एवं रिकॉर्डिंग: 3  दिन

  3. रीव्यू एवं संशोधन: 10 दिन

  4. टेस्टिंग एवं फाइनल अपलोड: 30 दिन

इस योजना के अनुसार MOOC 3.0 के सभी छह कोर्स दिसंबर 2025 तक लॉन्च के लिए तैयार हो जाएंगे।

कार्यशाला के कोर्स कोऑर्डिनेटर आर. पी. बडोनी (आई.टी. प्रवक्ता, SCERT) ने कोर्स की संपूर्ण कार्य योजना का समापन प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि राज्य के शिक्षकों के लिए एक डिजिटल नवाचार आंदोलन है।
उन्होंने टेक टीम, रिव्यूअर टीम और सभी विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी प्रतिभागियों ने मिलकर कोर्स के प्रत्येक बिंदु को NEP 2020 के अनुरूप उत्कृष्ट रूप से तैयार किया है।

प्रमुख सहभागी विशेषज्ञ:

  • प्रो. अजय सेमल्टी, केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर
  • डॉ इस्तेयाक अहमद , पेट्रोलियम विश्वविद्यालय देहरादून 
  • डॉ. किरण डंगवाल, लखनऊ विश्वविद्यालय
  • डॉ आशीष रतूडी , डॉल्फिन इंस्टिट्यूट देहरादून 
  • डॉ. चाँदनी अग्रवाल, नई दिल्ली
  • अल्पा निगम, Fulbright स्कॉलर एवं राष्ट्रीय पुरस्कार शिक्षक, उत्तर प्रदेश
  •  इमरान खान, एप गुरु राजस्थान
  •  दौलत गुसाईं, राष्ट्रीय पुरस्कार शिक्षक
  • भास्कर जोशीनवाचरी टेक शिक्षक
  • डॉ. अतुल बमराड़ा, नवाचरी टेक शिक्षक
  • जे. पी. डोभाल, राष्ट्रीय पुरस्कार शिक्षक
  • मनोधर नैनवालराष्ट्रीय पुरस्कार शिक्षक
  • सुप्रिया बहुखण्डीराष्ट्रीय पुरस्कार शिक्षक
  • प्रदीप नेगीराष्ट्रीय पुरस्कार शिक्षक
  • डॉ. आशुतोष वर्मा, प्रवक्ता डाइट चंपावत 
  • लता आर्य ,प्रवक्ता डाइट चंपावत 
  • प्रकाश चंद्र उपाध्याय, राज्य पुरस्कार शिक्षक
  • वर्जिन , टेक ऐनमैटर  एससीआरटी तमिलनाडु 
  • भूपाल सिंह नेगीप्रवक्ता डाइट यू एस नगर 
  • अंकित जोशी, टेक शिक्षक अल्मोड़ा 

कार्यशाला के दूसरे दिवस पर  निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल , अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी और उपनिदेशक अजीत भण्डारी ने “MOOC 3.0  की सफलता  को बेहतर विकास की अपेक्षा करते हुए सभी एक्सपर्ट   के प्रति  आभार संदेश  और दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दी ।”कार्यशाला का समापन सत्र सौहार्द और उत्साह के वातावरण में हुआ। समापन के दौरान आर. पी. बडोनी ने सभी उपस्थित विशेषज्ञों, कोर्स डेवलपर्स और रिव्यूअर्स को उनके सहयोग और समर्पण के लिए धन्यवाद दिया।

कार्यक्रम के अंत में  आई टी विभाग से प्रवक्ता एस पी वर्मा और पुष्पा असवाल ने के द्वारा सभी प्रतिभागियों को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दी गईं और यह संदेश दिया गया कि —

“ज्ञान का प्रकाश ही सच्ची दीपावली है, जो शिक्षकों के माध्यम से हर कक्षा तक पहुंचे।”

MOOC 3.0 वर्कशॉप ने उत्तराखण्ड के शिक्षकों के डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम रखा है। अगले 45 दिनों में कोर्स का फाइनल ड्राफ्ट तैयार होकर शिक्षकों के लिए उपलब्ध होगा।
यह पहल निश्चित रूप से स्मार्ट डिजिटल टीचर के विज़न को साकार करेगी और उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी डिजिटल शिक्षा राज्यों में शामिल करेगी।

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